यूपी पुलिस ने खड़े किए हाथ, आईएएस मौत की जांच सीबीआई को

यूपी पुलिस ने खड़े किए हाथ, आईएएस मौत की जांच सीबीआई कोएसएसपी लखनऊ से मुलाकात करते आईएएस अनुराग तिवारी के परिवारजन।

लखनऊ। आईएएस अनुराग तिवारी की मौत के मामले में सोमवार को परिवार ने एसएसपी लखनऊ से मुलाकात कर एक लिखित तहरीर दी। जिस आधार पर हजरतगंज पुलिस ने आईएएस की रहस्मय मौत में 302 आईपीसी धारा के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही परिवार के निष्पक्ष जांच की मांग को देखते हुये एसएसपी ने मामले को सीबीआई जांच के लिए संसृति कर शासन को पत्र भेज दिया है। पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर, कर्नाटक में तैनात आईएएस आधिकारी अनुराग तिवारी ने राज्य में कई घोटालों को उजागर किया था, जिसके चलते उनका करीब दस सालों के करियर में दस बार तबादला किया गया था। वहीं परिवार ने पुलिस के साथ मीराबाई गेस्ट हाऊस पर जाकर घटनास्थल का मुआयना कर, जानने का प्रयास किया की आखिर अनुराग के साथ हुआ क्या था।

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आईएएस अनुराग तिवारी के बड़े भाई मयंक उनकी पत्नी सुनीता तिवारी, मां सुशीला तिवारी और पड़ोसी पीएन शुक्ला सोमवार दोपहर हजरतगंज स्थित एसएसपी आवास पर पहुंचे, जहां एसएसपी दीपक कुमार ने पीड़ित परिवार से संवेदना व्यक्त करते हुए उनसे लिखित तहरीर मांगी। तहरीर के आधार पर हजरतगंज पुलिस ने पीड़ित परिवार की एफआईआर दर्ज कर जांच में जुट गई है।

एसएसपी लखनऊ से मुलाकात कर लिखित पत्र सौंपते आईएएस अनुराग के पारिवारिक सदस्य।

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वहीं भाई मयंक के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने अनुराग के पूरे करियर में करीब दस ट्रांसफर किए है, जिसके पीछे अनुराग का घोटलों को उजागर करना मुख्य कड़ी थी। इसे लेकर घोटालेबाज उनसे काफी नफरत करते थे और समय-समय पर उन्हें धमकियां भी दिया करते थे। साथ ही कुछ गलत कागजों पर घोटालेबाज हस्ताक्षर करने का भी दबाव बनाते थे, जिसे अनुराग सिरे से खारीज कर देते थे। मयंक ने बताया कि, इस आधार पर ही पुलिस को अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी है, जिससे अनुराग के कातिलों को सलाखों के पीछे भेजा जाये। उधर दोपहर चार बजे लखनऊ एसआईटी ने पीड़ित परिवार को घटनास्थल से लेकर मीराबाई गेस्ट हाऊस का मुआयना कराया, जिसे देख कर परिवार की आंखें भर आई और भाई मयंक सहित पूरा परिवार बदहवास हो गया।

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वहीं एसएसपी दीपक कुमार के मुताबिक, पीड़ित परिवार उनसे दोपहर में मिले आया था, जिसे दिखते हुए एसआईटी टीम प्रभारी सीओ हजरतगंज अवनिश मिश्रा को बुलाकर पूरी जांच में क्या बात सामने निकल कर आई, यह पीड़ित परिवार को बताया गया। साथ ही पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की भी मांग की, जिसे देखते हुए पूरे केस को सीबीआई से जांच कराने के लिए संसृति कर दी, जिसे जल्द ही शासन स्तर पर भेज दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि सीबीआई को केस सरकार ही भेजती है, जिला पुलिस स्तर से केवल केस को संसृति ही किया जा सकता है।

सीएम से मिला पीड़ित परिवार

आईएएस अनुराग तिवारी का परिवार सोमवार सुबह 11 बजे राजधानी पहुंचा, जहां बड़े भाई मयंक अपनी पत्नी सुनीता, मां सुशीला और पीएन शुक्ला के साथ सीएम कार्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस मुलाकात में मां सुशीला तिवारी ने बताया कि, सीएम ने बीस मिनट तक परिवार की पूरी बात सुनी और बेटे की मौत पर उचित जांच करा न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। साथ ही परिवार को पूरी मदद का भी भरोसा देने के साथ-साथ सीबीआई से पूरे केस की जांच कराने की बात कही है।

सेंट्रल फोरेंसिक लैब से होगी जांच

एसएसपी दीपक कुमार ने बताया किप, पीड़ित परिवार को लखनऊ के फोरेंसिक लैब पर भरोसा नहीं था। परिवार ने आरोप लगाया है कि, फोरेंसिक लैब के डॉक्टर गैसुद्दीन विसरा रिपोर्ट से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इस शिकायत पर एसएसपी ने अनुराग तिवार के विसरा जांच को दिल्ली सेंट्रल फोरेंसिक लैब भेज कर जांच कराने का आदेश दिया है।

चार महीने से आईएएस को नहीं मिल रही थी सैलरी

भाई मयंक के मुताबिक, अनुराग ने कर्नाटक के बेंगलुरु में जब फूड एंड सप्लाई विभग का कार्यभार जैसे ही संभाला, उसके कुछ दिनों बाद ही एक 40 करोड़ का विभाग में ही घोटाला पकड़ लिया, जिसकी शिकायत कर्नाटक के मुख्य सचिव से की, पर उन्होंने इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। इससे परेशान अनुराग चार महीने की छुट्टी का आवेदन लगाकर किसी अज्ञातवास पर विपासन केंद्र पर चले गए, जबकि इन सब के बीच सरकार ने उनकी छुट्टी रद्द कर दी थी, जिसके चलते अनुराग पर विभागीय कार्रवाई कर उनकी चार महीनों की सैलरी रोक ली गई थी।

लखनऊ पुलिस ने झाड़ा पल्ला

लखनऊ पुलिस आईएएस की मौत के पहले दिन से ही मान कर बैठे थी कि, यह पूरा मामला सीबीआई के लिए जायेगा, इसलिए पुलिस द्धारा गठीत एसआईटी जांच के नाम पर महज खानापूर्ति कर रही थी, क्योंकि जांच की अवधि रविवार को खत्म हो जाने के बावजूद भी एसआईटी आईएएस की मौत की असल वजह नहीं खोज पाई थी।

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