बलात्कार में 376 के अलावा भी होती हैं ये धाराएं, जानें क्या है सजा का प्रावधान

बलात्कार में 376 के अलावा भी होती हैं ये धाराएं, जानें क्या है सजा का प्रावधानमहिला के साथ बलात्कार करने के आरोपी पर धारा 376 के तहत मुकदमा चलाया जाता है।

किसी भी महिला से बलात्कार किया जाना भारतीय कानून के तहत गंभीर श्रेणी में आता है। इस अपराध को अंजाम देने वाले दोषी को कड़ी सजा का प्रावधान है। इस अपराध के लिये भारत दंड संहिता में धारा 376 व 375 के तहत सजा का प्रावधान है। क्या है धारा 376 व 375 और क्या हैं इसके तहत सजा का प्रावधान आइए जानते हैं...

क्या है धारा 376

किसी भी महिला के साथ बलात्कार करने के आरोपी पर धारा 376 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। जिसमें अपराध सिद्ध होने की दशा में दोषी को कम से कम पांच साल व अधिकतम 10 साल तक कड़ी सजा दिए जाने का प्रावधान है।

पत्नी से दुष्कर्म करने पर भी होगी सजा

यदि किसी व्यक्ति ने अपनी ही पत्नी के साथ दुष्कर्म किया है और उसकी आयु 12 वर्ष से कम नहीं है तो अरोपी को दो वर्ष तक की सजा हो सकती है या जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कई मामलों में अदालत पर्याप्त और विशेष कारणों से सजा की अवधि को कम कर सकती है।

आईपीसी धारा 375 परिभाषित करती है दुष्कर्म को

जब कोई पुरुष किसी महिला के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध संभोग करता है तो उसे बलात्कार कहते हैं। किसी भी कारण से संभोग क्रिया पूरी हुई हो अथवा नहीं कानूनन वो बलात्कार ही कहलाएगा। इस अपराध को अलग-अलग हालात और श्रेणी के हिसाब से धारा 375, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ के रूप में विभाजित किया गया है।

ये है धारा 375

यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की इच्छा के विरूद्ध, उसकी सहमति के बिना, उसे डरा धमका कर, दिमागी रूप से कमजोर या पागल महिला को धोखा देकर और उसके शराब या पदार्थ के कारण होश में नहीं होने पर उसके साथ संभोग करता है तो वो बलात्कार की श्रेणी में ही आएगा। यदि महिला की उम्र 16 वर्ष से कम है तो उसकी सहमति या बिना सहमति से होने वाला संभोग भी बलात्कार की श्रेणी में आता है। इस धारा के अंतर्गत यदि कोई पुरुष अपनी 15 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ संभोग करता है तो वो भी बलात्कार की श्रेणी में आता है। इस स्थिति में आरोपी को सजा हो सकती है।

हर स्थिति में लागू होता है ये कानून

उपधारा(2) के अंतर्गत बताया गया है कि कोई पुलिस अधिकारी या लोक सेवक अपने पद और शासकीय शक्ति और स्थिति का फायदा उठाकर उसकी अभिरक्षा या उसकी अधीनस्थ महिला अधिकारी या कर्मचारी के साथ संभोग करेगा तो वो भी बलात्कार की श्रेणी में आएगा। यह कानून जेल, चिकित्सालय, राजकीय कार्यालयों बाल एवं महिला सुधार गृहों पर भी लागू होता है। दोषियों को कठोर कारावास की अधिकतम सजा हो सकती है। इन सभी आरोपों में दोषी पाए जाने वाले आरोपी को दस वर्ष से कम की सजा नहीं हो सकती है।

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आपसी सहमति से बना संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है

बांबे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है अगर कोई शिक्षित और 18 वर्ष की उम्र से बड़ी लड़की रिलेशनशिप में सहमति से संबंध बनाती है तो रिश्ते खराब होने के बाद वो बलात्कार का आरोप नहीं लगा सकती है। न्यायालय के मुताबिक समाज में यौन संबंधों को सही नहीं माना जाता है तब भी यदि कोई महिला यौन संबंधों के लिये 'न' नहीं कहती है तो उसे सहमति से बनाया संबंध माना जाएगा।

376(क)

अलग रहने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग करता है तो वो भी बलात्कार की श्रेणी में आता है। जिसके लिए दो वर्ष तक की सजा और जुर्माना देना पड़ेगा।

376(ख)

लोक सेवा द्वारा अपनी अभिरक्षा में किसी स्त्री के साथ संभोग करने की दशा में ये अपराध की श्रेणी में आएगा। जिसके लिए पांच वर्ष तक की जेल के साथ जुर्माना भी देना पड़ेगा।

376(ग)

जेल में अधिकारी द्वारा किसी महिला बंदी से संभोग करना भी बलात्कार की श्रेणी में आता है। जिसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है।

376(घ)

अस्पताल के प्रबंधक या कर्मचारी आदि से किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग करेगा तो वह तो वो भी बलात्कार की श्रेणी में आएगा। जिसकी सजा अवधि पांच साल तक हो सकती है।

( सीतापुर सिविल कोर्ट अधिवक्ता आशुतोष बाजपेयी से बात-चीत के अनुसार)

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