MSP पर किसानों की मांग पर सरकार के प्रस्ताव में ऐसा क्या है जिसे मानने को तैयार नहीं हैं किसान संगठन?

केंद्र सरकार ने एमएसपी पर किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रस्ताव दिये, लेकिन किसान संगठनों ने उसे भी मानने से इनकार कर दिया है। किसान संगठनों ने कहा कि वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। आइये जानते हैं MSP पर सरकार के प्रस्ताव में क्या है?

farmers protest, delhi, gov on mspकिसान संगठनों ने कहा कि वे 12 दिसंबर को दिल्ली-जयपुर रास्ता जाम करेंगे। (फोटो- ANI से साभार)

किसान आंदोलन को देखते हुए सरकार ने किसानों को जो प्रस्ताव भेजे थे उसे किसान संगठनों ने खारिज कर दिया है। साथ ही किसान संगठनों ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर उनका आंदोलन और तेज होगा।

गृह मंत्री अमित शाह से मंगलवार को किसानों के एक दल ने बातचीत की थी जिसके बाद सरकार ने कहा था कि वो कानून वापस नहीं ले सकती लेकिन संशोधन किए जा सकते हैं। इसके बाद भारत सरकार ने 20 पन्नों का एक प्रस्ताव किसानों को भेजा। इसमें कहा गया कि सरकार कृषि कानून के उन प्रावधानों पर विचार करने के लिए तैयार है जिन पर किसानों को आपत्ति है।

कृषि कानून बनने के बाद से ही किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को अनिवार्य कानून बनाने की मांग कर रहे हैं और ये उनकी सबसे बड़ी मांगों में से एक है।

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सरकार की ओर से दिये गये प्रस्ताव के अनुसार इस मुद्दे पर किसानों को लगता है कि वे अपनी उपज समर्थन मूल्य पर सरकारी एजेंसी के माध्यम से नहीं बेच पाएंगे। यह विकल्प ही समाप्त हो जायेगा और कृषि उपज का व्यापार निजी हाथों में चला जायेगा।

इस मुद्दे पर सरकार ने अपने प्रस्ताव में कहा-

1- नये अधिनियमों में समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था और सरकारी खरीदी में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।

2- समर्थन मूल्य के केंद्रों की स्थापना का अधिकार राज्य सरकारों को है और वे वह इन केंद्रों को मंडियों में स्थापित करने के लिए स्वतंत्र हैं।

एमएसपी किसानों की मांग पर सरकार का प्रस्ताव

3- केंद्र सरकार द्वारा लगातार समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था को मजबूत की गई है जिसका उदाहरण इस वर्ष रबी और खरीफ की बंम्पर खरीदी है।

4- केंद्र सरकार एमएसपी की वर्तमान खरीदी व्यवस्था के संबंध में लिखित आश्वासन देगी।

केंद्र सरकार के प्रस्तावों पर किसानों संगठनों की बैठक खत्म होने से ठीक पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट करके भी कहा कि MSP को खत्म नहीं किया जायेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने किसानों को उनकी फसलों का डेढ़ गुना एमएसपी देने की बात बार-बार दोहरा चुकी है। एमएसपी पर फसलों की खरीद पूर्ववत जारी रहेगी और अभी भी इस मसले पर सरकार का रुख बरकरार है। हम एमएसपी के मसले पर किसानों को भरोसा देने को तैयार हैं।

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कृषि मंत्री ने आगे बताया कि चालू खरीफ विपणन सत्र में पिछले साल के मुकाबले अब तक 20 फीसदी ज्‍यादा धान खरीदा है। इसके लिए 66,135 करोड़ रुपए का न्यूनतम समर्थन मूल्य चुकाया गया है और कुल 350.29 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है। खरीद का काम पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, आंध्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में पहले जैसा ही चल रहा है।

सरकार के प्रस्ताव पर किसान संगठनों की बैठक हुई। इसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि सरकार की तरफ से जो प्रस्ताव आया था उसे हमने नामंजूर कर दिया है। हम अब प्रदर्शनों को और तेज करेंगे। देश के अलग-अलग राज्यों के किसान विरोध प्रदर्शन करेंगे।

अब पूरे देश में हर रोज प्रदर्शन होंगे। आने वाले 14 दिसंबर को पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में धरने आयोजित होंगे जबकि उससे पहले 12 दिसंबर को जयपुर-दिल्ली हाईवे पर रोक लगाया जाएगा। 12 तारीख को एक दिन के लिए पूरे देश के टोल प्लाजा फ्री कर दिए जाएंगे।

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इससे पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी किसानों को आश्वासान देते रहे हैं कि नये कृषि कानूनों के बाद भी एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन किसानों की मांग है इसे कानून की मान्यता दी जाये।

किसानों की बात सरकार क्यों नहीं मान रही है, इस पर गांव कनेक्शन की विस्तृत रिपोर्ट आप यहां पढ़ सकते हैं।

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