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उन्नाव गैंगरेप केस : मृतका का भतीजा 2 अक्टूबर से है लापता, पुलिस ने बच्चे का सुराग देने वाले को एक लाख रुपए देने की घोषणा की

उन्नाव गैंगरेप केस : मृतका का भतीजा 2 अक्टूबर से है लापता, पुलिस ने बच्चे का सुराग देने वाले को एक लाख रुपए देने की घोषणा की

सुमित यादव, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। उन्नाव गैंगरेप केस की मृतका का सात वर्षीय भतीजा 2 अक्टूबर की शाम से लापता है। पीड़ित परिवार ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया है। बच्चे की तालाश में 14 पुलिस की टीमें सर्विलांस पर लगी हैं, फिर भी पुलिस अबतक बच्चे को खोज नहीं पाई है, अब पुलिस ने बच्चे का सुराग देने वाले के लिए एक लाख रूपये की ईनाम राशि घोषित की है।

मृतका की बहन ने गाँव कनेक्शन को बताया, "प्रशासन हमें किसी से मिलने नहीं दे रहा है। हम लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर जाना चाहते हैं, मदद मांगना चाहते हैं लेकिन प्रशासन ने कहा है कि वहां जाने का कोई फायदा नहीं, हम छानबीन कर तो रहे हैं, घर से बाहर मत निकलो। इतने दिन हो गये पुलिस अभी तक बच्चे का कोई सुराग नहीं लगा पायी है।"

उन्नाव में पिछले साल आग लगाए जाने के बाद मारी गई दुष्कर्म पीड़िता के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा में तैनात तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। पीड़िता के सात वर्षीय भतीजे के लापता होने के बाद इन्हें निलंबित किया गया। मामले की जांच के लिए उन्नाव गईं इंस्पेक्टर जनरल (लखनऊ रेंज) लक्ष्मी सिंह ने गनर नरेंद्र कुमार यादव, कांस्टेबल राजेश कुमार और महिला कांस्टेबल अनुज को निलंबित करने का आदेश दिया है।

ये हैं उन्नाव गैंगरेप केस में मृतका की भाभी. फोटो क्रेडिट: नीतू सिंह

उन्नाव जिले के बिहार थाना क्षेत्र में पिछले वर्ष 5 दिसंबर 2019 को गैंगरेप पीड़िता को कथित तौर पर जिंदा आग के हवाले कर दिया गया था। आग में गंभीर रूप से जलने के कारण उसे इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया था, जहां उसने एक दिन बाद ही दम तोड़ दिया था। गैंगरेप और हत्या के मामले में नामजद मुख्य आरोपी शिवम त्रिवेदी समेत सभी 5 आरोपी जेल में बंद हैं। लापता भतीजे की खबर पीड़ित परिवार ने थाने में दी थी। मृतका की बहन के अनुसार दो अक्टूबर को हमलोग खेत पर गये थे जब शाम को वापस आये तो बच्चा नहीं मिला। बच्चे की तुरंत तालाश शुरू की, जब नहीं मिला तब पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही एसपी आनंद कुलकर्णी, एडिशनल एसपी विनोद कुमार पांडे सहित कई अफसर गांव पहुंचे थे।

मृतका की बहन कि तहरीर पर गैंगरेप पीड़िता का मुख्य आरोपी शिवम त्रिवेदी की मां सरोज त्रिवेदी, बुआ अनीता त्रिवेदी, रिश्तेदार कैप्टन बाजपेई, हर्षित बाजपेई और एक पड़ोस की महिला सुन्दरा लोध के खिलाफ पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज किया है। घटना के लगभग दो हफ्ते हो गये हैं पर अभी तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला है। बच्चे का पता लगाने के लिए जांच और तलाशी अभियान जारी है।

उन्नाव एसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया, "दो अक्टूबर शाम को थाना बिहार के एक गांव में बच्चे के गायब होने की सूचना मिली थी। परिवार द्वारा पांच लोगों पर आशंका व्यक्त की गई थी, उसी आधार पर थाने में मामला पंजीकृत किया गया है, जिसमें 5 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें से तीन महिला अभियुक्त, दो पुरुष अभियुक्त हैं।"

उन्नाव गैंगरेप मामले का पूरा वीडियो यहाँ देखिए :

आनंद कुलकर्णी ने आगे कहा, "पुलिस की 14 टीमें लगाकर बच्चे की गहन तलाश की जा रही है। जगह-जगह टीमें दबिश दे रही हैं। बच्चे की फ़ोटो जारी कर सूचना के संबंध में पम्पलेट भी वितरित कराए जा रहे हैं। बच्चे की तलाश में एक टीम रायबरेली भी गयी है। जल्द ही बच्चे की बरामदगी सुनिश्चित की जाएगी।"

एसपी आनंद कुलकर्णी ने तीन पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, इसके अलावा बिहार पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 364 के तहत मामला दर्ज किया गया है। लापता बच्चे को बरामद करने के लिए बिहार, बरसागवार, पुरवा, मौरवन और बीघापुर सहित पांच पुलिस स्टेशनों की टीमों को लगाया गया है।

पुलिस ने पांच आरोपियों समेत कई लोगों को हिरासत में लेकर 10 दिनों तक पूछताछ की, आसपास के तालाब और जंगलों में भी सर्च अभियान चलाया, लेकिन बच्चे के बारे में अब तक कोई सुराग नहीं लगा है।

ये है उन्नाव गैंगरेप मृतका का टूटा-फूटा घर. फोटो: नीतू सिंह

क्या है पूरा मामला ?

उन्नाव गैंगरेप केस में पीड़िता ने मार्च 2019 में दो लोगों के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज करवाया था जिसके बाद गिरफ्तार मुख्य आरोपी 30 नवंबर 2019 को ढाई महीने बाद जमानत पर रिहा हुआ था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के दो दिन पहले ये अरोपी घर पर जान से मारने और आग लगाने की धमकी देकर गया था। केस की तारीख के लिए पीड़िता सुबह चार बजे पांच दिसंबर 2019 को सुबह रायबरेली जाने के लिए ट्रेन पकड़ने बैसवारा बिहार रेलवे स्टेशन जा रही थी।

उसी समय कथित तौर पर गैंगरेप पीड़िता को जिंदा आग के हवाले कर दिया गया था। परिवार ने आरोप लगाया गौरा मोड़ के पास जमानत पर छूटे गैंगरेप के आरोपी हरि शंकर त्रिवेदी, किशोर, शुभम, शिवम और उमेश ने उसे घेर लिया और सिर पर डंडे से और गले में चाकू से वार कर घायल कर दिया। उसके बाद आरोपियों ने पेट्रोल डाल कर आग लगा दी। आग लगने के बाद आरोपी फरार हो गए।

पीड़िता ने थाने में जाकर पांचों के नाम एफआईआर दर्ज कराई इसके बाद उसे इलाज के लिए लखनऊ भेज दिया गया स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया जहां 6 दिसंबर 2019 को देर रात पीड़िता जिंदगी की जंग से हार गयी थी।



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