करीब पौने दो महीने बाद पंजाब में ट्रेन सेवाएं होंगी बहाल, खाद की किल्लत से परेशान हुए किसानों को मिलेगी राहत

पंजाब के लिए यूरिया बाहर से आती है लेकिन ट्रेन न आने के कारण किसानों को परेशानी भी उठानी पड़ी, रेल सेवा बहाल होने किसानों को राहत मिलेगी।

Sandeep SinghSandeep Singh   23 Nov 2020 11:41 AM GMT

करीब पौने दो महीने बाद पंजाब में ट्रेन सेवाएं होंगी बहाल, खाद की किल्लत से परेशान हुए किसानों को मिलेगी राहत

संदीप सिंह

चंड़ीगढ़। एक अक्टूबर से बंद रेल सेवा पंजाब में बहाल हो रही है। कृषि कानूनों के विरोध में प्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन के चलते रेलवे ने पंजाब से गुजरने वाले यात्री और मालगाड़ियों को स्थगित कर दिया था। जिसके चलते पंजाब में खाद की भारी किल्लत हो गई और गेहूं की बुवाई का पिछड़ गई।

अनाज का कटोरा कहे जाने वाले पंजाब में डीएपी (डाई आमोनियम फास्फेट) और यूरिया कि किल्लत के चलते किसानों को गेहूं सरसों समेत रबी की फसलों की बुवाई में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। जिन किसानों की अगैती फसल तैयार थी उन्हें पहले पानी के साथ छिड़काव के लिए यूरिया महंगी खरीदनी पड़ी तो उर्वरकों के अभाव में कई किसानों की बुवाई भी पिछड़ गई।

पंजाब के लुधियाना जिले के बैरसाल खुर्द गांव में रहने वाले ईशर सिंह 70 एकड़ में खेती करते हैं। ईश्वर गांव कनेक्शन को बताते हैं, "खाद की समस्या न होती तो अब तक मेरी पूरी बुवाई हो जाती। लेकिन अभी तक सिर्फ सिर्फ 40-42 एकड़ में हुई है। थोड़ी डीएपी मिल गई थी बुवाई शुरु कर दी। लेकिन भी मेरा 15-20 एकड़ खेत बोने को पड़ा है। उसके लिए खाद का इंतजार है।"

पंजाब के लुधियाना जिले के बैरसाल खुर्द गांव में रहने वाले ईशर सिंह 70 एकड़ में खेती करते हैं। फोटो: संदीप सिंह

ईशर सिंह के मुताबिक उन्हें इस बार ज्यादातर खाद सहकारी समिति की बजाए दुकानों से लेनी पड़ी है जो न सिर्फ महंगी बड़ी है बल्कि अच्छी गुणवत्ता की भी नहीं है। ईशर ने जो गेहूं पहले बोया था उसमें पानी लगने का समय आ गया है लेकिन यूरिया नहीं है। वो कहते हैं, "हमारे पास यूरिया का एक भी थैला (45 किलो) नहीं है। अगर पहले पानी के साथ यूरिया नीहं दी तो फसल का विकास प्रभावित होगा, उत्पादन कम होगा।" पंजाब में यूरिया की कमी के चलते कई किसान हरियाणा से खरीदकर ला रहे थे, जिनमें से कई कुछ किसान हरियाणा से यूरिया खरीदते हुए गिरफ्तार कर लिये गये थे। कुछ जगहोँ पर खाद की कमी के चलते कालाबाजारी भी शुरू हुई थी। 23 नवंबर को ट्रेन सेवा बहाल किए जाने की घोषणा पर किसानों ने राहत की सांस ली।

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीटर पर लिखा कि, "पंजाब में 23 नवंबर से रेलवे ट्रैक व स्टेशनों पर किये जा रहे किसान आंदोलन के स्थगित होने पर भारतीय रेल पंजाब, तथा पंजाब से होकर जाने वाली रेल सेवाओं को शुरु करने जा रही है। पिछले कई दिनों से ट्रेन संचालन में बना हुआ गतिरोध दूर होने से यात्रियों, किसानों, व उद्योगों को लाभ होगा।" रेलवे ने पिछले दिनों कहा था पंजाब में रेलवे की संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी पंजाब सरकार लेती है तो मालवाहक और यात्री ट्रेने एक साथ शुरु की जाएंगी। लंबी जद्दोजहद के बाद शनिवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और किसानों के बीच बैठक में रेलवे ट्रैक और स्टेशन आदि से हटने को यात्रा में व्यवधान नहीं डाले जाने पर सहमति बन गई थी। हालांकि किसान संगठनों ने ये छूट सिर्फ 15 दिनों के लिए दी है। इसी बीच 26-27 नवंबर को किसान दिल्ली आ रहे हैं।

