तमिलनाडु की चीनी मिलों को चालू रखने के लिए शीरा भेज सकता है उत्तर प्रदेश  

तमिलनाडु की चीनी मिलों को चालू रखने के लिए शीरा भेज सकता है उत्तर प्रदेश  फाइल फोटो, चीनीमिल 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई का नया सत्र शुरू होने वाला है, इसी बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने तमिलनाडु की मिलों को चालू रखने के लिए उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से शीरा भेजने की संभावना तलाशने का फैसला किया है।

ये भी पढ़ें-किसानों को धीमी मौत मार रहे कीटनाशक, यवतमाल में 9 किसानों की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें शीरे की मात्रा बहुत अधिक बढ़ने से परेशान हैं। हालांकि, इस शीरे से तमिलनाडु की मिलों को मदद मिल सकती है जो राज्य में सूखे के कारण गन्ने की कमी से मुश्किल में हैं। इकनॉमिक टाईम्स के अनुसार, साउथ इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (SISMA) के प्रेसिडेंट पलानी जी पेरिसासामी ने हाल में ईटी को बताया था कि तमिलनाडु में सूखे की स्थिति के कारण 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) के सीजन के लिए गन्ने की उपलब्धता 20-25 पर्सेंट कम हुई है। इससे राज्य की शुगर इंडस्ट्री चिंतित है और इंडस्ट्री की कॉस्ट बढ़ सकती है।

सरकार ने हाल में तीन लाख टन कच्ची चीनी के इंपोर्ट की अनुमति थी और यह कदम विशेषतौर पर दक्षिण भारत की चीनी मिलों की मदद के लिए था। हालांकि तमिलनाडु की चुनिंदा मिलें ही वास्तव में इंपोर्ट करेंगी। बाकी मिलों ने इंपोर्ट न करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि 25 पर्सेंट की इंपोर्ट ड्यूटी और देश में चीनी के दामों में गिरावट के कारण इंपोर्ट करना फायदेमंद नहीं है।

ये भी पढ़ें-विशेष : बारिश के कारण भारत में 20 से 30 प्रतिशत महंगाई बढ़ने का अनुमान

उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन (UPSMA) के सेक्रेटरी जनरल दीपक गुप्ता ने बताया, 'हमारे टैंक अभी भी लगभग 40 पर्सेंट भरे हैं। अगले सीजन में हमें शीरे का लगभग 460 लाख क्विंटल उत्पादन होने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश की मिलें अपने शीरे के स्टॉक को जल्द निकालना चाहती हैं।' उधर, तमिलनाडु की चीनी मिलों की कच्ची चीनी को किफायती दाम पर उपलब्ध कराने की मांग पर ISMA ने नवंबर में समीक्षा करने का फैसला किया है।

ISMA ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए गुरुवार को मीटिंग की। ISMA की प्रेसिडेंट टी सरिता रेड्डी ने बताया, 'हमने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से शीरा तमिलनाडु भेजने की संभावना तलाशने का फैसला किया है।'

उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें बड़ी मात्रा में शीरा जमा होने की समस्या का सामना कर रही हैं। राज्य की चीनी मिलों को शीरे के उत्पादन का 20 पर्सेंट कंट्री लिकर मैन्युफैक्चरर्स के लिए रखना होता है। उत्तर प्रदेश में गन्ने का बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के कारण शीरे की मात्रा भी बढ़ी है। इस वजह से मिलों को शीरे को लेकर समस्या हो रही है। राज्य की चीनी मिलों ने उत्तर प्रदेश सरकार से शीरे की बिक्री पर लगी बंदिशें हटाने की मांग की थी, जिससे वे अपने टैंक खाली कर अगले सीजन के लिए पेराई का काम शुरू कर सकें। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल में ये बंदिशें हटाई हैं।

रेड्डी ने कहा, 'देश में चीनी की कीमतें गिरने की उम्मीद है क्योंकि अगले सीजन के उत्पादन 25-26 लाख टन के साथ अधिक रह सकता है। इस वजह से हम और इंपोर्ट करने के बारे में नवंबर में फैसला करेंगे।'

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Top