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वर्चुअल भारत: 'मुथुवन कल्याणम' एक खोई हुई परंपरा को जीवंत करने की कोशिश

शार्ट फिल्म ‘मुथुवन कल्याणम’ में डायरेक्टर शॉन सेबेस्टियन और सिनेमैटोग्राफर सुदीप एलमोन ने पश्चिमी घाट के अंदर मुथुवन जनजाति की शादी को गहराई से दिखाया है। यह फिल्म भारत बाला के वर्चुअल भारत प्रोजेक्ट के एक हजार कहानियों का हिस्सा हैं।

Subha RaoSubha Rao   19 Feb 2021 12:00 PM GMT

Virtual Bharat, Muthuvan marriage, Shawn Sebastianमुथुवन कल्याणम शॉर्ट फिल्म का एक दृश्य। (सभी तस्वीरें- Virtual Bharat)

रात के 11 बजे रहे हैं और आप हवा में ठंड महसूस करते हुए कुचले गए पत्तों की सुंगध ले रहे हैं। इसी दौरान आपके स्क्रीन पर अपने भव्य रूप में सुंदर पश्चिमी घाट नजर आता है। कुछ लोग शादी के लिए घने जंगल में जा रहे हैं। केरल के एर्नाकुलम जिले के कुंचिपारा में शादी आयोजित की गई है, जहां का पिनकोड 686681 है। हम सभी मुथुवन कल्याणम की शादी में आमंत्रित हैं। केरल के एक आदिवासी समुदाय मुथुवंश के जीवन पर आधारित है यह शार्ट फिल्म 'मुथुवन कल्याणम'।

इस फिल्म का निर्देशन शॉन सेबेस्टियन ने किया है। सुदीप एलमोन ने सिनेमैटोग्राफी की है। यह शार्ट फिल्म भारतबाला के वर्चुअल भारत प्रोजेक्ट के एक हजार कहानियों का हिस्सा है। फिल्म में जनजातीय बोली मलयालम और तमिल का प्रयोग किया गया है और अंग्रेजी में सबटाइटल है।

नौ मिनट की इस शार्ट फिल्म में एक दादा अपने पोते को एक कहानी सुनाते हैं। दादा जी पोते को मुथुवंश समुदाय की खोई हुई परंपरा के बार में बताते हैं। वे कहते हैं कि सुंदर दूल्हन कल्याणी अपने सहेलियों के साथ जंगल में प्रवेश करती है। दूल्हे और उसके साथ के लोगों द्वारा दूल्हन का पीछा किया जाना है, ताकि वह लोग दूल्हन को ढूंढ सकें और मुथुवंश पंरपरा के मुताबिक जंगल की पहाड़ियों पर दोनों शादी कर सकें। उन्हें रास्ते में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। फिल्म के एक दृश्य में एक लड़की चट्टान के नीचे से रेंगने वाले कीड़ों को पकड़ लेती है। वहीं, दूसरे दृश्य में दुल्हन एक पेड़ पर चढ़ती है, इसके चलते दूल्हे द्वारा उसे ढूंढना और अधिक मुश्किल हो जाता है।


फिल्म में प्राकृतिक सौंदर्य से जुड़े सुंदर दृश्यों को दिखाया गया है। जंगल में एक शानदार झरना है। कई पेड़ हैं जो आकाश तक पहुंचते हुए नजर आ रहे हैं। फिल्म में प्राकृतिक सौंदर्य और आदिवासी समुदाय के जीवन का अद्भुत संगम है। आप जानते हैं कि वे उस रास्ते पर चलते हैं जो उनके पूर्वजों ने बनाया था, लेकिन आप यह भी जानते हैं कि यह रास्ते खतरे के बिना नहीं है। फिल्म के किरदार हर पल में जीते नजर आते हैं। यह फिल्म को जीवंत बना देता है। केरल के आदिवासी समुदाय मुथुवंश की शादी को फिल्माया गया है।


मुथुवन समुदाय के दूल्हे को अपनी दुल्हन के लिए खुद को योग्य साबित करना पड़ता है। इसके लिए वह अपने उम्र से बड़े लोगों के एक समूह के साथ जंगल में प्रवेश करता है जो रास्ते का नेतृत्व करते हैं। रास्ते में बाघ, हाथी, बिच्छू हो सकते हैं, इसलिए दूल्हे और उसके साथ में लोगों को सावधानी से दूल्हन को जंगल में ढूंढना है। रास्ते में दूल्हा और दुल्हन की टीमें चिढ़ाते हुए आसापत्तू गाना गाती हैं। आखिरकार दूल्हा और दुल्हन एक-दूसरे को ढूंढते हैं, जंगल में पहाड़ों पर शादी करते हैं और हल्दी के पानी से स्नान करने के बाद घर लौटते हैं।

फिल्म के निर्देशक शॉन सेबेस्टियन ने गांव कनेक्शन को बताया कि फिल्मकार भारत बाला ने फ्लाइट के दौरान पत्रिका में इस जनजाति के बारे में पढ़ा। इसके बाद उन्होंने इस पर फिल्म बनाने का फैसला किया। शॉन सेबेस्टियन गांव कनेक्शन से कहते हैं ,"मैंने शिक्षाविदों से मुलाकात की, शोध किए, आदिवासी बुजुर्गों और युवाओं से बात की और उन जगहों पर गए जहां हमें फिल्म की शूटिंग करनी थी। इसमें मुख्य रूप से केरल के एर्नाकुलम और इडुक्की जिले शामिल हैं।" उन्होंने बताया कि इस फिल्म की शूटिंग दिसंबर 2016 में हुई थी।


