क्‍या गड्ढा मुक्‍त हो सकेंगी उत्‍तर प्रदेश की सड़कें?

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने ग्रामीण इलाकों की सड़कों की स्थिति पर नाराजगी जताई है और ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि ग्रामीण सड़कें पूरी तरह दुरुस्त की जाएं।

Ranvijay SinghRanvijay Singh   18 Oct 2019 12:39 PM GMT

क्‍या गड्ढा मुक्‍त हो सकेंगी उत्‍तर प्रदेश की सड़कें?

''हमारे गांव से बाजार की दूरी 8 किलोमीटर है, लेकिन मोटरसाइकिल से भी इस दूरी को तय करने में करीब 40 मिनट से एक घंटा लग जाता है। क्‍योंकि रास्‍ता इतना खराब है कि इसपर साइकिल की रफ्तार से गाड़ी चलानी पड़ती है।'' यह बात बाराबंकी जिले के बेलहरा गांव के रहने वाले राजकुमार सिंह (45 साल) कहते हैं।

राजकुमार जिस सड़क की बात कर रहे हैं वो उनके गांव से मोहम्‍मदपुर खाला तक की सड़क है। आठ किलोमीटर की यह सड़क कई महीनों से बदहाल पड़ी हुई है। ऐसे में गांव वाले इसी टूटी फूटी सड़क का इस्‍तेमाल करने को मजबूर हैं।

ऐसा नहीं कि यह कहानी उत्‍तर प्रदेश के सिर्फ एक गांव की है। कुछ ऐसी ही कहानी प्रदेश के अलग-अलग गांव से अक्‍सर सामने आती रहती हैं। सड़कों की इसी बदहाली पर हाल ही में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने नाराजगी भी जाहिर की थी। उन्‍होंने राजधानी लखनऊ के लोकभवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान ग्रामीण इलाकों की सड़कों की स्थिति पर नाराजगी जताई और ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि ग्रामीण सड़कें पूरी तरह दुरुस्त की जाएं। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने यह भी कहा कि ''प्रदेश के समस्त मार्ग 15 नवंबर तक गड्ढा मुक्त कर दिए जाएं।''

उत्‍तर प्रदेश में गड्ढा मुक्‍त सड़कों की बात नई नहीं है। साल 2017 में प्रदेश में योगी सरकार बनने के तुरंत बाद दूसरी कैबिनेट बैठक में ही सड़कों को गड्ढा मुक्‍त करने की बात हुई थी। अप्रैल 2017 के दूसरे हफ्ते में हुई इस कैबिनेट बैठक में यह तय हुआ था कि 15 जून 2017 तक प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त कर दिया जाएगा। इसके बाद 15 जून को यूपी के डिप्टी सीएम और PWD मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की थी और यह बताया कि प्रदेश की 63 फीसदी सड़कों को गड्ढा मुक्त कर दिया गया है।

केशव प्रसाद मौर्य ने जो आंकड़े दिए उसके मुताबिक, प्रदेश की कुल 1,21,034 किलोमीटर सड़कों को गड्ढायुक्त की श्रेणी में रखा गया था, जिसमें से 76,356 किलोमीटर सड़कों के गड्ढे भर दिए गए। यानि करीब 63% सड़कों को गड्ढा मुक्त कर दिया गया था।

उत्‍तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की एक सड़क। उत्‍तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की एक सड़क।

डिप्टी सीएम के इस ऐलान के बाद गांव कनेक्‍शन ने 10 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की पड़ताल की थी, जिसमें सामने आया था कि ज्‍यादातर सड़कों का हाल बुरा था। इसी पड़ताल के दौरान कन्नौज से 25 किमी दूर सिरसा गांव के रहने वाले संजीव कुमार (40 साल) ने बताया था, ''शहरों में सड़कें भले ही चमाचम हो गई हों, गांव की सड़कों की हालत आज भी खराब है। हम लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती थी। इसलिए मिट्टी डालकर गांव वालों ने सड़क बराबर की है। अभी तक गांव में कोई देखने नहीं आया।'' उस वक्‍त कुछ ऐसा ही हाल 10 जिलों के अलग-अलग गांव से सामने आया था।

