उन्नाव केस: "आज ये पुलिस फोर्स मेरे किस काम की, मेरी बेटी तो चली गई"

"पुलिस जितनी सुरक्षा आज हमारी कर रही है, अगर इतनी शुरुआत से की होती तो आज हमारी बेटी मरती नहीं।"

Neetu SinghNeetu Singh   7 Dec 2019 2:54 PM GMT

नीतू सिंह/दया सागर

उन्नाव/लखनऊ। "उस लड़के ने (शिवम) इस घटना के दो दिन पहले ही मेरे घर आकर जान से मारने की धमकी दी थी। कहा था जला देंगे पर हमने इस बात को गम्भीरता से नहीं लिया, अगर लिया होता तो शायद हमारी बेटी की जान बच जाती," ये बताते हुए पीड़िता के पिता प्रायश्चित कर रहे थे।

उन्नाव जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर पीड़िता के घर जब हम पहुंचे तो बाहर पुलिस फोर्स थी, मीडिया थी, कुछ नेता भी थे। इन सबसे दूर पीड़िता के पिता घर के आंगन में तख्त पर बैठे अपनी गरीबी को कोस रहे थे और पुलिस के रवैये पर नाराजगी जता रहे थे। वो कहते हैं, "पुलिस जितनी सुरक्षा आज हमारी कर रही है, अगर इतनी शुरुआत से की होती तो आज हमारी बेटी मरती नहीं। जब बिटिया एक साल पहले इसे मामले की रिपोर्ट लिखाने बिहार थाना गयी थी तब उसकी एफआईआर की नहीं दर्ज की गयी। मजबूरी में उसे रायबरेली में मामला दर्ज कराना पड़ा जहां वो रहती थी।"

ये है उन्नाव रेप पीड़िता का घर

पीड़िता के छप्पर वाले कच्चे मकान की दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ी थीं, छप्पर टूटा हुआ था, कई जगह से मिट्टी की दीवार से मिट्टी के टुकड़े गिर रहे थे। घर की ये हालत इस बात की गवाही दे रही थी कि पीड़िता का परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है। पीड़िता के पिता लोहे के सामान बनाकर परिवार का खर्चा चलाते हैं। वो कहते हैं, "अगर उस समय बिहार थाने में मामला दर्ज हो जाता तो उसे रायबरेली जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कई बार आरोपी पक्ष की तरफ से मारपीट और धमकियों की शिकायत दर्ज कराई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब इस पुलिस फोर्स का हमारे लिए कोई मतलब नहीं। हमारी बेटी तो चली गयी। अब हम बस इतना चाहते हैं कि हमारी बेटी को न्याय मिले।"

उन्नाव गैंगरेप का ये मामला लगभग एक साल पुराना है। पीड़िता ने मार्च 2019 में दो लोगों के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज करवाया था जिसके बाद गिरफ्तार मुख्य आरोपी बीते 30 नवंबर को ढाई महीने बाद जमानत पर रिहा हुआ था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के दो दिन पहले ये अरोपी घर पर जान से मारने और आग लगाने की धमकी देकर गया था, जिसे पीड़ित परिवार ने गंभीरता से नहीं लिया था। जिस बात का पीड़ित परिवार प्रायश्चित कर रहा है।

पीड़िता के घर के बाहर लगी पुलिस फोर्स

पुलिस ने जिंदा जलाने के मामले में जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है उसमें मुख्य आरोपी वह भी है जो एक हफ्ते पहले ही जमानत पर छूटा था। बीते पांच दिसंबर को पीड़िता सुबह चार बजे अपने केस की सुनवाई के लिए अपने घर से रायबरेली जाने के लिए ट्रेन पकड़ने निकली थी तभी उसे पांच आरोपियों ने जला दिया। पीड़िता ने थाने में जाकर पांचों के नाम एफआईआर दर्ज कराई इसके बाद उसे इलाज के लिए लखनऊ भेज दिया गया स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया जहां शुक्रवार (6 दिसंबर 2019) देर रात पीड़िता जिंदगी की जंग से हार गयी।

जहाँ एक तरफ पीड़िता का परिवार इस घटना से पूरी तरह से टूट चुका है वहीं परिजन और गांव के कुछ लोगों का आरोप है कि गिरफ्तार आरोपी निर्दोष हैं। इस पक्ष की भी जांच की जाए इसके बाद ही आरोपियों को सजा दी जाए।

बीती शुक्रवार (6 दिसंबर 2019) को इस मामले में नामजद सभी पांच अभियुक्तों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

