महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर कैदियों को विशेष माफी

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर कुछ खास श्रेणी के कैदियों को विशेष माफी दी जाएगी और उन्हें तीन चरणों में रिहा किया जाएगा। पहले चरण में कैदियों को दो अक्टूबर (महात्मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा। दूसरे चरण में कैदियों को 10 अप्रैल, 2019 (चम्पारण सत्याग्रह की वर्षगांठ) को रिहा किया जाएगा।

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर कैदियों को विशेष माफी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर कारागारों से कैदियों को विशेष माफी देने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर कुछ खास श्रेणी के कैदियों को विशेष माफी दी जाएगी और उन्हें तीन चरणों में रिहा किया जाएगा। पहले चरण में कैदियों को दो अक्टूबर (महात्मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा। दूसरे चरण में कैदियों को 10 अप्रैल, 2019 (चम्पारण सत्याग्रह की वर्षगांठ) को रिहा किया जाएगा। तीसरे चरण में कैदियों को दो अक्टूबर, 2019 (महात्मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा।"

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रविशंकर ने कहा, "जिन कैदियों को रिहा किया जाएगा, उनमें महिला कैदी जिसकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिसने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे किन्नर कैदी, जिनकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे पुरुष कैदी, जिनकी आयु 60 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दिव्यांग/शारीरिक रूप से 70 प्रतिशत या इससे अधिक अक्षमता वाले कैदी, जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दोष सिद्ध कैदी जिनने अपनी दो-तिहाई (66 फीसदी) वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो शामिल हैं।"


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प्रसाद ने कहा, "ऐसे कैदियों को विशेष माफी नहीं दी जाएगी, जो मृत्युदंड की सजा का सामना कर रहे हैं, अथवा जिनकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। इसके अलावा दहेज मृत्यु, दुष्कर्म, मानव तस्करी और पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पोस्को एक्ट, धन शोधन, फेमा, एनडीपीएस, भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम आदि के दोषियों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।"

उन्होंने कहा, "गृह मंत्रालय सभी पात्र कैदियों के मामलों की पहचान के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी करेगा। राज्य सरकार और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को इन मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने की सलाह दी जाएगी। राज्य सरकार इस समिति की सिफारिशों को राज्यपाल के पास विचार और संविधान की धारा 161 के तहत मंजूरी के लिए भेजेगी। मंजूरी मिलने के बाद कैदियों को दो अक्टूबर, 2018, 10 अप्रैल, 2019 और दो अक्टूबर, 2019 को रिहा किया जाएगा।"

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