अब एक बार फिर प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्‍त करने की बात चली है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्‍या यूपी की सड़कें इस बार गड्ढा मुक्‍त हो पाएंगी? इस सवाल को लेकर गांव कनेक्‍शन ने अलग-अलग जिलों के लोगों से बात की। इसी कड़ी में संतकबीर नगर के एक प्राइमरी स्‍कूल के अध्‍यापक वैभव श्रीवास्‍तव से बात हुई। वैभव बताते हैं, ''मेरा प्राइमरी स्‍कूल बयारा गांव में पड़ता है। इस स्‍कूल तक जाने के लिए एक सड़क लखनऊ-गोरखपुर हाइवे से कटती है। यह सड़क करीब 5 किलोमीटर की है, लेकिन यह 5 किलोमीटर का सफर बहुत ही खराब है। सड़क बुरी तरह से उजड़ी और ऊबड़-खाबड़ है। इसी वजह से कोई सवारी गाड़ी भी इस रोड पर नहीं चलती है। बरसात के दिनों में तो हालत और खराब हो जाती है।''

वैभव बताते हैं, ''यह सड़क 2009 में बनी थी, उसके बाद से इसपर कोई काम नहीं हुआ है। 2017 में नई सरकार बनने के बाद गड्ढा मुक्‍त सड़क की बात हुई थी। उस वक्‍त 'मेरी सड़क' एप्‍प पर मैंने तस्‍वीर खींच कर भेजी भी, लेकिन यह सड़क नहीं बनी। अब तो लगता है कि यह सड़क बन ही नहीं सकती है।''

कुछ ऐसा ही हाल बरेली जिले के नगरिया कला गांव को जाने वाली सड़क का भी है। शेरगढ़ कस्‍बे से नगरिया कला गांव को जाने वाली करीब 5 किमी लंबी सड़क का बुरा हाल है। यह जगह-जगह से टूट गई है। गांव के रहने वाले नेत्रपाल सिंह बताते हैं, ''इस सड़क में इतने गड्ढे हैं कि इसको भरने में महीने लग जाएंगे। हमने प्रधान से लेकर बीडीओ तक को यह बात बताई है, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं होती। सड़क खराब से बदतर होती जा रही है और कोई ध्‍यान नहीं दे रहा है।''

पीलीभीत से बस्‍ती को जोड़ने वाला हाईवे। पीलीभीत से बस्‍ती को जोड़ने वाला हाईवे।

सीतापुर के रतौली गांव की सड़क का हाल भी बरेली के नगरिया कला गांव सा ही है। गांव की रहने वाली 65 साल की चंपा देवी कहती हैं, ''सड़क तो कबसे खराब है अब याद भी नहीं है। हम इसी टूटी हुई सड़क पर आते-जाते हैं।'' चंपा देवी सड़क को लेकर अपनी भवानाएं व्‍यक्‍त करते हुए कहती हैं, मेरी आखिरी इच्‍छा है कि मेरे गांव की सड़क सुधर जाए, लेकिन अभी यह होते नहीं दिख रहा है। अगर प्रधान चाह दे तो यह सड़क बन सकती है, पर पता नहीं वो क्‍यों नहीं बना रहे हैं।''

यह तो बात हुई गांव के अंदर की सड़कों की। अगर इन गांवों तक पहुंचने वाले हाईवे की बात करें तो वो भी अच्‍छी हालत में नहीं हैं। पीलीभीत से बस्‍ती को जोड़ने वाले हाईवे का भी बुरा हाल है। इस सड़क पर ट्रक चलाने वाले एक ड्राइवर जिनका नाम लालमन है वो बताते हैं, ''यह बहुत ही बेकार सड़क है। इस पर जल्‍दी ही टायर खराब हो जाते हैं। टायर कब पंचर हो जाए इसका कुछ पता नहीं है।''

ठीक ऐसे ही बरेली में फेतहगंज पश्‍चिमी से बेहड़ी तक जाने वाले 44 किलोमीटर लंबे मार्ग का हाल है। शेरगढ़ कस्‍बे में यह सड़क बुरी तरह टूट गई है। इस सड़क पर नाली का पानी बहता रहता है, जिससे आने जाने वाले लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहीं के रहने वाले सचिन गंगवार (26 साल) बताते हैं, ''कई बार इस सड़क को लेकर शिकायत की गई, लेकिन यह बनी ही नहीं। पिछली बार जब गड्ढा मुक्‍त की बात की गई थी तो लगा था यह सड़क भी बन जाएगी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। आशा है इस बार यह सड़क बन जाएगी। इससे बहुत से लोगों को फायदा होगा।''

इनपुट- बाराबंकी से व‍ीरेंद्र स‍िंंह

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