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अबकी बार सिगरेट पी तो सच मानिए, ‘ऊपरवाले’ की लाठी पड़ना तय

लखनऊ। “अरे भाई मेरे… सिगरेट का दूसरा कश ही लगाया था, पीठ पर भन्न से लाठी पड़ी, पीछे मुड़कर देखा तो लोग कह रहे थे, सिगरेट फेंक दो… सिगरेट फेंक दो… मगर समझ ही नहीं आया मेरे, सामने देखा तो दादी खड़ी थीं, उन्होंने तब तक फिर लाठी उठाई और बोलीं, सिगरेट फेंकों…, मैंने नहीं फेंकी तो मुझे लाठी लेकर दौड़ा लिया, आखिर में मुझे सिगरेट फेंकनी ही पड़ी।” अपने साथ 15 मिनट पहले हुए वाक्ये को अपने दोस्तों को बता रहा था अभिषेक।

हंस रहे थे उसके दोस्त

दादी थोड़ी दूर पर ही खड़ी होकर अभिषेक को देख रही थीं और मैं अभिषेक की आवाज को पास की बेंच पर बैठकर बखूबी सुन रहा था। अभिषेक की बातों को सुनकर उसके तीन दोस्त खूब हंस रहे थे और कह रहे थे, “और पियो सिगरेट… और पियो।” और आस-पास खड़े दूसरे लोग और कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के और लड़कियां अभिषेक पर हंस रहे थे। असल में, यह नजारा था उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लालबाग के नॉवेल्टी चौराहा के पास मशहूर शर्मा टी स्टॉल का, जहां खाली पड़ी बड़ी सी जगह में अक्सर युवाओं की चौखट सजती है और लड़के-लड़कियां बेंच पर या फिर पेड़ के नीचे बैठकर शर्मा की दुकान की चाय और समोसे का लुत्फ उठाते हैं।

पास में खड़ी दादी की लाठी के डर से देखते युवा।

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‘कोई नहीं बच पाता, सब लाठी खाते हैं’

एक तरफ जहां दादी अपना दूसरा शिकार ढूंढ चुकी थीं, दूसरी ओर शर्मा टी स्टॉल के मालिक गोपाल शर्मा (50) बातचीत में बताते हैं, “कोई नहीं बच पाता, यहां जो सिगरेट पीता हुआ दिखा, समझ लो, लाठी खाना तय है।“ गोपाल आगे बताते हैं, “लगभग छह सालों से दादी यहां रोज आती हैं और हर सिगरेट पीने वालों पर लाठी चलाती हैं। कुछ लोग बुरा मानते हैं तो दादी को भला बुरा कहते हैं, तो कुछ लोग हंसते हैं।“

कोई नहीं बच पाता, यहां जो सिगरेट पीता हुआ दिखा, समझ लो, लाठी खाना तय है।
गोपाल शर्मा, दुकान मालिक

‘लड़की पी रही थी सिगरेट, वो भी लाठी खा गई’

कल्याणपुर के रहने वाले विनीत श्रीवास्तव (30 वर्ष) एक प्लाइवुड कंपनी में काम करते हैं, और काम के दौरान अक्सर यहां चाय पीने आते हैं। विनीत बताते हैं, “अभी परसो की बात है, यहीं पेड़ के नीचे एक लड़की सिगरेट पी रही थी, दादी ने देख लिया तो उसे लाठी दिखाते हुए तेज आवाज में बोलीं, “लड़की होकर सिगरेट पीती हो।” विनीत ने आगे कहा, “मगर लड़की ने बड़ी अभद्रता से कहा, आपके पैसे की पी रही हूं क्या? दादी ने आव देखा न ताव और लड़की के एक लाठी खींच कर रख दी। इसके बाद तो काफी बहस हुई मगर अंत में लड़की ने अपनी गलती मानी।“

एक सिगरेट पीने वाले युवक को लाठी दिखातीं दादी।
मगर लड़की ने बड़ी अभद्रता से कहा, आपके पैसे की पी रही हूं क्या? दादी ने आव देखा न ताव और लड़की के एक लाठी खींच कर रख दी। इसके बाद तो काफी बहस हुई मगर अंत में लड़की ने अपनी गलती मानी।
विनीत श्रीवास्तव, प्रत्यक्षदर्शी

