टीबी के रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार की पहल, गोरखपुर बना नंबर वन जिला

पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत इस साल जनवरी से लेकर मार्च तक की पहली तिमाही में गोरखपुर जनपद पूरे यूपी में पहले स्थान पर है

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   17 July 2019 11:18 AM GMT

टीबी के रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार की पहल, गोरखपुर बना नंबर वन जिला

लखनऊ। पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत इस साल जनवरी से लेकर मार्च तक की पहली तिमाही में गोरखपुर जनपद पूरे यूपी में पहले स्थान पर है। जिले को 71.3 अंक हासिल हुए हैं। वहीं वाराणसी जनपद 71.2 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर जबकि 70.7 अंकों के साथ चंदौली जनपद तीसरे स्थान पर है। यह रैंकिंग हाल ही में कार्यक्रम के राज्य इकाई से सभी जिला इकाइयों के बीच जारी की गयी है। रैकिंग की यह परम्परा भी इसी साल से शुरू की गयी है ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़ा कर और बेहतर परिणाम दिये जा सकें।

जिला क्षय रोग अधिकारी डा. रामेश्वर मिश्र ने बताया," टीबी के नये मरीजों को खोजने के मामले में 30 में 24.6, उनके इलाज की सफलता दर में 15 में 13.5 अंक, कम समय में इलाज के लिए 15 में से 12.3 अंक, एचआईवी जांच के मामले में 10 में से 6.5 अंक, सीबीनैट जांच के मामले में 10 में से 4.7 अंक, कार्यक्रम पर खर्च के मामले में 10 में से 6 अंक जबकि लाभार्थियों को उनके खाते में पोषण धनराशि देने के मामले में 10 में से 3.7 अंक हासिल हुए हैं। ओवरआल प्रदर्शन में जनपद पहले स्थान पर है।"

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उन्होंने आगे बताया, "इन तीन महीनों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी के 1520 मरीज चिन्हित किए गए जबकि निजी चिकित्सालयों में 847 मरीज चिन्हित हुए। इन सभी का इलाज जारी है। एक अप्रैल 2018 से 10 जुलाई 2019 तक टीबी के कुल 13042 मरीज चिन्हित हुए हैं जिनमें से 7373 लोगों ने अपने बैंक डिटेल स्वास्थ्य विभाग को मुहैय्या कराये हैं और इन लोगों में से 5301 लोगों को पोषण के लिए प्रतिमाह दिये जाने वाली 500 रुपये की रकम इनके खाते में दी जा चुकी है।"

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गोरखपुर शहर के शाहपुर इलाके के धर्मपुर के रहने वाले अभिषेक मेवार बुखार की जांच करवाने नवम्बर 2018 में चरगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। यहां जांच में पता चला कि उन्हें टीबी है। सीनियर ट्रिटमेंट सुपरवाईजर मनीष तिवारी ने इलाज में उनकी मदद की। अभिषेक ने बताया, " मुझे सभी दवाइयां निशुल्क मिलीं और पोषक तत्वों से युक्त खानपान के लिए प्रत्येक महीने मेरे खाते में 500 रुपये भी आए। मई 2019 तक मैं स्वस्थ हो गया।"


वहीं हैदरगंज के रहने वाले रमेश चौहान (बदला नाम) को इसी साल जनवरी में पता चला कि उन्हें टीबी है। सीबीनैट जांच में यह बात सामने आई कि रमेश मास ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) कैटेगरी के रोगी है। उनका इलाज चल रहा है और प्रति माह उनके खाते में पोषण की रकम भी भेजी जा रही है।

क्षय रोग को जानिए

- प्रत्येक 10 में से 7 व्यक्ति इसके बैक्टेरिया से प्रभावित है। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने पर इन 7 में से कोई व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।

- बच्चों में टीबी की रोकथाम के लिये उनके पैदा होने के बाद अतिशीघ्र बीसीजी का टीका लगवाना आवश्यक है।

- टीबी का एक मरीज 10-15 लोगों को इसका बैक्टेरिया बांट सकता है।

- यह बीमारी टीबी मरीज के साथ बैठने से नहीं होती बल्कि उसके खांसी, छींक, खून व बलगम के संक्रमण से होती है।

- मुंह पर रूमाल रख कर, बलगम को राख या मिट्टी से डिस्पोज करके व सही समय पर टीबी की जांच व इलाज से हम इसे मात दे सकते हैं।

मरीज की सूचना देने पर भी प्रोत्साहन राशि

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. श्रीकांत तिवारी ने बताया, " पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कुछ शर्तों के अधीन गैर सरकारी व्यक्ति को क्षय रोग के मरीज की सूचना देने और क्षय रोग की पुष्टि हो जाने के बाद उसके खाते में 500 रूपये देने का प्रावधान है। जो प्राइवेट चिकित्सक ऐसे मरीजों का डेटा निक्षय पोर्टल पर अपडेट करवाते हैं, उन्हें भी 500 की प्रोत्साहन राशि उनके खाते में दी जाती है। सभी के सम्यक सहयोग से हम क्षय रोग का समूल खात्मा कर सकेंगे।"

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