ये हैं रविन्द्र प्रकाश जिनसे पीड़िता जलने के बाद सबसे पहले मिली थी

जब हमने बीघापुर क्षेत्राधिकारी गौरव कुमार त्रिपाठी से पीड़ित परिवार से धमकी वाली दर्ज रिपोर्ट की बात पूछी तो उन्होंने बताया, "हमारे पास पीड़ित परिवार की तरफ से लिखित रूप में कोई भी प्रार्थना पत्र नहीं आया जिसमें उन्होंने धमकी का जिक्र किया हो। पीड़िता ने उन्नाव में मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान दर्ज कराए थे जिसके आधार पर कुछ ही घंटों में पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।" उन्होंने आगे बताया, "ये गिरफ्तारी हमने पीड़िता के बयान, लोगों से पूछताछ और चश्मदीद के बयान के आधार पर की है पर अभी किसी भी अभियुक्त ने इस घटना को स्वीकार नहीं किया है।"

पान की दुकान चलाने वाले रविन्द्र प्रकाश से जलने के बाद पीड़िता सबसे पहले मिली। हमने जब उनसे बात की तो उन्होंने बताया, "हम करीब साढ़े चार बजे भैंस बांधकर आये थे तो पीड़िता दौड़ते हुए आई और उसने मुझसे मोबाइल फोन मांगा और कहा वो पुलिस से बात करेगी। उसके शरीर पर एक भी कपड़े नहीं थे हम भी उसको देखकर बुरी तरह से डर गये थे।" वो आगे कहते हैं, "जहां उसे जलाया गया था वहां से एक किलोमीटर हमारी दुकान है। उस समय दूर-दूर तक मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। वो पुलिस को फोन करके तुरंत यहां से चली गयी।"


इस मामले में पीड़िता के परिवार, गांव वाले, पड़ोसी और आरोपी परिवार से निकली तमाम बातों में एक बात जो सामने आई वो यह कि पीड़िता का मुख्य आरोपी शिवम के साथ दो-तीन साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आपसी सहमति से दोनों दो महीने घर से बाहर साथ रहे और उन्होंने रजिस्टर्ड शादी भी की थी लेकिन एक साल पहले शिवम और पीड़िता के बीच आपसी रिश्तों को लेकर कुछ अनबन हुई जिसके बाद आरोपी ने शादी से मना कर दिया। आरोपी की मां के मुताबिक़ पीड़िता ने धमकी दी थी अगर शादी नहीं की तो रेप का मुकदमा कर देगी।

आरोपी की मां ने रजिस्टर्ड शादी की जानकारी से इंकार किया है। उन्होंने बताया, "हम कभी लड़की के घर नहीं गये और न ही कोई धमकी दी। उन्होंने मेरे लड़के पर रेप का मुकदमा किया, उसे जेल भेजा तब भी हमने कुछ नहीं कहा। मुश्किल से बेटे की जमानत कराई थी कि अब सब ठीक हो जाएगा तब तक ये सब हो गया।"

उन्होंने आगे कहा, "मेरे बेटे के साथ जिन दो और लड़कों को फंसाया गया है वो सब मेरे बेटे के दोस्त थे। लड़की उन सबसे कहती थी कि मेरी शिवम से शादी करा दो। इस गुस्से में उन दोनों को भी फंसा दिया। अगर लड़की को जलाने में मेरा बेटा दोषी है तो उसे जो सजा दी जाए हमें मंजूर है पर पहले निष्पक्ष जांच हो।"

इस केस की तह तक जाने के लिए हमने गांव में कई लोगों से बात की जिसमें पीड़िता की मौत का सभी ने अफसोस जताया पर गिरफ्तार अभियुक्तों के लिए भी हमदर्दी जताई कि वो लोग दोषी नहीं है। गांव में सब उनके व्यवहार को जानते हैं।

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ये हैं आरोपी परिवार के परिजन जिनका कहना है मामले की निष्पक्ष जांच हो

इस मामले पर लखनऊ की वकील रेनू मिश्रा कहती हैं, "उन्नाव केस में जो शादी का कागज वायरल हो रहा है वो कानूनी तौर पर मान्य नहीं है। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत सेक्शन (5) में शादी होती है। दूसरी बात अगर उन्होंने शादी की थी और घर वाले राजी थे तो फिर दोनों को घर से बाहर रहने की जरूरत क्यों पड़ी। तीसरी बात कई बार लोग रेप से बचने के लिए फर्जी शादी कर लेते हैं।"

