हरियाणा का ये सामुदायिक रेडियो गांव के मुद्दों पर करता है बात  

हरियाणा का ये सामुदायिक रेडियो गांव के मुद्दों पर करता है बात  हरियाणा का ये सामुदायिक रेडियो इस क्षेत्र में जानकारी का है सशक्त माध्यम। 

आज विश्व रेडियो दिवस पर हम आपको हरियाणा के एक ऐसे सामुदायिक रेडियो के बारे में बताने जा रहे है जिसने अपने क्षेत्र में न सिर्फ सरकारी योजनाओं के प्रयोग के बारे में बताया है बल्कि यहां के लोगों में दूरियों को मिटाने का भी काम किया है। जो ग्रामीण एक समय माइक लगते ही बात करने से झिझकते थे आज वो खुलकर अपनी बात रख पाते हैं।

राजधानी दिल्ली और गुड़गांव की चकाचौंध से महज 70 किलोमीटर दूर हरियाणा के नूंह जिले में चल रहे सामुदायिक रेडियो को यहाँ के ग्रामीण सूचना देने के मामले में इसे सशक्त माध्यम मानते हैं। जो ग्रामीण कभी बात करने में झिझकते थे आज वो अपनी बात इस सामुदायिक रेडियो पर बेबाकी के साथ कह पाते हैं।

“रेडियो सुनने का दीवाना सन पैंसठ से हूँ, जबसे हमारा रेडियो खुला है तबसे यही सुन रहा हूँ। इस रेडियो में जो भी बात होती है वो हमारी बात होती है। हम रेडियो में फोन करते हैं तो हमें हमारी आवाज़ सुनाई पड़ती है। हमारी समस्याओं की बात होती है, सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है।” ये कहना है अस्लूख खान (65 वर्ष) का।

वो गाँव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, “इस रेडियो की खासियत ये है कि हमें क्या सुनना है ये हमसे पूंछा जाता है। पहले हम अधिकारियों से बात करने के लिए परेशान रहते थे, अब रेडियो स्टेशन में सीधे फोन करके इन अधिकारियों से बात कर लेते हैं।” अस्लूख खान नूंह जिले के घाघस गाँव में स्थित सामुदायिक रेडियो ‘अल्फाज़ ए मेवात’ से 12 किलोमीटर दूर फिरोजपुर ब्लॉक के कालियाबाग गाँव के रहने वाले हैं।

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सामुदायिक रेडियो ‘अल्फाज़ ए मेवात’ में रेडियो पर प्रसारण के दौरान सीधे बात करते ग्रामीण।

वर्तमान समय में पूरे देश में 200 से ज्यादा सामुदायिक रेडियो चल रहे हैं। इनमें से हरियाणा के नूंह जिले का ‘अल्फाज़ ए मेवात’ सामुदायिक रेडियो एक है। इस रेडियो को 225 गाँव के हजारों ग्रामीण प्रतिदिन बड़ी उत्सुकता के साथ सुनते हैं क्योंकि इसमें उनकी आवाज़ में उनकी समस्या की बात होती है। 28 फरवरी 2012 को एक घंटे प्रसारण से शुरू हुआ ये सामुदायिक रेडियो आज 13 घंटे का प्रसारण कर रहा है। सामुदायिक रेडियों में चल रहे हर रेडियो कार्यक्रम में ग्रामीणों की भागीदारी होती है।

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हरियाणा के नूंह जिले के सामुदायिक रेडियो ‘अल्फाज़ ये मेवात’ की निदेशक पूजा मुरादा ग्रामीणों की रिकॉर्डिंग करते हुए।

सामुदायिक रेडियो लोगों के लिए, लोगों का, लोगों के द्वारा बना एक सशक्त माध्यम है, जो देश के हर ग्रामीण को अपनी बात कहने की पूरी आजादी देता है। सामुदायिक रेडियो सरकारी विभाग के अधिकारियों से ग्रामीणों की सीधे बात कराता है, इसलिए ग्रामीण इसे अपना बाजा मानते हैं। सबसे ज्यादा सामुदायिक रेडियो स्टेशन तमिलनाडु, उत्तर-प्रदेश और महाराष्ट्र में है। कहीं ये सामुदायिक रेडियो आदिवासियों की आवाज़ बना है तो कहीं पहाड़ी समुदाय की आवाज़ बना है। आपदा के समय भी सामुदायिक रेडियो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विश्व की 95 फीसदी जनसंख्या तक रेडियो की पहुंच है, जिसमें सामुदायिक रेडियो दूर-दराज के समुदायों और छोटे समूहों तक कम लागत में पहुंचने वाला संचार का सबसे आसान साधन है।

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हरियाणा के नूंह जिले का ये किसान रेडियो पर प्रसारण के दौरान कृषि अधिकारी से सीधे बात करते हुए।

