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औरैया हादसा: घायलों को शवों के साथ एक वाहन में भेजने के मामले में यूपी सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नोटिस

औरैया हादसे में झारखंड और पश्चिम बंगाल के 18 शवों को घायल मजदूरों के साथ चार डीसीएम (ट्रक) से 17 मई को भेजा जा रहा था लेकिन सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद आधे रास्ते से इन शवों को एम्बुलेंस द्वारा भेजा गया। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

Neetu SinghNeetu Singh   22 May 2020 7:47 PM GMT

औरैया हादसा: घायलों को शवों के साथ एक वाहन में भेजने के मामले में यूपी सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नोटिस

औरैया हादसे में घायल मजदूरों को शवों के साथ एक ही वाहन से भेजने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 22 मई को यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने एक बयान में कहा है कि शव और प्रवासी मजदूरों को एक ही वाहन से ले जाया गया, अधिकारियों द्वारा यह बेहद अनैतिक एवं अमानवीय रवैया है।

वायरल तस्वीरों में शवों और घायल मजदूरों के बीच की दूरी एक दो मीटर के बीच की थी। डीसीएम में पीछे एक तरफ काली पन्नी में लिपटे शव रखे थे दूसरी तरफ कुछ मजदूर सो रहे थे। ये तस्वीरें शवों के साथ जा रहे घायल विकास ने अपने परिजनों को भेजी थीं।

औरैया हादसा में झारखंड के 12 और पश्चिम बंगाल के छह शवों को घायल मजदूरों के साथ चार डीसीएम (ट्रक) से 17 मई को भेजा जा रहा था। झारखंड जा रही एक डीसीएम पर शव के साथ घायलों की एक तस्वीर वायरल होने के बाद अधिकारियों ने आनन-फानन में इलाहाबाद पहुंचते ही शवों को एम्बुलेंस में करके आगे भेजा।


उस दिन पश्चिम बंगाल का मामला सामने नहीं आ पाया था। ड्राइवर पप्पू ने वापस आकर बताया, "मेरी गाड़ी (डीसीएम) से छह शव पश्चिम बंगाल भेजे गये थे, बनारस पहुंचने से कुछ किलोमीटर पहले ही मेरी गाड़ी से शव एम्बुलेंस में किये गये और मुझे वापस भेज दिया गया।"

झारखंड के बोकारो जिले के खीरा बेड़ा गाँव के नागराज कालिंदी (23 वर्ष) ने 17 मई को गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया था, "मेरे परिवार के तीन लोग इस हादसे में मरे हैं, गाँव के कुल पांच लोग मरे हैं। मेरे भतीजे विकास ने फोन करके बताया कि अभी जिस ट्रक से वो आ रहा है उसी में गाँव की पांच लाशें भी रखीं हैं। ट्रक (डीसीएम) के पीछे एक हिस्से में काले रंग की प्लास्टिक में लाशें बंधी है, दूसरी छोर पर हम लोग सो रहे हैं।"

नागराज कालिंदी ने औरैया हादसे की उस पीड़ा को बयान किया था जिससे वो आहत थे। नागराज के परिवार के चचेरे भाई और भतीजे मिलाकर कुल तीन लोगों की इस हादसे में मौत हुई थी।

"जब मुझे पता चला कि हमारे भतीजे और पड़ोसियों की लाशें ट्रक से आ रही हैं, तो सुनकर मुझे बस यही लगा कि, "मजदूर थे तभी उनकी लाशों को ट्रक से भेजा गया है। मेरे भतीजे को अस्पताल में पीने का पानी तक नहीं मिला। मैंने ही उसको फोन करके बोला कैसे भी करके तुम गाँव आ जाओ, हम यहाँ इलाज करवाएंगे," नागराज कालिंदी के इन शब्दों में तकलीफ थी।

औरैया में 16 मई को सुबह के करीब साढ़े तीन चार बजे ट्रक और डीसीएम की टक्कर में अबतक 28 मजदूरों की मौत हो गई है जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हैं। झारखंड के घायल मजदूरों ने यह आरोप लगाया कि अस्पताल में उनकी इलाज ठीक से नहीं हो रही है।

इस पूरे घटनाक्रम को संज्ञान में लेते हुए 22 मई को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मुख्य सचिव को जारी नोटिस में उन्हें चार सप्ताह के अन्दर विस्तृत रिपोर्ट दायर करने को कहा गया है। माँगी गयी इस विस्तृत रिपोर्ट में मांगा गया कि अबतक उन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है? इसके अलावा राज्य अधिकारियों द्वारा पीड़ित परिवारों को राहत या पुनर्वास के लिए क्या प्रयास किये गये हैं? आयोग द्वारा घायल प्रवासी मजदूरों की स्थिति और इलाज के सम्बन्ध में भी जानकारी माँगी गयी है।

इस तरह से डीसीएम में रखकर जा रहे थे शव.

