मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से पहले से था यूरिया संकट

मध्‍य प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई के लिए किसानों को यूरिया की जरूरत है। लेकिन यहां यूरिया की कमी की वजह से किसान परेशान हैं।

Ranvijay SinghRanvijay Singh   22 Dec 2018 8:47 AM GMT

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मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से पहले से था यूरिया संकट

लखनऊ। मध्‍य प्रदेश में इन दिनों यूरिया संकट पैदा हो गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि राज्‍य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद केंद्र द्वारा राज्‍य को यूरिया आपूर्ति नहीं की जा रही। लेकिन यूरिया का कमी राज्‍य में कांग्रेस की सराकर बनने से पहले ही हो गई थी। मध्‍य प्रदेश चुनाव से पहले होशंगाबाद के कलेक्टर ने 4 अक्टूबर को पहला पत्र भेजकर सरकार को इस कमी के बारे में जानकारी भी दी थी।

मध्‍य प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई के लिए किसानों को यूरिया की जरूरत है। लेकिन यहां यूरिया की कमी की वजह से किसान परेशान हैं। हालात को देखते हुए राज्‍य की नई सरकार भी हरकत में आ गई है। मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और यूरिया की उपलब्धता की समीक्षा की। इसके बाद उन्‍होंने कहा, ''रबी के सीजन में यूरिया के संकट को देखते हुए किसान भाइयों को यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए राज्य सरकार गंभीर है। आपूर्ति बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार से भी चर्चा की गई है। उम्मीद है स्थिति में सुधार होगा।''

सीएम ऑफिस से भी यूरिया की कमी को लेकर जानकारी दी कि नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (एनएफएल) और चम्बल फर्टिलाइजर अपने प्लांटों से मध्यप्रदेश को तेजी से यूरिया की आपूर्ति करेंगे। कई जिलों के रैक पॉइंट में जल्द ही हज़ारों मीट्रिक टन यूरिया पहुंच रहा है। इसके वितरण की व्यवस्था के संबंध में कलेक्टर्स को निर्देश दे दिये गये हैं।

हालांकि इन सब बातों के बीच सोशल मीडिया और अन्‍य माध्‍यमों से यह भी प्रसारित किया जाने लगा कि मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद केंद्र ने यूरिया देना बंद कर दिया है। यह बातें इतनी बढ़ गई कि केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा ने प्रेस कांफ्रेंस कर इन बातों का खंडन किया। उन्‍होंने कहा, ''उवर्रकों की किल्‍लत की कोई आशंका नहीं है। यूरिया सहित सभी उर्वरकों की समय पर उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्‍यों को उर्वरक विभाग की ओर से हरसंभव सहयोग मिलेगा।''

गौड़ा ने कहा, ''फिलहाल जारी रबी सीजन के दौरान देशभर में उर्वरकों की उपलब्‍धता की स्थिति संतोषजनक है। यूरिया के मामले में दिसंबर के दौरान 21.33 एलएमटी आवश्यकता की तुलना में फिलहाल देशभर में इसकी उपलब्‍धता 25.06 एलएमटी है। इसके अलावा विभिन्‍न संयंत्रों में यूरिया का उत्‍पादन लक्ष्‍य के अनुरूप है।''

केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा, ''स्‍वदेशी यूरिया के अलावा विभिन्‍न बंदरगाहों (पश्चिमी तट और पूर्वी तट) पर लगभग एक मिलियन टन आयातित यूरिया भी उपलब्‍ध है। उन्‍होंने बताया कि इसके अलावा दिसंबर 2018 और जनवरी 2019 में एक मिलियन टन से भी अधिक आयातित यूरिया पहुंचने की आशा है।''

गौड़ा ने कहा, ''कुछ राज्य इसे 'राजनीतिक मुद्दा' बना रहे हैं। वो केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि उनकी वितरण व्‍यवस्‍था उस लायक नहीं है। अगर उर्वरक की कोई कमी है, तो ऐसा उनकी वितरण अक्षमता के कारण है।''

बता दें, मध्‍य प्रदेश में यूरिया का संकट कांग्रेस की सरकार बनने से पहले भी बरकरार था। होशंगाबाद कलेक्टर ने 4 अक्टूबर को पहला पत्र भेजकर सरकार को यूरिया की कमी से अवगत कराया था। जानकारी के मुताबिक तब के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यूरिया की आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार से बात की थी। इसके बाद से लगातार कई जिलों के कलेक्‍टर सरकार को पत्र लिख चुके हैं।

भारत में सालाना 320 लाख टन यूरिया की खपत

भारत में खाद की कुल खपत में यूरिया की हिस्सेदारी 50 फीसदी के करीब है। फिलहाल सालाना 320 लाख टन रासायनिक यूरिया की खपत होती है। इसमें से लगभग 50 से 60 लाख टन यूरिया का आयात किया जाता है। केंद्र सरकार यूरिया के लिए इसी निर्भरता को खत्‍म करना चाहती है, जिसके तहत घरेलू यूरिया उत्‍पादन को बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    

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