महामारी में ग्रामीणों की मदद करना चाहते हैं? कदम बढ़ाने के लिए रूरल रिस्पांस ट्रैकर है अच्छी पहल

रूरल रिस्पॉन्स ट्रैकर एक सत्यापित डायरेक्टरी है, जिसमें चिकित्सा संबंधी मदद, भोजन, टीकाकरण, मानसिक स्वास्थ्य और अंतिम संस्कार जैसी सेवाओं के राज्य-वार और श्रेणी-वार विवरण को शामिल किया गया है।

Nidhi JamwalNidhi Jamwal   11 May 2021 1:05 PM GMT

महामारी में ग्रामीणों की मदद करना चाहते हैं? कदम बढ़ाने के लिए रूरल रिस्पांस ट्रैकर है अच्छी पहल

रूरल रिस्पांस ट्रैकर में राज्य के हिसाब से जानकारी उपलब्ध है। 

अरविंद चिरानिया और अमित श्रीवास्तव स्कूल में सबसे अच्छे दोस्त थे। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में चार साल तक स्कूल में एक-साथ पढ़े। इस दौरान वे एक ही बेंच पर साथ-साथ बैठे, अपनी टिफिन और क्लास के नोट्स शेयर किए, साथ खेले और स्कूल प्रोजेक्ट के लिए मॉडल भी साथ में ही तैयार किए।

42 वर्षीय अरविंद चिरानिया, अब कर्नाटक के बेंगलुरु में रहते हैं। पिछले महीने उन्होंने अपने बचपन के दोस्त अमित श्रीवास्तव को कोविड की वजह से खो दिया, जो हरियाणा के गुड़गांव में रहते थे।

चिरानिया ने गाँव कनेक्शन को बताया, "मेरे लिए यह एक सदमा था। एक बचपन का दोस्त, जो मेरी उम्र का है, एक वायरस की वजह से अब नहीं है। इस महामारी ने हम में से हर किसी को किसी न किसी तरह से प्रभावित किया है। अमित की मौत ने मुझे इस कठिन समय में दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित किया है।"

आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र और यूएसए से पीएचडी होल्डर चिरानिया अब ग्रामीण इलाकों में मदद देने के लिए हर दिन कुछ घंटे बिताते हैं। वे लॉजिस्टिक्स और आपरेशनल रिसर्च के विशेषज्ञ है और "रूरल रिस्पॉन्स ट्रैकर" के 102 स्वयंसेवकों में से एक हैं। रूरल रिस्पॉन्स ट्रैकर एक वॉलंटरी ऑर्गेनाइजेशन "आगामी" की वेरीफाई डायरेक्टर है, जो ग्रामीणों की महामारी के दौरान मदद करती है, जैसे ऑक्सीजन की आपूर्ति करना, बना हुआ भोजन उपलब्ध कराना, टीकाकरण की जानकारी या वित्तीय सहायता करना हो।

रूरल रिस्पांस ट्रैकर गैर-लाभकारी, स्वैच्छिक संगठनों और व्यक्तियों की एक सत्यापित निर्देशिका है, जो महामारी के दौरान गाँवों में रहने वालों की मदद करेगा।

इस नई पहल के पीछे "आगामी" का दिमाग है, जो बेंगलुरु के वकीलों का एक ग्रुप है। अगामी के सह-संस्थापक सचिन मल्हान ने गांव कनेक्शन को बताया, "हम ऐसे वकील हैं जो अध्ययन करते हैं कि आम नागरिक कानून और न्याय की मौजूदा प्रणाली से कैसे संबंधित हैं। हम कानून और न्याय की प्रणालियों में नई पद्धति और बदलाव को आवश्यक रूप से कैसे ला सकते हैं।"

मल्हान ने आगे कहा, "कोविड-19 ने हम सभी को बुरी तरह प्रभावित किया है। एक पखवाड़े पहले हमने दो से तीन सप्ताह के लिए थोड़ा रुकने का फैसला किया और ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों की मदद के लिए जमीनी स्तर पर संपर्क की अपनी ताकत का उपयोग महामारी के दौरान किया।"

"अगामी में हमारा मुख्य काम प्रमुख स्थानों की पहचान करने के लिए हमारे नेटवर्क का उपयोग करना है, और यही हम रूरल रिस्पॉन्स ट्रैकर के माध्यम से करने की कोशिश कर रहे हैं, जो 240 से अधिक ग्रामीण कार्यों की एक सत्यापित डायरेक्टर है, जो सक्रिय भी हैं।"

जैसा कि नाम से पता चलता है, रूरल रेस्पॉन्स ट्रैकर (https://ruralindia.help/) एक स्वयंसेवक के नेतृत्व वाला प्रयास है, जो मौजूदा कोविड-19 से जुड़ी सार्वजनिक सूचना, सर्वे, फोन कॉल और कई स्थानीय प्रतिक्रियाओं का उपयोग करता है। इसका उद्देश्य किसी को भी सशक्त बनाना है, खासकर उनका, जो शहरों में हैं और कोविड से जुड़ी ग्रामीण प्रतिक्रियाओं का समर्थन करते हैं।

रूरल रिस्पांस ट्रैकर में राज्यवार और श्रेणी-वार दोनों प्रकार के कार्यक्रमों का विवरण मौजूद हैं। विभिन्न श्रेणियों में चिकित्सा आपूर्ति, भोजन, बिस्तर, आजीविका, टीकाकरण, मानसिक स्वास्थ्य और अंतिम संस्कार सेवाएं शामिल हैं।