वो आगे कहती हैं, "ये सारे सवाल जांच का विषय है लेकिन हम बस इतना कहना चाहेंगे अगर पीड़िता को आग लगानी होती तो वो पहले भी लगा सकती थी आरोपी के बेल पर छूटने के बाद ही उसने क्यों आग लगाई। अगर आरोपी पक्ष कह रहा है कि आरोपियों ने आग नहीं लगाई तो ऐसा क्या किया गया जिससे उसे आग लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। हो सकता है उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया हो, कोई भी व्यक्ति ऐसे मरना नहीं चाहेगा।"

पीड़िता की भाभी ने बताया, "हमारी ननद ने हमें कभी इस शादी के बारे में खुद से नहीं बताया। आरोपी परिवार ने जब घर आकर धमकी दी कि लड़की को घर से भगा दो या शादी कर दो तब हमें पता चला कि इन लोगों ने कोर्ट मैरिज शादी कर ली है। इस शादी में सिर्फ जाति आड़े आयी है क्योंकि हम लोहार हैं और वो पंडित।" वो आगे कहती हैं, "बिटिया थी वो हमारे घर की कहां भगा देते उसे बाहर। तब भी धमकी के पांच छह महीने वो अपनी बुआ के यहां रही थी। इस मामले में कई बार वो लोग हमारे सास- ससुर को भी पीट चुके हैं। गालीगलौज तो आये दिन करते रहते थे।"

पीड़िता की भाभी ने कहा वो लोग एक साल से धमकी दे रहे थे

जब हमने उनसे पूछा इतना डर का माहौल था फिर पीड़िता को अकेले क्यों जाने दिया इस पर पूरे परिवार ने अलग-अलग जवाब दिए। पीड़िता की भाभी ने बताया, "उस दिन खेत में पानी लगना था इसलिए हमारे ससुर और पति स्टेशन छोड़ने नहीं जा पाए। वैसे भी वो अकेले ही आती जाती थी। इस तरह की घटना हो जायेगी इसका हमें अंदाजा नहीं था।

वहीं पीड़िता के भाई ने बताया, "स्टेशन घर से पास में ही है। मैं छोड़ने जा रहा था पर शौच के लिए निकल गया तबतक वो अकेले ही चली गयी।" जबकि पीड़िता के घर से स्टेशन की दूरी लगभग तीन किलोमीटर दूर है। वहीं पीड़िता के पिता ने अकेले जाने की बात पर बताया, "मैं अकसर उसे स्टेशन तक छोड़ने जाता था लेकिन कल सोता ही रहा वो अकेले बिना बताये निकल गयी।" पीड़िता के परिवार से बात करके एक बात ये भी सामने आयी कि पूर मामले के बारे में परिवार को बहुत कम जानकारी है जिसकी वजह पूछने पर वो लोग खामोश रहे।

ये हैं गांव के लोग जो पीड़िता के मरने से दु:खी हैं लेकिन आरोपी पक्ष की तरफ से जांच की मांग कर रहे हैं.

उन्नाव रेप केस में पीड़ित परिवार और गांव वालों के बयान में तमाम तरह की गुत्थियां हैं। एक पड़ोसी ने बताया, "जबसे लड़की लड़के के साथ बाहर रहकर आयी थी तब से घरवाले उससे नाराज थे, कोई ज्यादा उससे मतलब नहीं रखता था। वो केस भी अपना अकेले की लड़ रही थी। शिवम (मुख्य आरोपी) के साथ उसके अफेयर की जानकारी तो पूरे गांव को है। सुनने में तो ये भी आया था कि लड़के ने अपने घरवालों को शादी के लिए राजी भी कर लिया था।" उन्होंने आगे बताया, "पर लड़के-लड़की के बीच कुछ अनबन हो गयी थी जिसकी वजह से बात इतनी आगे बढ़ गयी।"

पीड़िता की मौत के बाद पूरा गांव गमगीन माहौल में है। पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री के आने के बाद बेटी का दाह संस्कार करने की जिद पर अड़े थे लेकिन पुलिस के दो तीन घंटे समझाने के बाद बेटी को गांव के बाहर दफनाया गया। राज्‍य सरकार की तरफ से पीड़िताके परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया गया।

इस बीच लखनऊ के कमिश्‍नर मुकेश मेश्राम ने ऐलान किया है कि पीड़िता की बहन को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को दो घर दिए जाएंगे। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जाएगी।

ये है वो जगह जहां पीड़िता जली थी

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