'सवर्णों को आरक्षण से हर साल मिलेगा सिर्फ 4 हजार 500 रोजगार'

Ranvijay SinghRanvijay Singh   9 Jan 2019 1:45 PM GMT

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सवर्णों को आरक्षण से हर साल मिलेगा सिर्फ 4 हजार 500 रोजगार

लखनऊ। सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण बिल संबंधी 124वां संविधान संशोधन लोकसभा में पास होने के बाद बुधवार को राज्‍यसभा में भी पास हो गया। राज्‍यसभा में बिल पर चर्चा करते हुए कांग्रेस के सांसद कपिल सिब्‍बल ने कहा, ''मोदी सरकार में पिछले पांच साल में 1.7 लाख रोजगार दिए गए। यानी 45 हजार रोजगार प्रति वर्ष। ऐसे में 10 प्रतिशत आरक्षण मिलने के बाद 4 हजार 500 रोजगार प्रति वर्ष मिलेगा। कमिल सिब्‍बल ने कहा, क्‍या आप सिर्फ 4 हजार 500 रोजगार के लिए इस बिल को लाएं हैं।''

कपिल सिब्‍बल ने कहा, ''मैं कुछ डाटा देना चाहता हूं। 2001 से 2018 तक, यानी 18 साल में 7.3 प्रतिशत रोजगार का सृजन हुआ। इसका मतलब हर साल 0.4 प्रतिशत रोजगार का सृजन हुआ। ऐसे में आप आर्थि‍क रूप से कमजोर लोगों को कौन सी जॉब देंगे, जब जॉब है ही नहीं।''

कपिल सिब्‍बल ने कहा, ''संविधान बदलने जा रहे हैं लेकिन सरकार तब भी इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना नहीं चाहती। सरकार के पास 5 साल थे, लेकिन क्यों जल्दी की जा रही है नहीं मालूम। क्या बिल लाने से पहले सरकार ने कोई डाटा तैयार किया। बिना किसी डाटा और रिपोर्ट के आप संविधान संशोधन करने जा रहे हो। एक तरफ 2.5 लाख कमाने वाले को इऩकम टैक्स देना पड़ता है और दूसरी ओर आप 8 लाख कमाने वाले को गरीब बता रहे हैं। आप इनकम टैक्स लिमिट को भी 8 लाख कर दीजिए।''

कपिल सिब्बल ने कहा कि ''जितनी नौकरियां पैदा नहीं हुई उससे कई ज्यादा नौकरियां चली गईं हैं। प्राइवेट और सरकारी दोनों ही क्षेत्र में नौकरियों की संख्या घटी है। देश का युवा आज नौकरी के लिए तरस रहा है और वो मौके उसे सिर्फ देश का विकास होने पर मिलेंगे।'' सिब्‍बल ने कहा, ''यह चर्चा आरक्षण के लिए है, लेकिन युवाओं को रोजगार चाहिए। लेकिन हमारा देश रोजगार नहीं सृजन कर रहा।''

कपिल सिब्बल ने कहा, ''आपके पास रोजगार नहीं है, लेकिन आप सबको आरक्षण दे रहे हैं रोजगार के लिए। इस बिल के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र के करीब 99 प्रतिशत परिवार इस दायरे में आएंगे। ऐसे में इसका हाल भी नोटबंदी की तरह होगा। यह एक और जुमला है।''

यह बिल सरकार का अपराधबोध दिखाता है: टीएमसी सांसद

टीएमसी सांसद डेरेक ओब्राईन ने कहा कि ''यह बिल युवाओं, गरीबों और आम आदमी को धोखा है। लेकिन हम लोग तो सांसद हैं अहमदाबाद के किसी जिम खाने के सदस्य नहीं, हमारे साथ भी धोखा हुआ है। सरकार ने संसद पर थूकने का काम किया है।'' उन्होंने कहा कि ''इस सरकार में कई विधेयकों को बगैर किसी कमेटी के पास भेजे पारित किया गया है। क्या यह बिल संसदीय और कानूनी नियमों पर खरा उतर पाएगा।''

डेरेक ओब्राईन ने कहा, ''यह बिल सरकार के अपराधबोध को दिखाती है कि वो साढ़े चार साल में रोजगार का सृजन नहीं कर पाए। साथ ही यह बिल भारत की गरीबी रेखा को नए तरीके से बता रहा है। आठ लाख सालाना का मतलब 2100 रुपए प्रति दिन होता है। ऐसे में अब 32 रुपए प्रति दिन से 2100 रुपए प्रतिदिन हो गया है।'' उन्होंने कहा कि जल्द ही देश में गठबंधन की सरकार होगी जिसमें कॉमन मिनमन प्रोग्राम के तहत काम होगा, अभी एक पार्टी की कन्फ्यूज सरकार चल रही है।

जब मैच क्‍लोज होता है तो छक्‍का लगता है

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पहले कांग्रेस ने क्यों अगड़ी जातियों को आरक्षण नहीं दिया, अब हम दे रहे हैं तो आप सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संविधान के मौलिक अधिकार में परिवर्तन है और यह केंद्र ही नहीं बल्कि राज्य सरकार की नौकरी में भी लागू होता है। उन्होंने कहा कि समर्थन करना है तो खुलकर करिए। प्रसाद ने कहा कि आज संसद इतिहास बना रही है और हम सब यहां बैठकर बड़ा बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में हिम्मत है कि वो गरीबों के हर वर्ग की चिंता करती है। बिल देरी से लाने के आरोपों पर कानून मंत्री ने कहा कि क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवरों में लगता है और यह पहला छक्का नहीं है अभी विकास और बदलाव के लिए अन्य छक्के भी आने वाले हैं।

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि सरकार यह बिल कभी भी ला सकती थी, लेकिन सरकार का लक्ष्य आर्थिक रूप से गरीब सवर्ण नहीं बल्कि 2019 का चुनाव है। अगर इनकी दिल में ईमानदारी होती तो 3-4 साल पहले यह बिल आ जाता। यादव ने कहा कि यह बिल सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ के खिलाफ है और कोर्ट इसे अपहोल्ड भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि नौकरियां हैं नहीं ऐसे में कुछ दिन बाद आरक्षण की बात भी बेमानी हो जाएगी। यादव ने कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि सरकार क्षेत्र में ठेके पर काम हो रहा है, नौकरियां लगातार घट रही हैं।

  

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