राज्यों की श्रेणी के तहत एक विशेष क्षेत्र में विभिन्न ग्रामीण मदद के विवरण सूचीबद्ध हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में 23 कार्यक्रम हैं। नोएडा में राइट टू वॉक फाउंडेशन (यूपी के 11 जिलों में उपस्थिति के साथ) 100 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और पूर्व-निर्मित राशन किटों की खरीद करना चाहता है। जो कोई भी इस फाउंडेशन को दान या मदद करना चाहता है, वह कर सकता है। इसके लिए इसके कॉन्टेक्ट नंबर और गूगल मैप दोनों दिए गए हैं।

मल्हान ने बताया, " रूरल रिस्पांस ट्रैकर के हमारे स्वयंसेवक वेबसाइट पर विवरण डालने से पहले इन संगठनों / व्यक्तियों का बैकग्राउंड चेक करते हैं, फोन करके पता लगाकर सत्यापित करते हैं।" उन्होंने आगे बताया, "जो लोग ग्रामीण भारत में लोगों की मदद करने के इच्छुक हैं, वे ट्रैकर को देख सकते हैं और उनसे क्या अपील की जाती है कि वे संपर्क नंबरों पर कॉल कर सकते हैं और खुद को सत्यापित कर सकते हैं।"

बेंगलुरु स्थित क्विनबे के सीओओ एनएस सेकर और उनकी 15 वर्षीय बेटी एनएस प्रज्ञा राजलक्ष्मी हर दिन वेरिफाइड लीड ढूंढने में कई घंटे बिताते हैं।

बेंगलुरु स्थित क्विनबे के सीओओ (चीफ ऑपरेशन ऑफिसर) एन. एस. सेकर और उनकी 15 वर्षीय बेटी एन. एस. प्रज्ञा राजलक्ष्मी इन मददों को सत्यापित करने के लिए हर दिन कुछ घंटे रूरल रिस्पांस ट्रैकर को देते हैं। शेखर ने गाँव कनेक्शन को बताया, "कोविड की स्थिति बदतर होती जा रही है और हम अपने घरों में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। क्योंकि हम बहुत कुछ नहीं कर सकते। पिछले हफ्ते, मेरी बेटी ने मुझसे पूछा, अप्पा, हम दूसरों की मदद करने के लिए क्या कर सकते हैं? "

यह तब है जब वह रूरल रिस्पांस ट्रैकर में शामिल होने के लिए स्वयंसेवकों को बुलाते हैं। सेकर ने बताया, "मैंने और मेरी बेटी दोनों ने इसके लिए साइन अप किया। एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम में भाग लिया और अब हर दिन कुछ घंटे यहां आई जानकारियों की पुष्टि करने और उन्हें अपडेट करने में बिताते हैं। मेरी बेटी एक दिन में एक घंटे बिताती हैं, आफिस का काम खत्म करने के बाद दो घंटे (9 बजे से 11 बजे) इसके लिए देता हूं।"

उन्होंने कहा, "इसके अलावा, मैं और मेरी बेटी फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया साइटों पर इन मदद के बारे में जानकारी की जांच करते हैं और सत्यापित करने के लिए कॉल करते हैं।"

सचिन मल्हान के अनुसार, ट्रैकर उन सैकड़ों मदद करने वालों की सत्यापित सूची प्रदान करता है, जो अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकते हैं, लेकिन किसी न किसी तरह से मदद करना चाहते हैं। "हम अपने स्तर पर अंत में एनजीओ, मदद देने वालों और अन्य का सत्यापन करते हैं। बावजूद इसके हम दान करने से पहले लोगों को और अधिक सत्यापन करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हम रोजाना रूरल रिस्पांस पर 50-70 अधिक मदद करने वालों को जोड़ते हैं।

बिहार के हाजीपुर के मूल निवासी अरविंद चिरानिया 5 मई को लिंक्डइन पर एक पोस्ट के माध्यम से इससे जुड़े। शेखर मल्हान ने आगे कहा, "पहले दिन मैंने लगभग 160 मदद करने वालों का सत्यापन किया, जो ग्रामीण भारत और दरकिनार किए गए समुदायों पर केंद्रित थे। जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि हमें कुछ करने की जरूरत है और यही वह जगह है जहां मैंने विभिन्न समूहों को बनाने, लिंक जोड़ने और अधिक स्वयंसेवकों को पंजीकृत करने के लिए अपने पेशेवर ज्ञान का इस्तेमाल किया है।"

सचिन मल्हान ने कहा कि यह स्वैच्छिक प्रयास और सहयोग के लिए खुला है ताकि अधिक से अधिक लोग / संगठन इसमें शामिल हो सकें और चीजों को आगे बढ़ा सकें।

यहां डोनेशन कर सकते हैं: https://ruralindia.help

अगर आप वालियंटर बनना चाहते हैं तो यहां संपर्क कर सकते हैं। ई-मेल: Covid@agami.in

या फिर वालियंटर फार्म भर सकते हैं : https://docs.google.com/forms/u/1/d/e/1FAIpQLSdGvxN2rwO_sQXeYCYHpdf_T8F2KpkM0b_Zy9MrQGVA0bgvkA/viewform?usp=send_form

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