डाक्यूमेंट्री देखकर शावकों को पाल रही है शेरनी

डाक्यूमेंट्री देखकर शावकों को पाल रही है शेरनीजयपुर के जैविक उद्यान में शेरनी के लिए लगा टीवी

लखनऊ। जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान ने वहां पल रहे शावकों की देखभाल करने के लिए एक नया हाईटेक तरीका ईजाद किया है। 29 साल बाद मां बनी शेरनी को अपने नवजात शावकों का पालन-पोषण करने के लिए उसे डाक्यूमेंट्री दिखाई जा रही है।

शेरनी का नाम तेजिका है। तेजिका के तीन नवजात शावक हैं, जिन पर वह अपने बाड़े में ममता न्योछावर करती देखी जा रही है। हालांकि कुछ दिन पहले तक वह अपने शावकों को पालने का तरीके से पूरी तरह से अनजान थी। तेजिका को ममत्व और शावकों की परवरिश का कोई अनुभव नहीं था। तेजिका ने अपनी जिन्दगी का ज्यादातर हिस्सा सर्कस में करतब दिखाते गुजारा है। बचपन में तेजिका शेरों की सल्तनत जंगल और कुदरती माहौल से महरूम रही इसीलिए शेरनी अपने बच्चों को नहीं पाल पा रही थी। तेजिका को गुजरात में एशियाई शेरों की पनाहगाह गिरि से राजस्थान लाया गया था। लेकिन, अब वह डाक्यूमेंट्री देख कर शावकों का लालन-पालन सीख रही है।

वन अधिकारियों ने तेजिका के लिए उसके बाड़े में एलईडी टीवी लगाया है। इसी पर बीबीसी की डाक्यूमेंट्री देखकर तेजिका ममत्व के सबक सीख रही है और अपने तीनो शावकों को पाल रही है।

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि तेजिका ने 20 -21 मई कि मध्य रात्रि में पांच शावकों को जन्म दिया था। इसमें से एक शावक की जन्म के वक्त और दूसरे की शारीरिक तौर पर कमज़ोर होने की वजह से मौत हो गयी। अब तेजिका अपने तीन शावकों की परवरिश कर रही है।

अपने बाड़े में बैठी शेरनी तेजिका

वन विभाग के मुताबिक जब तेजिका के लिए टीवी लगाया गया तो शुरुआत में उसने इसकी अनदेखी की। मगर धीरे-धीरे तेजिका ने टीवी स्क्रीन को निहारना शुरू किया और डाक्यूमेंट्री में चल रहे चित्र देखने लगी। डाक्यूमेंट्री में शेरनी देखती है कि कैसे एक शेरनी माँ बनने के बाद अपने शावकों की देखभाल करती है। डॉक्यूमेंट्री में ऐसे दृश्य कैद है जिसमें एक शेरनी शावकों को जन्म देने के बाद कैसे अपने मुँह में पकड़ कर सार संभाल करती है। तेजिका ने बड़े गौर से इन द्र्श्यो को देखा और ममत्व के गुर सीखे।

इसे लेकर वन अधिकारी काफी उत्साहित हैं।अधिकारी कहते है इस प्रयोग का कितना और कैसा असर होगा, इस पर नजर रखी जा रही है। विभाग के डॉक्टर और विशेषज्ञ तेजिका और उसके शावकों के स्वास्थ्य की पूरी निगरानी रख रहे हैं।

शावकों के साथ बैठी शेरनी

नाहरगढ़ जैविक उद्यान अरावली पर्वतमाला के पहाड़ों की गोद में स्थित है। यहाँ का हर कर्मचारी और अधिकारी खुश है। क्योंकि कोई 29 साल बाद वहां शेरनी के शावकों की किलकारियां सुनाई दी हैं। इसलिए इन शावकों को बहुत नाजों से रखा जा रहा है। तेजिका की एक आवाज़ से कोई भी दहल जाता होगा पर अपने शावकों के लिए तो वो महज़ माँ है। उसके पहलू में नन्हे शावकों के लिए भरपूर लाड है, दुलार है।

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