WHO ने की उज्जवला योजना की तारीफ, माना- प्रदूषण घटाने में मददगार 

WHO ने की उज्जवला योजना की तारीफ, माना- प्रदूषण घटाने में मददगार झारखंड के पाखुड़ जिले के लकड़ापहाड़ी गाँव की राजकुमारी को आज चूल्हे में नहीं बनाना पड़ता खाना।

लखनऊ। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में चलाई जा रही उज्जवला योजना की प्रशंसा करते हुए अपनी रिपोर्ट में यह माना है कि घरेलू प्रदूषण घटाने में उज्जवला योजना काफी मददगार साबित हो सकती है।

डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को जारी की अपनी रिपोर्ट में दक्षिण पूर्वी एशिया में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई। इससे इतर रिपोर्ट में भारत की उज्जवला योजना के बारे में प्रशंसा की। केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 से शुरू हुई उज्जवला योजना के तहत गरीब महिलाओं को नि:शुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उज्जवला योजना से देश भर में अब तक 3 करोड़ 70 लाख गरीब महिलाओं को नि:शुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन मिल सके हैं, जो पहले चूल्हे और अन्य ईंधन के जरिए प्रदूषण फैलाने वाले विकल्पों से खाना बनाती थीं।

डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि विश्व में वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख मौतें होती हैं, इनमें से 24 लाख मौतें घरेलू वायु प्रदूषण के कारण होती हैं। सरकार की योजना है कि अगले तीन वर्षों में 5 करोड़ गरीब महिलाओं व परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। मुफ्त में गैस कनेक्शन मिलने से महिलाओं की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव भी सामने आ रहे हैं।

कभी तो भूखे पेट चली जाती थीं काम पर

उड़ीसा में बालेश्वर जिले के मिर्ज़ापुर गाँव में रहने वाली तब्बसुन के बच्चों को पसंद है मैग्गी।

उड़ीसा में बालेश्वर जिले के मिर्ज़ापुर गाँव में रहने वाली तब्बसुन के पति अक्सर मछलियां पकड़ने के लिए बाहर रहते हैं और तबस्सुन खुद भी एक गोदाम में काम करती हैं। तबस्सुन के तीन बेटियां हैं, जो पढ़ने के लिए स्कूल जाती हैं।

‘गाँव कनेक्शन’ से बातचीत में तबस्सुन बताती हैं, “मैं पिछले कई सालों से चूल्हे पर काम करती आई हूं, मुझे खाना बनाने में बहुत दिक्कत होती थी। बच्चों के लिए स्कूल के लिए समय पर टिफिन नहीं दे पाती थी, जो चीजें बच्चों को पसंद हैं, वह उन्हें नहीं खिला पाती थी। कई बार तो मुझे भी काम पर भूखे ही जाना पड़ता था।“

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आगे कहती हैं, “मेरे बच्चों को मैगी बहुत पसंद है, जोकि हम कभी चूल्हे पर अपने बच्चों को नहीं बनाकर खिला पाते थे, लेकिन जबसे उज्ज्वला योजना का लाभ मिला है, हम बच्चों को समय पर टिफिन भी देते हैं और उनके लिए मैगी भी बनाते हैं।“

उज्जवला योजना से गैस कनेक्शन मिलने के बाद बच्चों के लिए आराम से बनाती है उनकी मनपसंद चीज।

सांस की बीमारी का पांच साल तक इलाज चला

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब ब्लॉक के पहाड़पुर गाँव में प्रेमा के पास खेत तो नहीं है, मगर प्रेमा और उनके पति गाँव में ही बटाई पर खेती करती हैं।

प्रेमा ने गाँव कनेक्शन को बताया, “मैं लगातार चूल्हे पर काम करती थी, जिसकी वजह से मैं काफी बीमार हो गई, सांस से जुड़ी बीमारी हो गई और सिरदर्द होने लगा। साँस से जुड़ी बीमारी इतना ज्यादा बढ़ गई कि अंत में लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में लगातार पांच साल तक अपने इलाज चला।“

उज्जवला योजना के बारे में प्रेमा ने बताया, “पिछले साल मुझे उज्ज्वला योजना का लाभ मिल गया और मैं गैस पर खाना बनाने लगी। इससे न मुझे बीमारियों से भी छुट्टी मिली, बल्कि समय की बचत भी हुई और खेत भी समय से जाने लगी।“

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प्रेमा को चूल्हे पर काम करने से हो गई थी सांस की बीमारी।

हर घंटे 400 सिगरेट पीने के बराबर

इस बारे में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के श्वसन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत बताते हैं, “अगर कोई महिला एक घंटे चूल्हे पर काम करती है तो उस एक घंटे में 400 सिगरेट पीने के बराबर है। उज्ज्वला योजना के आने से कई महिलाओं को जिंदगी मिली है।“

डॉ. सूर्यकांत ने एक महिला से मिलवाया, जिसके कई सालों से चूल्हे पर काम करने से उसे सांस से जुड़ी कई समस्याएं हुईं और अंत में उसका फेफड़ा फट गया और वह भी अपना इलाज उसी अस्पताल में करवा रही हैं। मगर अब उज्जवला योजना से उनके घर में भी गैस आ गई है, जिसके चलते उनके घर के लोग चूल्हे पर काम नहीं करते हैं, बल्कि गैस पर काम करते हैं।“

पति के देहांत के बाद घर में ही खोली छोटी सी दुकान

झारखंड में आज राजकुमारी को उज्जवला योजना से मिला कमाई का जरिया।

झारखंड के पाखुड़ जिले के प्रखंड पाखड़िया ब्लॉक के राजपोखर ग्राम पंचायत के लकड़ापहाड़ी गाँव में रहने वाली राजकुमारी को एक साल पहले ही उज्जवला योजना का लाभ मिला है। पति के देहांत के बाद राजकुमारी के घर में कोई आय का साधन नहीं था। अपने बच्चों को भी राजकुमारी स्कूल नहीं भेज पाती थीं।

राजकुमारी गाँव कनेक्शन से बातचीत में बताती हैं, “एक साल पहले ही मुझे उज्जवला योजना से मुफ्त गैस कनेक्शन मिला, इसके बाद मैंने घर में ही एक छोटी सी दुकान खोली, जहां मैं चाय और समोसा बनाकर बेचती हूं और हमारी थोड़ी बहुत कमाई भी होती है।” राजकुमारी आज अपनी एक बेटी की शादी भी कर चुकी है और अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में भी पढ़ाती हैं।

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अपने बच्चे के साथ राजकुमारी।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक बयान में कहा था, “उज्जवला योजना का उद्देश्य पूरे भारत में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। इसी मकसद से महिलाओं को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।“

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