"जंगल के अंदर शादी करने की परंपरा अब मौजूद नहीं है। फिल्म के जरिए एक ऐसे समय में जाने की कोशिश है जब मुथुवंश समुदाय के लोग प्रकृति के साथ रहते थे और अपने बुजुर्गों की परंपराओं का पालन करते थे। कहानी सुनाने का एक अच्छा तरीका है लोगों का इंटरव्यू करना है, यह पत्रकारिता है। हम चाहते थे कि इसे सिनेमा के रूप में बताया जाए, जिसमें कलात्मक हो, इसके लिए हमने फैसला किया कि दादाजी इसे कहानी के रूप में सुनाएंगे।" सेबेस्टियन गांव कनेक्शन को बताते हैं।

"हम बाहरी व्यक्ति की निगाहों से बच नहीं सकते हैं, यह हमारी वास्तविकता है, लेकिन इस फिल्म को बनाने के दौरान मुझे बहुत सावधान रहना पड़ा। मुथुवंश समुदाय के लोग अपनी भाषा बोलते हैं, फिल्म में कोई भी बातचीत स्क्रिप्टेड नहीं थी। हमने जंगल में उनके साथ यात्रा की और दृश्यों को शूट किया। फिल्म में कीड़े के साथ जो दृश्य है, वह स्क्रिप्टेड नहीं था।" सेबेस्टियन बताते हैं।



"आदिवासी बुजुर्गों को शुरू में कैमरे लें जाने वालों पर संदेह था, जब उन्हें बताया गया कि उनके जीवन पर आधारित यह फिल्म बनाई जा रही है, तब उन्होंने भरोसा किया। दूल्हे के दोस्त के रूप में आदिवासी प्रमुख को भी फिल्म में दिखाया गया है। हमें उनके इनपुट की जरूरत थी, हम कुछ भी बाहरी नहीं दिखाना चाहते थे।" वे आगे कहते हैं।

फिल्मकार भारत बाला ने गांव कनेक्शन को बताया कि वह भारत में भाषाई और सांस्कृतिक अंतर के बावजूद यहां पाई जाने वाली कहानियों की विविधता से आश्चर्यचकित है। उन्होंने वर्चुअल भारत प्रोजेक्ट के तहत एक हजार कहानियां बनाने का लक्ष्य रखा है।

"टीम ने अब तक 300 फिल्मों के लिए शोध किया है और अभी तक 90 फिल्में बन चुकी हैं। इसमें से 21 फिल्म को रिलीज कर दिया गया है। 60 फिल्मों के पोस्ट प्रोडक्शन के काम चल रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि ये निर्मित कहानियां नहीं हैं। हमने सभी फिल्मों के विषय को लेकर बहुत खुले दिल से विचार किया है।" भारत बाला ने गांव कनेक्शन को बताया।

भारत बाला ने कहा कि रिसर्च तो वर्चुअल भारतीय टीम के दिल में है। देशभर में मेरी बीस वर्षों की यात्राओं के दौरान बनाए गए नोट्स से इन सभी फिल्मों की कहानियां ली गई हैं। ये सभी शानदार कहानियां हैं। मैं रचनात्मक कहानियों को खोजता हूं, रिसर्च करता हूं और उसे आकार देता हूं। यह हर दिन, हर पल होता है।

सिनेमैटोग्राफर सुदीप एलमोन ने हाल ही में मलयालम सुपरहिट फिल्म अयप्पनम कोशियुम में शानदार काम किया है। उन्होंने पहले भी वाइल्ड लाइफ फिल्मों में काम किया था, लेकिन इस फिल्म में उनका यह नया अनुभव था। वे बताते हैं कि हमने इस रोमांचक दृश्य को जंगल के अंदर सिनेमाई तरीके से शूट किया। हम फिल्म में मानवीय भावनाएं चाहते थे। मैं एक-दो स्थानों पर शूटिंग करना चाहता था। उनमें से एक झरने का लोकेशन था। चूंकि हमें पता था कि दुल्हन पहले जंगल में जाएगी, हमने सोचा कि हम उन्हें झरने के ऊपर और दूल्हे को नीचे के लोकेशन पर रखकर शूटिंग करेंगे।

एलमोन ने कहा कि ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा जो प्राकृतिक सौंदर्यता में खुद को कैद नहीं कर पाया होगा। मेरा मन अभी भी प्राकृतिक सौंदर्यता के बीच में है। वहां संगीत है और बहुत सारे तत्व नजर आते हैं। वहां का हर पल जीवंत है।


वर्चुअल भारत जैसी प्रोजेक्ट किस तरह की संतुष्टि देती है जो फीचर फिल्मों में एक जाना माना नाम है? फिल्मों में मैं 200 लोगों के साथ काम करता हूं, लेकिन यहां हम 4 या 5 लोग देशभर में यात्रा कर रहे हैं। हम रोचक कहानियों के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाते हैं, वहां शूटिंग करते हैं और उस पल को जीते हैं। यह अलग तरह की संतुष्टि देता है। एलमोन कहते हैं।

फिल्म के अंत में दादाजी ने आह भरते हुए कहानी समाप्त किया। दादाजी ने कहा, "दहेज और सोना जरूरी हो गया है, तब सम्मान का एक शब्द पर्याप्त था।" उन्होंने भावुक होकर पोते को बताया, "हमारे जंगल चले गए हैं, हमारी परंपराएं चली गई हैं।"

इस स्टोरी को अंग्रेजी में यहां पढ़ें-

अनुवाद- शुभम ठाकुर

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