जब किसानों ने प्याज दो रुपए प्रति किलो बेची, तो हम 50 रुपए में क्यों खरीद रहे हैं ?

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   25 Oct 2017 6:21 PM GMT

जब किसानों ने प्याज दो रुपए प्रति किलो बेची, तो हम 50 रुपए में क्यों खरीद रहे हैं ?मुनाफाखोरी की वजह से बढ़ रहे सब्जियों के दाम।

लखनऊ। किसानों ने तो सरकार को सब्जियां कौड़ियों के दाम बेची, फिर उनके दाम आसमान क्यों छू रहे हैं। जिस किसान ने सरकार को 2-4 रुपए प्रति किलो प्याज बेचा था, वो बाजार से अब 50-60 रुपए किलो प्याज खरीदने को मजबूर है। आखिर ऐसा हो क्यों रहा है, इसके पीछे कारण क्या हैं ?

एक अध्ययन में पता चलता है कि जब टमाटर की बंपर पैदावार होती है तो भंडारण क्षमता का बहाना बनाकर बड़े व्यापारी जानबूझकर दाम कम कर देते हैं, जिससे किसान फसल सस्ते में बेचने को मजबूर हो जाता है, इसी का फायदा उठाकर बड़े जमाखोर टमाटर को स्टोर कर लेते हैं, जिससे मंडियों में टमाटर की आवक कम हो जाती और इसके दाम बढ़ जाते हैं।

इसी साल जून में मध्य प्रदेश के मंदसौर में फसलों की उचित मांग कर रहे किसानों को गोली मार दी गई। ये वे किसान थे जिन्होंने स्थानीय मंडियों में 2-3 रुपए प्रति किलो प्याज बेची थी। बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 रुपए की सरकारी दर पर प्याज खरीदने की घोषणा की। मंदसौर के एक किसान केसूलाल पाटीदार ने फोन पर बताया, " प्याज की कीमत से हमारी लागत भी नहीं निकल पायी थी। हमने करीब 40 क्विंटल प्याज खेतों में ही छोड़ दिया था। 2.20 पैसे के हिसाब प्याज बेचने का कोई फायदा ही नहीं था। हमने 8 रुपए में भी सरकार को प्याज नहीं बेचा। अब हम बाजार से 50-60 रुपए में प्याज खरीदकर खा रहे हैं।"

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देश में प्याज की सबसे बड़ी मंडी महाराष्ट्र के लासलगाँव में स्थित है। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह में लासलगाँव की मंडी में प्याज 668 रुपए प्रति कुंतल था जबकि अगस्त के पहले सप्ताह में प्याज की कीमत बढ़कर 2400 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। जबकि मौजूदा समय में यहां प्याज की कीमत 3225 रुपए क्विंटल पहुंच गई है।

पिछले 14 वर्षों में देश में टमाटर की पैदावार तो बढ़ती रही लेकिन इसका लाभ न तो टमाटर उगाने वाले किसानों को हुआ और न ही आम उपभोक्ताओं को। अगर किसी को लाभ मिला तो सिर्फ बड़े व्यापारी और बिचौलियों को।
डॉ. राकेश सिंह, प्रोफेसर और क्वॉर्डिनेटर, एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट, बीएचयू

आजादपुर मंडी (नई दिल्ली) के पूर्व चेयरमैन और प्याज व्यापारी राजेंद्र शर्मा बताते हैं, "इस बार त्योहार पहले आ गए। अधिक मांग के कारण भी प्याज का दाम बढ़ रहा है। लेकिन ऐसी संभावना है कि आने वाले कुछ दिनों में प्याज का दाम घटेगा। मंडी में अब प्याज की आवक बढ़ेगी"।

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लखनऊ की थोक मंडी दुबग्गा के प्याज व्यापारी बाबू अतिक भाई ने बताया, "जिन राज्यों से प्याजा आती थी वहां ज्यादा बारिश हुई। बड़ी मात्रा में प्याज सड़ गई। नई प्याज बाजार में पहुंची नहीं है। ऐसे में प्याज की कीमतें अभी और बढ़ सकती हैं। अभी हमारे यहां 30 से 40 रुपए प्रति किलो प्याज का दाम है जो अभी और बढ़ेगा ही।"

