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बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, इन फसलों को हो सकता है नुकसान

बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, इन फसलों को हो सकता है नुकसानपानी में डूबी आलू की फसल। (सभी तस्वीरें- अभिषेक वर्मा)

बेमौसम बारिश ने एक फिर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में दो दिनों से लगातार बारिश से जहां सरसों की फसल में बीमारी बढ़ने का आशंका है तो वहीं आलू की फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि गेहूं के लिए बारिश फायदेमंद बताई जा रही है।

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत उत्तर भारत में हो रही इस बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने पहले ही जारी कर दी थी। रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण आलू की खेतों में पानी जमा हो गया है। नमी बढ़ने से जहां सरसों की फसल बीमारी की चपेट में आ सकती है तों वहीं कमजोर होने के कारण फूल भी टूट रहे हैं।


सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर, राजस्थान के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार राय बताते हैं, "बारिश के साथ जहां पर हवा चल रही है, वहां पर नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि सरसों में बालियां लगने के बाद जब उसमें दाने भरते हैं तो पौधे गिर जाते हैं, जिससे नुकसान हो सकता है। साथ ही इस समय लगातार नमी रहने से सरसों में स्टेम रॉट (तना गलन) की बीमारी भी हो सकती है, फंगस से होने वाली ये बीमारी काफी नुकसान करती है। इसमें पौधों के तने गलने लगते हैं, जिससे पौधे सूख जाते हैं।"

मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सरसों की खेती ज्यादा होती है और इन सभी राज्यों में बारिश बीते कुछ दिनों से हो रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूवार्नुमान के अनुसार, उत्तर भारत में 17 जनवरी तक कई क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक जेपी गुप्ता बताते हैं, "अभी एक-दो दिनों तक ऐसा ही मौसम रहेगा, 18 जनवरी के बाद मौसम कुछ सही होगा। उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में बारिश हुई है, कहीं पर ज्यादा बारिश हुई है कहीं पर ज्यादा है। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ऐसा मौसम बना हुआ है।" हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश के साथ ओले भी गिरे हैं।


डॉ. प्रमोद कुमार राय यह भी बताते हैं कि इस बेमौस बारिश से सरसों की फसल में तना गलन रोग का प्रकोप बढ़ सकता है। सरसों की फसल रतुआ रोग से पहले से ही खरब हो रही है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत आने वाले दलहन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक जीपी दीक्षित बताते हैं, " चने की फसल को इस बारिश से नुकसान नहीं होगा, बल्कि किसानों को अब सिंचाई के लिए पैसे नहीं खर्च पड़ेंगे।"

हरियाणा के करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल को सर्दी के मौसम की इस बारिश से फिलहाल कोई नुकसान नहीं है। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल को बारिश से तभी नुकसान हो सकता है जब खेतों में दो दिनों से अधिक समय तक पानी खड़ा रह जाएगा।


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