स्थिति अच्छी नहीं है

स्थिति अच्छी नहीं है, चिकित्सकीय पत्रिका ‘द लैंसेट’ हालिया सर्वेक्षण में सामने आया है कि पूरी दुनिया में 10 लोगों में से 1 व्यक्ति की मौत धूम्रपान पीने की वजह से हो रही है। खतरे वाली बात यह है कि इन मौतों में 50 फीसदी से अधिक मौतें जिन चार देशों में हुई है, उनमें भारत शामिल है। सिर्फ भारत की ही बात करें तो हालिया एक रिपोर्ट में सामने आया है कि अपने देश में 52 अधिक युवा लड़के-लड़कियां धूम्रपान का सेवन करते हैं। लैंसेट की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि धूम्रपान की वजह से होने वाली 90 फीसदी मौतों का कारण फेफड़े का कैंसर होना है।

इस नये साल में मैंने प्रण कर लिया था कि अब सिगरेट नहीं पीयूंगा, और एक हफ्ते सिगरेट नहीं पी, लेकिन अपने आप को रोक नहीं सका और एक सिगरेट पी ली।
आशीष वर्मा

‘इस साल सोचा था, छोड़ दूंगा, लेकिन नहीं छोड़ पाया’

बाराबंकी जिले के मूल निवासी और लखनऊ में रहकर पेंट की एक प्राइवेट कंपनी में उच्च पद काम कर रहे आशीष वर्मा (32) बताते हैं, “मैं करीब छह-सात सालों से सिगरेट पी रहा हूं, इस बार नये साल में मैंने प्रण कर लिया था कि अब सिगरेट नहीं पीयूंगा, और एक हफ्ते सिगरेट नहीं पी, मगर काम के दौरान ऐसे-ऐसे तनाव सामने आते हैं कि अपने आप को रोक नहीं सका और एक सिगरेट पी ली।“ आशीष ने आगे कहा, “सोचा, कि एक सिगरेट पीयूंगा बस, मगर ऐसा हो नहीं सका, और मैं फिर से सिगरेट पीने लगा।“

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लोगों को सिगरेट से दूर रहने की नसीहत देती हैं दादी।

तरह-तरह के बहाने

करीब दस सालों से सिगरेट पी कर छोड़ चुके लखनऊ के एक और युवा और अस्थमा के रोगी अनिरुद्ध बाजपेई (32) बताते हैं, “मैं भी सिगरेट पीता था, और हर दिन 10-12 सिगरेट से ज्यादा होती थीं। मगर इस नये साल से मैंने सिगरेट छोड़ दी और 10-11 दिन हो गए हैं, और मुझे पूरा यकीन है कि अब मैं सिगरेट को हाथ नहीं लगाऊंगा।“ अनिरुद्ध आगे बताते हैं, “हमारे साथ रहने वाले दोस्त भी सिगरेट पीते हैं, सिगरेट पीने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते हैं, रोड पर खाली खड़े हैं तो सिगरेट चाहिए, बस एक पी लें, फिर नहीं पीएंगे, सर्दी में थोड़ा आराम मिलेगा, तरह-तरह के बहाने हैं, मगर छोड़ नहीं पाते।“

लोग निकोटीन को पहले तो एक सुखद अनुभव के रूप में लेते हैं और बाद में सिगरेट के बिना वह काम तक नहीं कर पाते। इसका कारण यह है कि निकोटीन सीधे आपके मस्तिष्क पर असर करती है और बाद में बिना निकोटीन रह नहीं पाते।
डॉ. अजय कुमार वर्मा, प्रोफेसर, श्वसन विभाग, केजीएमयू

सीधे मस्तिष्क पर असर करता है निकोटीन

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के श्वसन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार वर्मा बताते हैं, “सिगरेट के नशे से बीमार होकर सबसे ज्यादा मरीज सामने आने की संख्या है। लोग निकोटीन को पहले तो एक सुखद अनुभव के रूप में लेते हैं और बाद में सिगरेट के बिना वह काम तक नहीं कर पाते। इसका कारण यह है कि निकोटीन सीधे आपके मस्तिष्क पर असर करती है और बाद में बिना निकोटीन रह नहीं पाते।“

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कैसी-कैसी स्टेज

डॉ. अजय आगे बताते हैं, “सिगरेट पीने से सबसे पहले खांसी के मरीज सामने आते हैं। ज्यादा खांसी बढ़ने पर कफ (बलगम) बनने के मरीज और सांस लेने में दिक्कत होने के मरीजों की संख्या भी काफी है। कई मरीज तो अंतिम स्टेज में आते हैं, जब उनके बलगम से खून निकलना शुरू हो जाता है और अक्सर वे फेफड़े के कैंसर का शिकार होते हैं।“

ऐसे लोग मन पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं और फिर से तंबाकू की लत को अपना लेते हैं। ऐसे परेशान हो चुके लोग भी हमारे पास आते हैं और सिगरेट और तंबाकू से छुटकारा पाना चाहते है।
डॉ. राकेश त्रिपाठी, योग शिक्षक, सिद्धार्थनगर जिला, उत्तर प्रदेश
सबको सिगरेट से दूर रहने की देती हैं हिदायत।