मानवाधिकार आयोग ने यह भी कहा कि इस मामले को जिम्मेदार अफसर समझदारी से नहीं निपटा पाए। शवों और घायलों को ऐसे भेजकर गरीब मजदूरों के अधिकारों का उल्लंघन किया गया है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट के द्वारा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की थी कि शव को सम्मान के साथ झारखंड बॉर्डर तक भेज दिया जाए।

साथ ही हेमंत सोरेन ने बोकारो डीसी और झारखंड पुलिस को टैग करते हुए लिखा था, "यह स्थिति अमानवीय एवं अत्यंत संवेदनहीन है। झारखण्ड की सीमा में प्रवेश करते ही घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करें। साथ ही मृतकों के पार्थिव को पूरे सम्मान के साथ उनके घर तक पहुँचाने का इंतज़ाम कर सूचित करें।"

औरैया हादसे में मृतक राहुल की पत्नी पांच दिन के बच्चे को गोद में लिए हुए.



इस मामले पर जब 17 मई को औरैया जिलाधिकारी अभिषेक सिंह से एक स्थानीय पत्रकार ने बात की तो उन्होंने कहा, "झारखंड के शव ज्यादा थे इसलिए चार डीसीएम बुक करके उनमें चार-चार शव भेजे गये। आठ नौ जो घायल मजदूर थे उन्हें भी दो डीसीएम में आगे बैठाने को बोला था। सूचना मिली है कि वो सब भी शव के सतह पीछे बैठे हैं। इलाहाबाद में आरटीओ से बोल दिया है कि वह घायलों को अलग से बिठाकर भेजें।"

जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने गाँव कनेक्शन को 18 मई को फोन पर बताया, "झारखंड के पलामू जिले के नीतीश कुमार के शव को डीप फ्रीजर एम्बुलेंस से उनके गाँव चीरू पहुंचाया गया है।"

नीतीश के पिता सुदामा यादव ने गाँव कनेक्शन को बताया, "मुझे रास्ते में कोई दिक्कत परेशानी नहीं हुई। एम्बुलेंस आज सुबह मेरे घर तक शव छोड़कर गयी है। औरैया में एक अधिकारी ने हमें 2,000 रुपए रास्ते के खर्चे के लिए दिए थे।"

नीतीश के पिता के साथ ऐसा तब हुआ जब शवों के साथ घायलों के जाने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा वायरल हो चुकी थी।

एम्बुलेंस में रखा गया नीतीश का शव.

औरैया हादसे में अधिकारियों की कई लापरवाहियां सामने आयी हैं। एम्बुलेंस से शव को बिहार ले जा रहे एक परिजन ने एक वीडियो बनाकर भेजा था जिसमें उसने आरोप लगाया था कि ड्राइवर गाड़ी की एसी ने चला रहा है जिस बदबू आ रही है। बिहार के गया जिले के बाराचट्टी गाँव के केदार और अशोक यादव के शवों का गया के मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच हुई लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही शव परिजन को सौंप दिए गये।

मजदूरों के शव राज्यों में पहुँचाने के लिए औरैया प्रसाशन ने पांच लेखपालों की ड्यूटी लगाई थी लेकिन ये साथ में नहीं गये। तस्वीरें वायरल होने के बाद इन पाँचों को निलंबित कर दिया गया। लेखपालों पर कार्रवाई होने के बाद लेखपाल संघ विरोध में खड़ा हो गया है। लेखपालों का आरोप है कि रात ढाई बजे व्हाट्सएप ग्रुप पर शवों के साथ उसी डीसीएम में साढ़े तीन बजे जाने की सूचना दी गयी।

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