यूपी एसटीएफ पर आरोप मामले में जांच एडीजी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई

यूपी एसटीएफ पर आरोप मामले में जांच एडीजी स्तर के अधिकारी को सौंपी गईSTF (LOGO) 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जिस एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) पर बड़े अपराधियों पर लगाम लगाने का जिम्मा था, आज उस पर ही मोटी रकम लेकर आतंकी को छोड़ने का आरोप लगा हैँ। पुलिस और एटीएस ने सारे आरोपों को निराधार बताया है।

मामला संज्ञान में आने पर आईजी एसटीएफ अमिताभ यश को सीएम योगी आदित्यनाथ ने पंचम तल पर तलब किया। जबकि अपने बचाव में आईजी ने इसे एक बड़ी साजिश बताया है। वहीं नाभा जेल से फरार आतंकियों के फोन को सुरक्षा एजेंसियों ने सर्विलांस पर रख रखा था। इसमें आईबी ने दो शख्सों का फोन टेप किया, जिसमें नाभा जेल से फरार आतंकी को छोड़ने के एवज में यूपी पुलिस के एक बड़े अधिकारी को मोटी रकम देने की बात चल रही थी। उधर इस पूरे रिश्वतखोरी के मामले का संज्ञान आने पर डीजीपी सुलखान सिंह ने पूरे प्रकरण की जांच का जिम्मा एडीजी (कानून-व्यवस्था) को सौंपा है।

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पंजाब की नाभा जेल ब्रेक के मास्टर माइंड गोपी घनश्यामपुरा को हिरासत से भगा देने का आरोप यूपी एसटीएफ पर लगा है। आरोप है कि गोपी घनश्यामपूरा को पिछले हफ्ते लखनऊ में ही गिरफ्तार किया गया था। घनश्याम की गिरफ्तारी की खबर हरजिंदर सिंह भुल्लर उर्फ विक्की ने 10 सितम्बर को अपने फ़ेसबुक पेज पर पोस्ट कर दी। हरजिंदर उन 6 आरोपियों में से 1 है जो नाभा जेल से फरार हुए थे। हरजिंदर की पोस्ट देखने के बाद पंजाब पुलिस ने यूपी के अफसरों से पूरे मामले की जानकारी मांगी तो अधिकारियों ने गिरफ्तारी की जानकारी से ही इनकार कर दिया। पंजाब पुलिस के मुताबिक, गोपी की आखिरी लोकेशन शाहजहांपुर जिले में मिली थी। जिसके बाद पंजाब पुलिस को जानकारी हुई कि यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स ने गोपी को गिरफ्तार करने के बाद 45 लाख लेकर उसे फरार करा दिया। इस पूरी डीलिंग की आडियो टेप पंजाब पुलिस ने यूपी सरकार को दे दिया है, जिसमें दो संदिग्धों के बीच धनश्याम को छोड़ने को लेकर रुपया लखीमपुर जनपद से मंगवाने की बात कही जा रही है, जिसका इंतज़ाम पंजाब के एक शराब कारोबारी से करने को कहा गया था।

पंजाब पुलिस के आईजी इंटेलिजेंस कुंवर विजय प्रताप सिंह ने यूपी के बड़े स्तर के अधिकारी का रिश्वत लेने में नाम आने पर मामले की जानकारी आईबी को दी। जिसके बाद पंजाब पुलिस और आईबी ने जानकारी यूपी के डीजीपी सुलखान सिंह को दी। साथ ही इस पूरे डील में सुल्तानपुर के कॉंग्रेस नेता और पीलीभीत के हरजिंदर कहलो, और अमनदीप का भी नाम सामने आया है। जिसके बाद नाभा जेल से फरार आरोपियों के इनपुट यूपी एटीएस को दी गई। 15 सितंबर को एटीएस ने इनपुट मिलने पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। इस गिरफ्तारी के बाद पंजाब की मीडिया में एक रिपोर्ट आई की घनश्यामपुरा को छोड़ने के लिए यूपी एसटीएफ के एक बड़े अधिकारी ने मोटी रकम ली और उसे फरार करा दिया।

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इस खबर से पंजाब से लेकर यूपी तक हंगामा मच गया। जिसका संज्ञान लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश को सीएम कार्यालय में तलब कर पूरे प्रकरण के विषय में स्पष्टीकरण मांगा। जबकि डीजीपी सुलखान सिंह ने बुधवार को मामले की जांच एडीजी (कानून-व्यवस्था) आनंद कुमार को सौंपी है। हालांकि अपने निजी कारणों से आनंद कुमार अवकाश पर हैं। वहीं इस मामले में यूपी एसटीएफ की ओर से एक स्पष्टीकरण जारी होते हुए कहा गया है कि, गोपी घनश्यामपुरा जो कि पंजाब पुलिस द्धारा नाभा जेल ब्रेक केस में वांछित है व जिस पर दो लाख रुपए का पुरस्कार घोषित है के संबंध में पंजाब के कुछ समाचार पत्रों में उक्त अपराधी के यूपी एसटीएफ द्धारा पकड़े जाने व घूस के बाद छोड़ दिए जाने के संबंध में कतिपय लेख प्रकाशित हुए हैं। पत्र में आगे कहा गया कि , यह पूरी खबर अपुष्ट सूत्रों के हवाले से समाचार पत्रों में दिया गया है। इस पूरे प्रकरण में यूपी एसटीएफ की किसी भी यूनिट द्धारा इस प्रकरण से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इंकार किया है। एसटीएफ ने कहा कि, न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही छोड़ दिया गया है। इस प्रकार के समाचार एसटीएफ की साख पर चोट पहुंचाने का काम करते हैं।

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