बोर्ड परीक्षा में केन्द्रों को लेकर इस बार बदले गए नियम , क्या आएगी पारदर्शिता ?

बोर्ड परीक्षा में केन्द्रों को लेकर इस बार बदले गए नियम , क्या आएगी पारदर्शिता ?यूपी बोर्ड परीक्षा के केन्द्र निर्धारित करने में बरती जाएगी पारदर्शिता।

इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी करी रहे प्रियांश तिवारी (18 वर्ष) बताते हैं, “ इस बार नकल बिल्कुल नहीं हो पाएगी, बहुत नियम बदल दिए गए हैं, जो पढ़ेगा वही पास हो पाएगा। मेरी तैयारी तो पूरी है फिर भी थोड़ा डर तो लगता है। ”

यूपी बोर्ड की 2018 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। पिछली बार की अपेक्षा इस बार नियमो में कई बदलाव हुए हैं जिसे देखकर ये कहा जा सकता है कि परीक्षा में पारदर्शिता आएगी।

अब तक जितने भी केंद्र निर्धारित किए गए हैं, उसमें राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को ही तरजीह दी गई है। वर्ष 2017 की हाईस्कूल परीक्षा के लिए 11,413 तथा इंटरमीडिएट के लिए 10,868 केंद्र बनाए गए थे। ऐसे में पिछली परीक्षा की तुलना में इस बार केंद्रों की संख्या तकरीबन दो हजार कम हो जाएगी, क्योंकि परिषद ने वित्त विहीन विद्यालयों के बजाए राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालय परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों की संख्या अधिक कर दी है।

ऑनलाइन होगें परीक्षा केन्द्र

इस बार बोर्ड परीक्षा में सारे केन्द्र ऑनलाइन रखे जाएंगें। लखनऊ के डीआईओएस मुकेश कुमार सिंह बताते हैं, “नकल विहीन परीक्षा के उद्देश्य से इस बारे कई मानक तय किए गए हैं जो स्कूल इन नियमों को पूरा करेगें वहीं केन्द्र बनाए जाएंगें अभी तक अधिकारी तय करते थे कि कौन से स्कूल को केन्द्र बनाना है। इसके अलावा पहली बार केन्द्रों का ब्यौरा आनलाइन रखा जा रहा है जिससे पारदर्शिता आ सके।”

नए स्कूलों को भी बनाया जाएगा इस बार केन्द्र

पिछली बार लखनऊ में 150 स्कूलों को केन्द्र बनाया गया था। लेकिन इस बार इनकी 154 है। जिसमें 11 राजकीय विद्यालय, 62 सहायता प्राप्त विद्यालय भी शामिल हैं। इनमें से बड़े स्कूल जैसे राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गोमतीनगर, उत्तर प्रदेश राजकीय सैनिक स्कूल, बक्शी का तालाब इंटर कॉलेज, महात्मा गांधी इंटर कॉलेज समेत कई विद्यालयों को शामिल नहीं किया गया जो पिछली बार केन्द्र थे।

माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव नीना श्रीवास्तव बताती हैं, अभी खाका तैयार किया गया है, जिला स्तर पर कमिटी अपने अपने सुझाव विभाग को 27 नवम्बर तक भेजेगी। इसके बाद इन पर विचार करने के बाद केन्द्रों की सूची तय की जाएगी। इस बार नए केन्द्रों को शामिल करने व कुछ पुराने को हटाने से नकलविहीन परीक्षा हो सकेगी।

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज नौगढ़ की प्रधानाचार्य विभा चतुर्वेदी बताती हैं, हमारे स्कूल को इस बार केन्द्र नहीं बनाया गया है क्योंकि ये दिए गए मानकों पर खरा नहीं उतरता।

सूची में कई नाम ऐसे हैं जिन्हें पिछली बार केन्द्र नहीं बनाया गया था लेकिन इस बार वो केन्द्र बनाए गए हैं। न्यू विजन अकादमी गोसाईंगंज, संत एस राम, आदर्श इंडियन विद्यालय पलेहदा आदि को पहली बार केन्द्र बनाया गया है।

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अधिकारी नहीं बोर्ड चयन करेगा किसे बनाना है केन्द्र

लखनऊ के डीआईओएस मुकेश कुमार सिंह बताते हैं, अभी तक अधिकारी केन्द्र बनाते थे लेकिन इस बार इलाहाबाद बोर्ड लॉटरी सिस्टम से केन्द्र निर्धारित करेगा वही लिस्ट बनाकर देगा कि किसे केन्द्र बनाया जाए। लगातार वर्षों से केन्द्र बन रहे बक्शी का तालाब को इस बार केन्द्र नहीं बनाया गया है। वहां के कामर्स लेक्चरर अशोक बाजपेयी बताते हैं, पहली बार ऐसा हुआ कि इसे केन्द्र बनने की लिस्ट से हटा दिया गया है। अभी इस पर मीटिंग की जा रही है, सुझाव भी भेजे गए हैं। लॉटरी सिस्टम से कई सारे ब्लैक लिस्टेड कॉलेज केन्द्र बन जाएंगें तो कई ऐसे भी जहां पर बैठने की ही जगह नहीं होगी तो इन सब दिक्कतों को सामने रखा जाएगा।

सीसीटीवी जरूरी

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराने हेतु परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे दिसंबर 2017 तक प्रत्येक दशा में लगवाना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही कहा था कि निर्धारित अवधि में प्रस्तावित परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरे न लगने की स्थिति पर उसे परीक्षा केंद्र कतई न बनाया जाए।

बोर्ड परीक्षा नकलविहीन होने की उम्मीद।

आधार कार्ड की अनिवार्यता

उत्तर प्रदेश मध्यमिक शिक्षा परिषद् ने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए आधार अनिवार्य कर दिया है। अडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय अग्रवाल ने मंगलवार को जिला स्कूल निरीक्षकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निर्देश दिया कि जो छात्र बिना आधार के आएंगे, उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। इससे पहले यूपी बोर्ड में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं देने वाले छात्रों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए आधार को अनिवार्य किया गया था। आधार कार्ड से फर्जी नामांकन और उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर नकल पर लगाम लगाएगा। वैध आधार संख्या होने से बोर्ड परीक्षा में नकली रजिस्ट्रेशन या किसी और की जगह परीक्षा देने जैसी घटनाएं नहीं हो पाएंगी। इस बार यूपी में 37,12,508 छात्र दसवीं व 30,17,032 छात्र 12वीं की परीक्षाएं देंगे।

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