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उत्तर प्रदेश : क्या है कोरोना किट घोटाला, जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में एक तरफ हर दिन जहाँ कोरोना संक्रमण के हजारों नए मामले सामने आ रहे हैं, दूसरी ओर गाँव-गाँव जांच के लिए महंगे दामों में खरीदी गई कोरोना किट का घोटाला सामने आने के बाद प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर सवालिया निशान उठ रहे हैं।

Kushal MishraKushal Mishra   14 Sep 2020 11:48 AM GMT

coronavirus, IMAकेंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा था कि उनके पास कोरोना से संक्रमित होने वाले या जान गंवाने वाले डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों के आंकड़े नहीं हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से अब तक जहाँ तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और चार हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, तो दूसरी ओर प्रदेश के कई जिलों में कोरोना किट घोटाला का मामला सामने आया है।

इस घोटाले में गाँव-गाँव कोरोना की जांच के लिए ख़रीदे गए ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर को कई जिलों में तय कीमत से कई गुना अधिक दामों में खरीदने के आरोप लगाए गए हैं। इस कोविड-19 जांच किट खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप खुद सुल्तानपुर जिले में भाजपा के विधायक देवमणि द्विवेदी ने लगाये हैं और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की है।

इस प्रकरण के सामने आने के बाद फिलहाल सुल्तानपुर और गाजीपुर के जिला पंचायत अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले की जांच विशेष जांच समिति यानी एसआईटी को सौंप दी गई है। एसआईटी टीम की प्रमुख वरिष्ठ आईएएस रेणुका कुमार 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी।


क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गांवों में घर-घर सर्वे के तहत कोरोना की जांच के लिए सभी जिलों की ग्राम पंचायतों को ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर खरीदने के आदेश दिए गए थे। थर्मल स्कैनर से जहाँ स्वास्थ्य कर्मचारी बुखार चेक करते हैं तो ऑक्सीमीटर से नब्ज और ऑक्सीजन लेवल चेक किया जाता है।

आरोप लगाया गया है कि सुल्तानपुर जिले में इन दोनों ही उपकरणों की खरीद के लिए कोई ई-टेंडर नहीं निकला गया और मनमाने ढंग से कंपनी को सप्लाई करने का ठेका दे दिया गया। इन दोनों कोरोना उपकरणों को पंचायत स्तर पर सुल्तानपुर में 9,950 रुपये में ख़रीदा गया, जबकि सरकार ने 2,800 रुपये कीमत तय की थी।

सुल्तानपुर के अलावा प्रतापगढ़, बिजनौर, झाँसी, उन्नाव, सहारनपुर और गाजीपुर फिलहाल सात जिलों में दोनों कोरोना उपकरण चार से पांच गुना अधिक दामों में ख़रीदे जाने के आरोप लगाये गए हैं।

विपक्ष के निशाने पर सरकार

भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद प्रदेश की भाजपा सरकार अब विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस घोटाले को लेकर लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाये।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में घोटाले को लेकर जम कर किया हंगामा

आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद संजय सिंह ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, "योगी जी कृपया ध्यान दें, ऑनलाइन ख़रीदने पर भी आक्सीमीटर की क़ीमत 800 रु, थर्मल स्कैनर की क़ीमत 1800 रु है तो डीएम सुल्तानपुर ने 9950 रु में कोविड सर्वे किट क्यों ख़रीदा? किसने कितनी दलाली खाई? कोरोना के नाम पर भ्रष्टाचार शमसान में दलाली की समान है।"

संजय सिंह ने ट्वीट किया, "यह असंभव है कि योगी जी रोज़ाना 11 बजे अपने टीम 11 की बैठक कर रहे हों और उन्हें थर्मामीटर-ऑक्सीमीटर आदि के रेट ना बताए गए हों। उन्हें इस महामारी के दौरान हुई तमाम खरीदारियों का पता ना हो, योगी सरकार ने कोरोना के नाम पर महा घोटाला किया है।"

दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कोरोना किट घोटाले को लेकर प्रदेश की योगी सरकार पर तंज कसा है। प्रियंका गाँधी ने ट्वीट कर कहा, "न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कोरोना किट खरीदी में घोटाला हुआ है। क्या पंचायत चुनावों के साल में जिले-जिले वसूली केंद्र बना दिए गए हैं? पीपीई किट घोटाला, 69K घोटाला, बिजली घोटाला। पहले घोटाला फिर सख्ती का नाटक और फिर घोटाला दबाना। अजीब दास्तां है ये, कहां शुरू कहां खत्म।"

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। संजय सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "उत्तर प्रदेश में यह घोटाला सिर्फ कुछ ग्राम पंचायतों या कुछ जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 65 जिलों का घोटाला है और 65 से ज्यादा जिलों में भी यह घोटाला हो सकता है। इसमें सिर्फ गाँव या जिला स्तर के अधिकारी शामिल नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबी हुई है।"

'2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला'

'गाँव कनेक्शन' से बातचीत में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वैभव महेश्वरी बताते हैं, "शुरुवात में हमें लगा कि यह सिर्फ सुल्तानपुर तक सीमित है, मगर धीरे-धीरे और जिले भी सामने आये जहाँ कोरोना जांच किट के उपकरण पंचायत स्तर पर महंगे दामों में ख़रीदे गए। हमें जो दस्तावेज मिले हैं उसमें कम से कम उत्तर प्रदेश के 65 जिलों में यह घोटाला किया गया है और प्रदेश के एक लाख से ज्यादा गांवों में कोरोना जांच के नाम पर यह घोटाला करीब 2,000 करोड़ रुपये का है।"

अब तक दो जिला पंचायत अधिकारी निलंबित करने और एसआईटी को जांच दिए जाने के सवाल पर वैभव कहते हैं, "इसमें प्रदेश के अधिकारियों की ही मिलीभगत है। जिस टीम 11 के साथ मुख्यमंत्री हर दिन मीटिंग करते हैं, बिना उनकी मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला नहीं हो सकता। इसलिए एसआईटी क्या जांच पाएगी, सबसे पहले सरकार को एफआईआर करनी चाहिए थी, जो अभी तक नहीं की गई, हम चाहते हैं कि इस घोटाले की जांच सीबीआई से करायी जाए। हर रोज आम आदमी इस महामारी से मर रहा है, ऐसे समय में इस तरह का भ्रष्टाचार सरकार कर रही है।"

'भ्रष्टाचार में लिप्त कोई अधिकारी बख्शा नहीं जाएगा'

दूसरी ओर इस घोटाले के सामने आने के बाद सरकार पर उठ रहे सवालों पर उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रवक्ता हरीश चन्द्र श्रीवास्तव 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "सरकार ने जांच एसआईटी टीम का गठन किया है जो 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, एक बार रिपोर्ट सामने आने के बाद खुद-ब-खुद सच सामने आ जाएगा। कोई भी बड़े से बड़े अधिकारी हो या फिर छोटे से छोटा कर्मचारी, अगर दोषी पाया जाएगा तो निश्चित रूप से हमारी सरकार सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी। योगी सरकार शुरू से भ्रष्टाचार के खिलाफ है, इसमें कोई संदेह नहीं है, भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।"

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