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महाराष्ट्र: 55 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसल बर्बाद, किसानों को मुआवजे का इंतजार

Arvind ShuklaArvind Shukla   1 Nov 2019 2:05 PM GMT

महाराष्ट्र में बेमौसम हुई बारिश से तबाही के आंकड़े आने शुरु हो गए हैं। फसलों का सबसे ज्यादा नुकसान मराठवाड़ा के 8 जिलों में हुआ है। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री कार्यालय के जारी प्राथमिक आंकड़ों के मुताबिक 325 तालुका में 55 लाख 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। सोयाबीन, ज्वार, धान, तूर, कपास और बाजरा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक 5000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। फसल बर्बादी के आंकलन में देरी होने से किसान सरकार से नाराज हैं।

"किसान के घर आ रही फसल बर्बाद हुई है। कई इलाकों में किसानों मुठ्ठी भर भी अनाज नहीं मिलेगा। किसानों के लिए बहुत बड़ी तबाही है, सरकार को चाहिए निर्धारित नियमों को दरकिनार करते हुए किसानों की मदद करे, क्योंकि इस महंगाई में सिर्फ क्षतिपूर्ति से काम नहीं चलेगा।" विजय जावंधिया, किसान नेता और स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के संस्थापक सदस्य कहते हैं।

महाराष्ट्र में चक्रवाती तूफान क्यार के चलते अक्टूबर में भारी बारिश हुई है। जिसके चलते उदड़, ज्वार-बाजरा, मूंग, सोयाबीन, कपास, अंगूर, प्याज, कपास की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।

मराठवाड़ा में भारी के चलते दोबारा जमे (अंकुरित) हुए ज्वार को दिखाता किसान। यही हाल सोयाबीन का भी हुआ है।

महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच सरकार बनाने के बीच चल रही खींचतान के बीच किसानों पर ये त्रासदी उस वक्त हुई जब उनकी फसलें खेत से लगभग तैयार थीं, उदड़ और सोयाबीन की थ्रेसिंग होने वाली थी, तो ज्वार कटकर खेत में रखे थे। लेकिन लगातार भारी बारिश के चलते वो खेत में दोबारा जम गए हैं। दि वेदर चैनल वेबसाइट के मुताबिक भारी बारिश से 5000 करोड़ से ज्यादा की फसल नुकसान हुआ है।

चुनावी घमासान के बाद महाराष्ट्र में किसानों के नुकसान पर घमासान शुरु हो गया है। शिवसेना ने वेट ड्राट घोषित करने की मांग की है तो स्वाभिमानी शेतकारी संगठन ने जल्द मुआवजा न मिलने पर राज्यव्पापी आंदोलन की चेतावनी दी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पंवार खुद नाशिक में कई अंगूर किसानों के बागों में गए थे, उनकी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने जल्द से जल्द नुकसान का आंकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने उच्च स्तरीय बैठक के बाद कहा, बैमौसम बारिश के 325 तालुका में 54 लाख 22 हजार हेक्टेयर एरिया में नुकसान हुआ है। कलेक्टर को फील्ड में जाकर पंचनामा करने के निर्देश दिए गए हैं। हमारी कोशिश है कि हर किसान को मुआवजा मिले।'


मुख्यमंत्री कार्यालय के ट्वीटर हैंडल ने क्षेत्रवार नुकसान के प्राथमिक आंकड़े जारी कि हैं। जिसके मुताबिक पुणे की 51 तालुका में 1.36 लाख हेक्टयेर से ज्यादा का नुकसान हुआ है तो कोंकण की 46 तालुका की 97000 हेक्येटर, नाशिक की 52 में 16 लाख हेक्टेयर, औरंगाबाद की 72 तालुका में 22 लाख हेक्टेयर, अमरावती की 56 तालुका में 12 लाख और नागपुर की 48 तालुका की 40000 हेक्टेयर में फसल का नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि प्रदेश की दोनों बीमा कंपनियों से कहा गया है कि नुकसान काफी ज्यादा और उनके पास मैनपावर की कमी है, इसलिए जो सरकारी अधिकारी पंचनामा बनाकर देंगे उसे ही आखिरी मानकर उन्हें मुआवजा देना होगा।