‘लोग अपने मन पर नियंत्रण नहीं कर पाते’

सिद्धार्थनगर जिले के योग शिक्षक डॉ. राकेश त्रिपाठी बताते हैं, “चाहे सिगरेट हो, या पान मसाला, तंबाकू खाने वाले हर एक व्यक्ति का आत्मबल बहुत कमजोर हो जाता है। वह मन पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं और फिर से तंबाकू की लत को अपना लेते हैं। ऐसे नशे से परेशान हो चुके लोग भी हमारे पास आते हैं और सिगरेट और तंबाकू से छुटकारा पाना चाहते है।“ डॉ. राकेश ने आगे बताया, “ऐसे लोगों ने योग का सहारा लिया और उनको काफी लाभ भी मिला। योग आपके मन-मस्तिष्क को एकाग्र करता है और आत्मबल को मजबूत करता है। बड़ी संख्या में लोगों ने सिगरेट और तंबाकू से छुटकारा पाया है। ऐसे लोगों की लगातार काउंसिलिंग भी की जाती है।“

अलग-अलग शरीर पर असर अलग-अलग

केजीएमयू के प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार वर्मा बताते हैं, “अक्सर यह देखने में आता है कि लोग कहते हैं कि वो तो इतने सालों से सिगरेट पी रहा है और उसे तो कुछ नहीं हुआ।“ डॉ. अजय आगे बताते हैं, “हर व्यक्ति के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अलग-अलग होती है और तंबाकू पर उसका असर भी अलग-अलग होता है। कोई शुरू के सालों में ही सिगरेट पीने से बीमारी का शिकार हो जाता है, तो कुछ लंबे समय तक सिगरेट पीते हैं, मगर अंत में बीमारी का शिकार होते हैं। ऐसे में तंबाकू का सेवन किसी भी स्थिति में अच्छा नहीं है।“

आखिर, दादी लाठी क्यों चलाती हैं?

लखनऊ के नॉवेल्टी चौराहे पर सिगरेट पीने वालों को लाठी मारने वाली दादी के बारे में शर्मा टी स्टॉल के गोपाल शर्मा ने बताया, “दादी, हमारे यहां लगभग रोज ही आती हैं, चाय-समौसा भी खाती हैं।“ आगे कहते हैं, “लोग कहते हैं कि दादी को कोई मानसिक बीमारी है, मगर ऐसा नहीं है, दादी बीमार नहीं है, वह अच्छे से बात करती हैं।“ वह आगे बताते हैं, “एक बार मैंने दादी से पूछा था कि दादी आप क्यों ऐसे लोगों पर लाठी चलाती हैं, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए, तब मैंने बात आगे नहीं बढ़ाई, शायद उन्होंने सिगरेट के नशे के कारण किसी अपने को खो दिया।“

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अगर आप छोड़ना चाहते हैं

केजीएमयू के डॉ. अजय कुमार वर्मा आगे बताते हैं, “अगर आप सिगरेट से बिल्कुल परेशान हो चुके हैं और छोड़ नहीं पा रहे हैं तो हर बड़े सरकारी चिकित्सा अस्पतालों में नशा उन्मूलन कार्यक्रम हर हफ्ते होते हैं, यहां तंबाकू के लती लोगों की काउंसिलिंग की जाती है और अनुभवी डॉक्टर उनके नशा छोड़ने पर पूरी तरह से ध्यान देते हैं।“ वहीं, योग शिक्षक डॉ. राकेश त्रिपाठी बताते हैं, “नशे में लिप्त लोगों के लिए योग एक लाभकारी माध्यम बन सकता है। योग केंद्र में ऐसे कई लोग आते हैं और उनकी पूरी काउंसिलिंग की जाती है और योग और आयुर्वेद की मदद से नशे को छुड़ाने की मदद करते हैं।“

हमारा भी आपसे निवेदन है

सिगरेट के नशे में लिप्त हो रहे युवा और इनकी बढ़ती तादाद के बीच हमारा भी आपसे निवेदन है कि अगर आप नए साल में सिगरेट छोड़ने में नाकाम हो गए हैं तो फिर से सिगरेट की लत के शिकार हो गए हैं तो आप अपने आत्मबल को मजबूत करें और सिगरेट के नशे को छोड़ें, वरना अबकी बार आपने सिगरेट पी, तो सच मानिए, ‘ऊपरवाले’ की लाठी पड़ना तय है।

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