झारखंड की 12 हजार गायों को मिला आधार कार्ड, अब तस्करी से बचे रहेंगे जानवर 

झारखंड की 12 हजार गायों को मिला आधार  कार्ड,  अब तस्करी से बचे रहेंगे जानवर झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल हैं जहां ‘प्रिवेंशन आफ काऊ स्लाटर एक्ट-2015’ लागू है।

लखनऊ। झारखंड की राजधानी रांची से सटे कूटे और लाल खटंगा गाँव में गायों को 12 डिजिट का नंबर जारी किया गया है, जो आधार कार्ड की तरह है। इसमें पशु की उम्र, सेक्स, लोकेशन, हाइट, शरीर का रंग, सींग और पूंछ की पूरी जानकारी है।

ऐसे में इन गाय और भैंसों को लोग दूर-दूर से देखने आ रहे हैं। इस बारे में यहां के पशुपालक रामकिशुन महतो कहते हैं, ‘पशुपालन विभाग के लोगों ने यह नंबर दिया है। अब गाय और भैंस के चोरी होने की घटनाएं रुक गई हैं। गाय अगर नहीं मिल रही है तो इस नंबर के जरिए पशुपालन विभाग से संपर्क करके खोजा भी जा सकता है।’

भारत सरकार की तरफ डेढ़ साल पहले गायों और भैसों को बचाने के लिए एक योजना की शुरुआत की गई थी। भारत सरकार के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में झारखंड के आठ जिलों में गायों और भैसों को यूआईडी नंबर जारी करने काम शुरू किया हुआ था जिसमें झारखंड के रांची, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, देवघर, गिरीडीह और लोहरदगा जिले शामिल हैं।
के.के. तिवारी, नोडल अधिकारी, स्टेट इंप्लीमेंट एजेंसी फार कैटल एंड बफैलो

भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर गायों की तस्करी रोकने के लिए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को भारत सरकार की एक समिति ने रिपोर्ट सौंपी है जिसमें गायों को लिए आधार कार्ड की तरह ही यूआईडी कार्ड जारी करने की सिफारिश की है लेकिन इससे पहले झारखंड में गाय और भैंस की तस्करी रोकने के लिए 12 हजार गायों को यूआईडी नंबर जारी किया जा चुका है। इस बारे में जानकारी देते हुए झारखंड स्टेट इंप्लीमेंट एजेंसी फार कैटल एंड बफैलो के नोडल अधिकारी के.के. तिवारी ने बताया कि भारत सरकार की तरफ डेढ़ साल पहले गायों और भैसों को बचाने के लिए एक योजना की शुरुआत की गई थी। भारत सरकार के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में झारखंड के आठ जिलों में गायों और भैसों को यूआईडी नंबर जारी करने काम शुरू किया हुआ था जिसमें झारखंड के रांची, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, देवघर, गिरीडीह और लोहरदगा जिले शामिल हैं।

झारखंड स्टेट इंप्लीमेंट एजेंसी फार कैटल एंड बुफैलो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. गोविंद प्रसाद ने बताया, ‘गाय और भैंस के यूनीक नंबर देने जैसे कार्यक्रम का मकसद इन जानवरों का संरक्षण करना है। यूनीक नंबर मिलने से इन पशुओं की तस्करी और अवैध व्यापार के मॉनीटरिंग करने में मदद मिली है।’ झारखंड में इस कार्यक्रम से मिली सफलता के बाद झारखंड सरकार इसे अपने सभी 24 जिलों में लागू करने जा रही है। झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल हैं जहां ‘प्रिवेंशन आफ काऊ स्लाटर एक्ट-2015’ लागू है। गाय की हत्या पर पांच हजार का जुर्माना और पांच साल की सजा है।

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