अल्फाज़ ए मेवात रेडियो स्टेशन की निदेशक पूजा मुरादा ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया, “आज से 11 साल पहले आंकड़ों के आधार पर इस क्षेत्र की साक्षरता दर 30 से 32 प्रतिशत थी जिसमें से गाँव में महिलाओं की साक्षरता दर 2 प्रतिशत थी। उस समय मीडिया के नाम पर यहाँ आल इंडिया रेडियो और गिने-चुने दो तीन अखबार थे। साक्षरता दर कम होने की वजह से अखबार का भी इनके लिए कोई मतलब नहीं था, तब इनके साथ काम करते हुए सामुदायिक रेडियो के बारे में विचार बना।” वो आगे बताती हैं, “एक समय था जब यहाँ की महिलाएं हमें देखकर ही दरवाजा बंद कर लेती थी जिससे इन्हें बात न करना पड़ा। पर आज हमारे रेडियो स्टेशन में ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं है जिसमें इन ग्रामीणों की आवाज़ न हो। आज इन्हें सरकारी योजनाओं से लेकर सामुदायिक स्तर के मुद्दों की समझ है। हम ये तो नहीं कहते कि ये पूरी जागरूकता रेडियो की वजह से हुई है पर अब ये जागरूक होकर सवाल करने लगी हैं।”

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अपनी बात को कहतीं नूंह जिले की ये महिलाएं।

भारत सरकार ने वर्ष 2006 में सामुदायिक रेडियो दिशा-निर्देश की अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना में ये कहा गया कि गैर सरकारी संगठन, नागरिक सामाजिक संगठन, शिक्षा संस्थान को सामुदायिक रेडियो स्टेशन संचालित करने की अनुमति देता है। एक गैर सरकारी संस्था सहगल फाउंडेशन जो हरियाणा के मेवात जिले में 17 साल से विभिन्न मुद्दों पर काम कर रही है। इस संस्था के प्रयास से आज से छह साल पहले ‘अल्फाज़ ए मेवात’ सामुदायिक रेडियो की शुरुआत हुई थी। आज इस रेडियों में कृषि विभाग, मेवाती संस्कृति, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस, कानून जैसे तमाम विषयों के विषय विशेषज्ञ से ग्रामीणों की सीधी बात कराई जाती है। इसमें एक किसान से लेकर घर में काम करने वाली गृहणी तक सरकारी योजनाओं की जानकारी कैसे पहुंचे इसके लिए सामुदायिक रेडियो एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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अपनी लोक संस्कृति को प्रस्तुत करते ग्रामीण।

अल्फाज़ ये मेवात रेडियो स्टेशन में कार्यक्रम ‘तेरे मेरे मन की बात, किस्से कहानी, गली-गली सिम-सिम, हमसे है शासन, तौफ़ा ए कुदरत, जल-जंगल-जमीन, नात शरीफ, लोकगीत जैसे कई प्रोग्राम यहाँ के श्रोताओं की पहली पसंद हैं। स्टेशन इंचार्ज सोहराब खान अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं, “स्थानीय स्तर पर छह लोगों की ये टीम है, जो वालेंटियर की मदद से 13 घंटे का प्रसारण प्रतिदिन करती है। अब 20 से 30 महिलाएं और किशोरियां रेडियो स्टेशन पर अपनी आवाज़ रिकॉर्ड कराने के लिए आने लगी हैं, ये हमारे लिए सबसे बड़ी उप्लाभ्धि है।” ये आगे बताते हैं, “गाँव के चार साल के बच्चे से लेकर एक उम्रदराज व्यक्ति तक हर कोई हमारे कार्यक्रम को सुनते हैं। सामुदायिक रेडियो में हर उम्र को ध्यान में रखकर रेडियो कार्यक्रम बनते हैं और उन्हीं की आवाज़ होती है जिससे लोग इसे अपना रेडियो मानते हैं।”

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बच्चों का श्रोता समूह।

ये हैं सामुदायिक रेडियो की खासियत

सामुदायिक रेडियो के लिए कोई भी गैर सरकारी संगठन और शिक्षण संस्थान लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है। ये संगठन कम से कम तीन साल से पंजीकृत हो ये अनिवार्य है।

सामुदायिक रेडियो के लिए केन्द्रीय वित्त सहायता उपलब्ध नहीं है, सामुदायिक रेडियो लाइसेंस के हकदार वो होते हैं जो 100 वाट रेडियो स्टेशन चलाते हो, इसका कार्यक्षेत्र कम से कम 12 किलोमीटर की त्रिज्या में होता है। इसके तहत संचालक अधिकतम 30 मीटर ऊँचा एंटीना लगा सकता हैं।

सामुदायिक रेडियो स्टेशनों से कम से कम 50 प्रतिशत प्रोग्राम स्थानीय स्तर पर, स्थानीय भाषा में बनाए जाने की अपेक्षा की जाती है। सामुदायिक रेडियो हर किसी को अपनी बात कहने की पूरी आजादी देता है। समुदाय में जाकर उनसे बात करना, उनके मुद्दों को समझना इसके बाद समुदाय की सहभागिता से कार्यक्रम निर्माण लोकल भाषा में करना इसकी मुख्य विशेषता है।

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