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उत्तर प्रदेश : किसानों पर फिर संकट के बादल, कई जिलों में बारिश न होने से खेतों में सूख रहा धान

उत्तर प्रदेश के किसान मौसम की बेरुखी से एक बार फिर मुश्किल में हैं। इस समय धान का सीजन चल रहा है लेकिन शुरुवात में अच्छी बारिश होने के बाद अब बारिश नहीं हो रही है। ऐसे में कई जिलों में अच्छी बारिश न होने से अब न सिर्फ किसानों की लागत बढ़ेगी, बल्कि उत्पादन पर भी ख़ासा असर दिखाई दे सकता है।

उत्तर प्रदेश : किसानों पर फिर संकट के बादल, कई जिलों में बारिश न होने से खेतों में सूख रहा धान

(बाराबंकी से वीरेंद्र सिंह, सीतापुर से मोहित शुक्ल, शाहजहांपुर से राम जी मिश्र और उन्नाव से सुमित यादव की रिपोर्ट)

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में धान के किसानों पर एक बार फिर संकट के बादल छा गए हैं। शुरुवात में अच्छी बारिश के बाद अगस्त और सितम्बर में मौसम ने एक बार फिर मुंह मोड़ लिया है। ऐसे में जहाँ किसानों के खेतों में लगे धान सूख रहे हैं, वहीं फसल में रोग लगने की संभावना भी बढ़ गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों की बात करें तो अभी तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई है। मगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत, बिजनौर, सहारनपुर, नोएडा, मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में मौसम विभाग के भविष्यवाणी की अपेक्षा 45 फीसदी कम बरसात दर्ज की गई है। ऐसे में बारिश न होने की वजह से न सिर्फ धान के किसानों की लागत बढ़ रही है, बल्कि इसका सीधा असर उत्पादन में भी पड़ेगा।

मानसून का अंतिम दौर चल रहा है और अब किसान अपनी फसल बचाने के लिए ट्यूबवेल, पोखरों और तालाबों से सिंचाई कर किसी तरह फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जो क्षेत्र पूरी तरह से बारिश पर निर्भर हैं, वहाँ के हालात बेहद खराब हो चले हैं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे जिले बाराबंकी में धान के किसान परेशान हैं। अगस्त के शुरुवाती दो हफ़्तों के बाद जिले में अब तक अच्छी बारिश न होने से इन किसानों को झटका लगा है।

बाराबंकी में बारिश न होने की वजह से अपनी खेत में निराश बैठा किसान। फोटो : गाँव कनेक्शन

बाराबंकी जिले के बेलहरा गाँव के किसान जितेंद्र सिंह 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "इस बार शुरुआती दिनों में अच्छी बरसात हो रही थी, इसलिए हमने अपने उन खेतों में भी धान की रोपाई कर दी थी, जिनमें हमेशा धान की खेती नहीं करता था, लेकिन जून-जुलाई तक तो अच्छी बरसात हुई, इसके बाद मौसम ने एकदम से रुख मोड़ लिया है।"

"अब हमें हर आठ दिन के बाद खेतों में पानी लगाना पड़ रहा है तो धान की खेती में लागत तो बढ़ ही रही है, साथ ही कई तरह के रोग भी सताने लगे हैं," जितेन्द्र बताते हैं।

बाराबंकी में कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मानसून के शुरुआती माह जून-जुलाई में ही अच्छी बरसात हुई है। जून में जिले में 98.40 एमएम बरसात की उम्मीद थी जिसके सापेक्ष 150.67 एमएम बरसात हुई। वहीं जुलाई में 299.70 एमएम बरसात होने की उम्मीद थी जिसके सापेक्ष 374.40 एमएम बरसात हुई। इसके अलावा अगस्त के शुरुआती दो हफ़्तों में भी अच्छी बरसात हुई। इस वर्ष अब तक 109.38 फ़ीसदी बरसात हो चुकी है, लेकिन अगस्त में ही मौसम ने मुंह मोड़ लिया है।

बाराबंकी से करीब 100 किलोमीटर दूर उन्नाव जिले में किसानों के सामने और भी गंभीर हालात हैं। उन्नाव में खरीफ की फसल का रकबा 2.11 लाख हेक्टेयर के लगभग है। इस बार इसमें धान का रकबा करीब 98 हजार हेक्टेयर है। जून में अच्छी बारिश होने से किसानों ने अपने खेतों में खूब धान लगाई। मगर जुलाई के महीने में जनपद के कुछ स्थानों पर छुटपुट छोड़ कर अन्य कहीं बारिश नहीं हुई। यहाँ अब तक 105 मिलीमीटर बारिश ही हो पाई है। अगस्त और सितंबर में तो मानसून ने किसानों को पूरी तरह ही निराश किया है।