पंजाब कृषि विभाग के मुताबिक प्रदेश में रबी के सीजन का रकबा करीब 100 लाख एकड़ का है, जिसमें 85 लाख एकड़ में गेहूं की बुवाई होती है। विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा- पंजाब को रबी के सीजन में करीब 5 लाख टन डीएपी और 12.5 लाख टन यूरिया की जरुरत होती है। हमारे पास डीएपी का लगभग पिछला स्टॉक था लेकिन यूरिया के लिए थोड़ी दिक्कत हुई।"

गांव कनेक्शन ने इस संबंध में कृषि कमिश्नर बीएस सिंधु से बात की। उन्होंने कहा, "यूरिया की मांग बनी हुई है। काफी कुछ पंजाब ने मैनेज किया है। आज रेलवे सेवा शुरु होने के बाद हम उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर सबसे पहले वहां यूरिया पहुंचाएंगे जहां तुरंत जरुरत है।'

लुधियाना जिले में माछिया कलाँ गाँव के किसान चमन सिंह 30-35 एकड़ में खेती करते है। वे "अब किसान खेत में काम करे या फिर यूरिया ढूंढे। बाकी राज्यों में सब कुछ जा रहा है, लेकिन पंजाब के साथ भेदभाव हो रहा है।"

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लुधियाना जिले में माछिया कलाँ गाँव के किसान चमन सिंह। फोटो: संदीप सिंह

यूरिया गेहूं के विकास के लिये बहुत जरूरी है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में संयुक्त खाद निदेशक के पद पर कार्यरत बलदेव सिंह के मुताबिक, अगर यूरिया के पहले छिड़काव में 10-15 दिन देरी हो जाये, तो गेहूं के उत्पादन में 10-15 फीसद गिरावट आ जायेगी. अगर अगर यूरिया उपलब्ध ना हो तो उत्पादन में 35 से 40 फीसद तक गिरावट आ सकती है।

पंजाब में यूरिया के दो प्लांट भठिंडा और नंगल में है लेकिन वो दोनों इतना उत्पादन नहीं कर सकते जिससे राज्य की जरुरत पूरी हो सके। पंजाब के लिए जरुरी ज्यादातर यूरिया बाहर से आती है लेकिन यूरिया रैक (यूरिया भरी ट्रेन) न लग पाने किसानों को दिक्कत हुई।

रेलवे की दिक्कत थी तो ट्रक से यूरिया क्यों नहीं मंगवाई गई? इस सवाल के जवाब में कृषि विभाग के एक अधिकारी उदाहरण देकर बताया, "अगर हम गुजरात के कांडला से यूरिया लाते हैं तो हमें 3 हज़ार रूपये प्रति टन खर्चा करना पड़ेगा, जबकि केँद्र सरकार से केवल 147 रूपये प्रति टन ही किराया मिलता है। ऐसे में 2853 रुपए प्रति टन की पूर्ति कौन करेगा?"

कृषि कानूनों का विरोध कर रही प्रदेश की किसान यूनियन ने ट्रेन सेवा बंद होने को आर्थिक नाकेबंदी बताया था। भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के प्रेस सचिव गुरविंदर सिंह ने कहा, ट्रेन सेवाएं बंद होने से पंजाब में खाद की कमी और बिजली संकट पैदा हुआ है।"

रेलवे की घोषणा से उद्योग संगठन ने भी ली राहत की सांस

मालगाड़ियां बंद होने से राज्य में कच्चा माल ना दूसरे राज्यों से आ पा रहा था न ही तैयार माल बाहर जा पा रहा था, जिसके चलते घरेलू मांग के साथ की एक्सपोर्ट के ऑर्डर तक रद हुए। फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एवं कामर्शियल आर्गनाइजेशन लुधियाना के अध्यक्ष कारोबारी गुरमीत सिंह कुलार कहते हैं, "लुधियाना में कच्चे माल की बहुत हुई है। हमारी लुधियाना साइकल इंडस्ट्री को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा। सभी उद्योगपत्तियों का त्यौहार सीज़न खराब रहा है। इंडस्ट्री केवल 25 फीसद क्षमता पर चल रही है। कुछ फैक्ट्रियों के मालिक कच्चा माल सड़क के जरिये माल मंगवा रहे है, जिससे उनको किराये में दोगुने पैसे का भुगतान करना पड़ा रहा है।"

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