लेकिन किसानों का आरोप है कि कई जिलों में बीमा कंपनी के कर्मचारी पंचनामे में शामिल हैं वो उसमें हेरफेर कर सकते हैं। उस्मानाबाद में उमरगा तालुका के किसान अशोक पंवार कहते हैं, हमारी तालुका में तहसीलदार ने अंदाजे से 52.12 फीसदी का पंचनामा दिखाया है। लेकिन 52 फीसदी से ज्यादा के पंचनामे से किसानों को सरकार से कोई मदद नहीं मिलती है। तहसीलदार ने कहा है कि वो अंदाजे से ऐसा बताया है लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए, पंचनामा किसान के खेत में आकर होना चाहिए।

इस बारे में जब गांव कनेक्शन ने उस्मानाबाद की कलेक्टर दीपा मुंडे से बात की। उन्होंने कहा कि, पंचनामें जारी हैं, जिस भी किसान का 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है उसे फसल बीमा और आपदा राहत के तहत सरकारी मदद दी जाएगी। किस किसान को कितना पैसा मिलेगा ये पंचनामे के बाद तय होगा। अभी जो तहसीलदार आदि ने बात की है उसकी मुझे जानकारी नहीं शायद वो अनुमानित बात कर रहे होंगे, लेकिन उसका कोई मतलब नहीं है।"

महाराष्ट्र में दो बीमा कंपनियां कार्यरत हैं, जिसमें एक सरकारी (यूनाइटेड इंडिया इंश्यूरेंस कंपनी लिमिटेड और दूसरी बजाज एलाउंस फसल बीमा है। फसल आदि के नुकसान के बाद अनिवारी या पंचनामा किया जाता है। इस टीम में राजस्व, कृषि और ग्राम सेवक और बीमा कंपनी का कर्मचारी शामिल होता है। किसानों का कहना है कि पंचनामें के काम से बीमा कंपनी को दूर रखना चाहिए।

अशोक पंवार कहते हैं, "ग्राम सेवक, तलहाटी और कृषि सहायक को ही ये काम करना चाहिए। बीमा कंपनी का कर्मचारी, अपनी कंपनी के बारे में सोचता है, जिससे किसानों का नुकसान होता है। 2015 में भी उदड और कुछ फसलें भीगी थीं, पंचनामा भी हुआ था लेकिन मुझे या मेरे गांव में किसी किसान को एक पैसा नहीं मिला था, क्योंकि पंचनामा बनाया ही शायद ऐसे गया होगा।"

फसल बीमा योजना और आपदाओं के दौरान किसानों को मिलनी वाली आर्थिक सहायता पर विजय जावंधिया कहते हैं, किसानों को इस आर्थिक संकट के दौर में उसी फसल से न सिर्फ अपनी आगे की फसल बोनी होती है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, परिवार और उनकी सेहत की देखभाल भी करनी होती है। इसलिए ओले आदि गिरने पर सरकार को चाहिए पूरे देश में किसानों को शत प्रतिशत मुआवजा मिले। वो मुआवजा भी कृषि लागत मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices) के अनुसार लागत पर 50 फीसदी लाभ का होना चाहिए, वर्ना किसान की आत्महत्या और कर्ज़मुक्ति की नौबत आती रहेगी।"


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीश ने कहा कि महाराष्ट्र में इस साल चार साइक्लोन (चक्रवात) और 1 सुपर साइक्लोन के चलते अप्रत्याशित बारिश हुई है। बारिश से ज्यादातर नुकसान अक्टूबर के दूसरे और तीसरे हफ्ते में हुआ है। अगर किसी किसान के खेत में पंचनामा नहीं होता है तो उसके द्वारा भेजी गई फोटो ही फसल खराबी का सबूत मानी जाएंगी। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अक्टूबर में सामान्य से 127 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। मराठवाड़ा के 8 जिलों में 217 फीसदी अधिक बारिश हुई है। केंद्र की टीम भी हालात का जायदा लेने प्रदेश पहुंचने वाली है।

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