उत्तराखंड: 2800 लोग डेंगू की चपेट में, चार की मौत

उत्तराखंड में डेंगू : देहरादून के अलावा नैनीताल, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी में डेंगू का असर ज्यादा है। डेंगू के मरीजों की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   16 Sep 2019 11:58 AM GMT

उत्तराखंड: 2800 लोग डेंगू की चपेट में, चार की मौत

उत्तराखंड के कई जिले इस समय डेंगू की चपेट में हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश भर में इस समय 28,00 लोग डेंगू की चपेट में है जबकि इससे चार लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। देहरादून के अलावा नैनीताल, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी में डेंगू का असर ज्यादा है। डेंगू के मरीजों की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।

उत्तराखंड के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरके पांडेय ने गाँव कनेक्शन को बताया, "इस बार डेंगू फैलाने वाले वायरस ने स्ट्रेन बदला है। इस कारण हमारा इम्यून सिस्टम इससे लड़ पाने में सक्षम नहीं है। यही कारण है कि डेंगू और तेजी से फैला और कई गुना ज्यादा संख्या में मरीज सामने आए हैं। इस बार कम बारिश और उस पर तेज धूप में लार्वा बहुत ज्यादा पनप गया। एडीज मच्छर की आबादी बढ़ने से डेंगू का प्रकोप बढ़ा है। डेंगू की रोकथाम व बचाव के लिए पुख्ता तैयारियां की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग, नगर-निगम और अन्य विभागों की संयुक्त टीमें प्रभावित इलाकों में व्यापक स्तर पर डेंगू नियंत्रण अभियान चला रही हैं। "

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वहीं राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉक्टर केके कामता ने कहते हैं, "डेंगू बरसात के मौसम और जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है। इस मौसम में डेंगू वाले मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। इस बार डेंगू का स्ट्रेन वन सीरोटाइप वायरस फैला हुआ है। यह वायरस लोगों को अपनी चपेट में लेता है। इस बार प्रदेश में कम बारिश हुई है, जिसकी वजह से लार्वा बहुत ज्यादा पनप गया है। "


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डेंगू बुखार से पीड़ित देहरादून निवासी कुलदीप व्यास ने गाँव कनेक्शन को बताया, "डेंगू से पीडित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। देहरादून में हर साल डेंगू की बीमारी फैलती है, लेकिन इस बार स्थिति बहुत ही विकराल हो गई है। देहरादुन का जो निचला हिस्सा है वहां सबसे ज्यादा डेंगू के मरीज मिले हैं। यहां जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कुछ जगहों पर जलभराव की भी स्थिति है।"


हल्द्वानी निवासी केसी कसौधन (32वर्ष) ने गाँव कनेक्शन को बताया, "पूरे प्रदेश में डेंगू से हाहाकार मचा हुआ है। सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में मरीजों का तांता लगा हुआ है। कई जगहों पर स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं। मेरे बच्चों का भी स्कूल बंद हो गया है। मेरे पड़ोसी के बच्चे को भी डेंगू बुखार हो गया है। करीब एक सप्ताह से अस्पताल में एडमिट है। "

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यह मच्छर अक्सर रोशनी में ही काटते हैं। डेंगू के मच्छर दिन में खासकर सुबह के वक्त काटते हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता। इंसान के घुटने के नीचे तक ही पहुंच होती है। इसलिए शरीर को पूरा ढकने वाले कपड़े पहनें ताकि मच्छर से बच सके।


डेंगू से डरने की जरूरत नहीं है। इसकी जल्द पहचान कर उपचार कराने की अपील की। डेंगू के मरीजों को पानी और ओआरएस का घोल ज्यादा से ज्यादा पिलाना चाहिए। खतरे के लक्षण होने पर मरीज को तुरंत भर्ती कर ड्रिप के माध्यम से ठीक किया जाता है। बुखार को कम करने के लिए पैरासिटामोल लेना चाहिए। " दीपक आचार्य ने आगे बताया।

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मच्छर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी डॉक्टर सुभाष जोशी ने बताया, "लोगों की थोड़ी सी लापरवाही के कारण डेंगू का प्रकोप फैल रहा है। मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए मलेरिया विभाग की ओर से जागरुकता अभियान चलाया गया था, लेकिन लोगों पर कुछ असर नहीं पड़ता है। डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। ऐसे में कूलर में, गमलों में बर्तनों में इकट्ठे पानी में ये आसानी से लार्वा मिल जाते हैं। इसके बावजूद भी लोग डेंगू की रोकथाम के प्रति गंभीर नहीं हो रहे हैं। हमने कई जगहों पर पानी चेक कराएं जहां डेंगू के लारवां मिले। "


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