इसका सीधा असर धान की खेती कर रहे किसानों पर पड़ा है। जिले के करीब 62 प्रतिशत खेतों में पानी नहीं है। एक सप्ताह के भीतर बारिश नहीं होती है तो फसलें सूखने के कगार पर हैं।

कई किसानों की धान की फसल में लगे रोग । फोटो : गाँव कनेक्शन

उन्नाव के धान के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल बिछियां ब्लॉक के नौगवां गाँव के रहने वाले युवा किसान अनुज 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार अच्छी बारिश के आसार थे। इसलिए हमने ढाई एकड़ धान लगवाए थे, लेकिन अब तो बारिश न होने से खेतों में दरारें पड़ रही हैं, और तो और दीमक का असर भी होने लगा है।"

"ऐसे में पौधे सूख रहे हैं, धान लगने के बाद खेतों में पानी न होने से बियास भी ठीक नहीं आया है और कई तरह के रोग भी असर दिखाने लगे हैं, अगर ऐसे ही हालात रहे तो ट्यूबवेल के सहारे धान पैदा कर पाना मुश्किल होगा," अनुज बताते हैं।

बारिश न होने की वजह से धान के किसानों के सामने आईं मुश्किलों को लेकर उन्नाव के जिला कृषि अधिकारी केके दीक्षित बताते हैं, "इस साल अभी तक उम्मीद से कम बारिश हुई है, बारिश का असर हर फसल में है, लेकिन खासकर धान पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। जनपद में बड़ी तादाद में धान की खेती होती हैं अगर बारिश कम होती है तो इसका आकलन करने का काम किया जाएगा। फिलहाल सिंचाई विभाग से नहरों में समुचित पानी छोड़े जाने को लेकर बात की जा रही है जिससे किसान इन हालातों से निपट सकें।"

बाराबंकी और उन्नाव जैसा हाल सीतापुर में भी किसानों के सामने नजर आते हैं। बारिश न होने की वजह से और किसानों की तरह ramराम प्रसाद त्रिवेदी भी परेशान हैं। मौसम की भविष्यवाणी से उम्मीद लगाये राम प्रसाद ने भी इस बार धान की खेती की थी, मगर अब तक उनके खेत में धान की बालियाँ भी नहीं निकली हैं।

सीतापुर के महोली ब्लॉक के रोहिल्ला गांव के रहने वाले किसान राम प्रसाद त्रिवेदी 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "शुरुआती दिनों में बरसात अच्छी होने से उम्मीद थी कि अबकी बार फसल अच्छी होगी, लेकिन अब तो धान में कोई ब्यास नहीं हो रहा है ना ही बालियाँ निकल रही हैं।"

राम प्रसाद कहते हैं, "नीचे से पानी लगाने पर उतना अच्छा फायदा नहीं देता है जितना कुदरती पानी गिरने पर फसल को फायदा पहुंचता है, अब हमारे धान की फसल में आधे से भी कम उत्पादन रह जाएगा।"


इसी ब्लॉक के एक और किसान मोतीलाल श्रीवास्तव बताते हैं, "इस बार कुदरत ने हम सब पर दोहरा कहर ढा रहे हैं, एक तो कोरोना की वजह से आर्थिक तंगी थी, दूसरे खेतों में तैयार फसल में जरूरत भर पानी ना होने के कारण फसल बर्बाद हो रही है, अब तो यह सोच-सोच कर ही दिल बैठने लगता है कि आगे हमारा और हमारे बच्चों का क्या होगा?"

सीतापुर से करीब 100 किलोमीटर दूर शाहजहांपुर जिले में भी किसान बारिश की उम्मीद लगाये बैठे हैं। शाहजहांपुर के शानू बड़े पैमाने पर धान की खेती करते आ रहे हैं, मगर बारिश न होने की वजह से उनके सामने भी अपनी फसल बचाने की समस्या खड़ी हो गई है।

शाहजहांपुर जिले के तिलहर तहसील में आने वाले कसरक गांव के रहने वाले किसान शानू 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "हम सब लोग घर में रखे गेहूं बेच-बेच कर इस बार धान की फसल में लगाए हैं। डीजल इतना महंगा है कि जल्दी-जल्दी सिंचाई करने में भी बहुत खर्च आता है।"

"लॉकडाउन के पहले घर के कोई ना कोई सदस्य बाहर शहरों में काम करते थे जिससे कुछ पैसा आ जाता था और खेती में लग जाता था लेकिन इस बार बाहर से एक रुपये की आमदनी नहीं हो रही है। घर में जो अनाज रखा है उसे ही बेच कर खेतों में लगाना हो रहा है और अगर इसी तरह आगे एक-दो सप्ताह बरसात नहीं हुई तो हम किसान बर्बाद हो जाएंगे," शानू आगे कहते हैं।

फिलहाल धान किसानों के सामने मौसम की बेरुखी ने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अगर जल्द ही अच्छी बारिश नहीं होती है तो धान की फसलों पर ख़ासा असर देखने को मिलेगा।

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