तीसरी महिला की मौत: तराई में आदमखोर बाघ का आतंक 

तीसरी महिला की मौत: तराई में आदमखोर बाघ का आतंक हाईवे जाम किए ग्रामीणों ने तीन दिन में बाघ को मारने का प्रशासन को दिया अल्टीमेटम।

स्वयं प्रोजेक्ट रिपोर्टर

बस्तिया (उत्तराखंड)। उत्तराखंड में हिमालय की तराई में एक बाघ आदमखोर हो गया है। जंगल से निकल कर शनिवार को उसने अपना तीसरा इंसानी शिकार किया। बाघ ने एक महिला जानकी देवी (29 वर्ष) को अपने जबड़ों में दबोच कर मार दिया। पिछले तीन महीनों में यह बाघ दो और महिलाओं को मार चुका है।

मृत महिला जानकी देवी के गाँव की महिलाओं ने गाँव से लगे राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर बैठ कर जाम कर दिया और बाघ को मारने की मांग की। धरना स्थल के दोनों तरफ़ सैकड़ों वाहन घंटों से रुके थे और हज़ारों नागरिक बेहाल थे। ये घटना भारत में इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ रहे तनावों का एक और उदाहरण है।

हमले के दौरान जानकी देवी के साथ जंगल में गई एक महिला बताती हैं, "जानकी देवी के साथ मैं और तीन महिलाएं सुबह जंगल में घास काटने के लिए गई थीं। सुबह दस बजे के समय जब जानकी को प्यास लगी तो वह पानी पीने के लिए पास के स्रोत में गई। इस दौरान बाघ ने महिला पर हमला कर दिया।"

वो आगे बताती हैं, "हम लोगों ने जानकी को छुड़ाने के लिए पत्थरों से बाघ पर हमला किया, लेकिन उसपर कोई असर नहीं पड़ा। जानकी को बाघ अपने मुंह में दबाकर घसीटते हुए ले गया। हम लोगों ने तुरंत घटना की सूचना जंगल से आकर ग्रामीणों को दी।"

हाइवे जाम के दौरान बस्तिया गाँव की रहने वाली महिला बताती है, "तीन महीने में तीन औरतों को बाघ ने मार डाला है। बाघ को अगर पहले ही मार डाला जाता तो आज ये नौबत न आती। मृतक जानकी देवी के दो बच्चे है, उसकी सास पागल है। कई घंटों से हमने हाईवे जाम कर रखा है लेकिन अभी तक कोई भी बड़ा अधिकारी मिलने नहीं आया है।"

जाम लगाए ग्रामीणों की बस एक ही मांग है कि तीन दिन के भीतर बाघ को मार दें नहीं तो हम लोग डीएफओ कार्यालय और तहसील पर घरना देने को मजबूर हो जाएंगे। ग्राम प्रधान नवीन बोरा ने बताया, "जब तक बाघ को मारने के लिखित आदेश नहीं दिए जाते तब तक महिला के शव को जंगल से नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाघ अब तक तीन महिलाओं को अपना शिकार बना चुका है। गाँव में लोग दहशत में हैं। बच्चे शाम सात बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकलते।" मौके पर मौजूद रेंजर डीएस मेहरा, सीओ अरूण वर्मा, कोतवाल राजेन्द्र सिंह ग्रामीणों को समझाने में लगे हुए हैं।

रोते-बिलखते महिला के परिवारीजन।

मवेशियों को भी नहीं छोड़ रहा बाघ

महिलाएं बताती हैं कि सरकार ने इस गाँव में पानी तक की सुविधा नहीं दी है, अगर सुविधा दी है तो वो बाघ की सुविधा दी है जो ग्रामीणों और हमारे पालतू पशुओं को खा रहा है। जंगल में पानी भरने के लिए जाने वाली महिलाओं को बाघ मार कर खा रहा है। इंसान के साथ-साथ बाघ हमारे जानवरों को भी नहीं छोड़ रहा है। हमारी गाय अगर जंगल की तरफ चली जाती हैं तो वो वापस नहीं आती है। बाघ उनको मारकर खा जाता है।

बाहर से ला कर छोड़े गए हैं बाघ

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यहां बाहर लाकर बाघ छोड़े गए हैं और इसके बाद जानवरों और इंसानों पर आक्रमण की घटनाएं बढ़ी हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले एक वर्ष पहले ऐसी कोई भी समस्या यहां नहीं थी लेकिन अब आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती है।

दुनिया के 70 फीसदी बाघ भारत में

पिछले 12 साल से भारत में बाघ संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। ताजा आधिकारिक संख्या के मुताबिक भारत में करीब 2226 बाघों का वास स्थल है जो विलुप्तप्राय बाघ प्रजाति की 70 फीसदी वैश्विक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। विश्व वन्यजीव कोष (World Wildlife Fund) के मुताबिक वर्ष 2016 में अभी भारत में करीब 3891 बाघ हैं। बाघों की संख्‍या के मामले में उत्‍तराखंड का देश में दूसरा स्‍थान है। यहां कुल 340 बाघ हैं। पहले स्‍थान पर कर्नाटक है।

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