टमाटर लाल क्यों हो रहा

टमाटर वो सब्जी है, जिसकी कीमतें साल में कुछ दिन सुर्खियों में रहती है। इस साल देश के कई हिस्सों में टमाटर 100 रुपए प्रति किलो बिका, जबकि सच ये भी है कि यही टमाटर मंडियों में फेंका जा रहा था। आखिर वजह क्या है जो टमाटर हर साल ‘लाल’ हो जाता है। पिछले महीने उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में टमाटर कूड़े के ढेर में फेंका जा रहा था। इलाहाबाद की मुंडेरा मंडी दूर-दूर से आने वाले किसान टमाटर न बिकने से परेशान होकर टमाटर को कूड़े में फेंकने पर मजबूर हो गये थे। इस बारे में वहां के स्थानीय टमाटर व्यापारी और किसान आशीष सिंह बताते हैं, " हम तो अपना टमाटर दाम कम मिलने के कारण बेच ही नहीं पाए। भारी नुकसान हुआ। हमें सही दाम नहीं मिला, लेकिन अब देखिए, टमाटर का दाम अब आसमान पर है।"

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आजादपुर मंडी दिल्ली में भी टमाटर का यही हाल है। टमाटर एसोसिशन के उप प्रधान अशोक कुमार बताते हैं, "देश में इस वक्त फरवरी से अगस्त के बीच तैयार होने वाली टमाटर की फसल पहुंच रही है। बारिश के कारण कई टमाटर उत्पादक प्रदेशों में आवक कम हुई। इस कारण टमाटर का दाम बढ़ता ही जा रहा है। दाम कम होने की उम्मीद नहीं है।"

देश में सबसे ज्यादा टमाटर की पैदावार कर्नाटक, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में होती है। बेंगलूरु से 60 किलोमीटर कोलार, एशिया में टमाटर के उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। agriculture.anvayin.com के अनुसार कोलार मंडी में पिछले एक हफ्ते में टमाटर का दाम 2834 से 3734 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच गया है।

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लाभ सिर्फ बड़े व्यापारी और बिचौलियों को

देश में टमाटर के दामों में अचानक से कमी और बढ़ोतरी के साथ ही बिचौलियों की क्या भूमिका होती है, इसको जानने के लिए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के कृषि अर्थशास्त्र विभाग के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया। ‘टमाटर मार्केट इंटेलीजेंस परियोजना’ के तहत पिछले 14 वर्षों में देशभर में टमाटर की पैदावार, मंडियों में टमाटर की आवक और मूल्यों का अध्ययन किया गया।

इस परियोजना को हेड करने वाले बीएचयू के एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट के प्रोफेसर और क्वॉर्डिनेटर डॉ. राकेश सिंह ने गाँव कनेक्शन को बताया, ‘पिछले 14 वर्षों में देश में टमाटर की पैदावार तो बढ़ती रही लेकिन इसका लाभ न तो टमाटर उगाने वाले किसानों को हुआ और न ही आम उपभोक्ताओं को। अगर किसी को लाभ मिला तो सिर्फ बड़े व्यापारी और बिचौलियों को।’

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वो बताते हैं, ‘अध्ययन में पता चला कि जब टमाटर की बंपर पैदावार होती है तो भंडारण क्षमता का बहाना बनाकर बड़े व्यापारी जानबूझकर दाम कम कर देते हैं, जिससे किसान सस्ते में बेचना मजबूरी हो जाता है, इसी का फायदा उठाकर बड़े जमाखोर टमाटर को स्टोर कर लेते हैं, जिससे मंडियों में टमाटर की आवक कम हो जाती और इसके दाम बढ़ जाते हैं।’

सब्जियों ने बिगाड़ा रसोई का जायका

टमाटर के दाम बढ़ने के कुछ और कारण भी हैं। किसान इस समय सोयाबीन की बोवनी में लग गए हैं। इसका असर दिख रहा है। बाजार में मटर आते ही 100 रुपए किलो तो टमाटर 60 रुपए किलो बिक रहा है। मुम्बई में मटर 280 रुपए किलो बिक रहा है। मेथी अभी कम ही दिखाई दे रही है। जहां मिल रही है वहां दाम 80 रुपए किलो तक हैं। आलू से आमजन को थोड़ी राहत है।

लेकिन किसानों को क्या मिला ?

अब बड़ा सवाल ये है कि इसमें किसान कहां हैं। क्या महंगाई बढ़ने से किसानों को फायदा हो रहा है। मध्य प्रदेश के हरदा के रहने वाले किसान राम इनामिया प्याज की बढ़ी कीमतों पर बताते हैं, ''किसानों ने सरकार को 8 रुपए प्रति किलो के रेट से सारा प्याज बेच दिया। मध्य प्रदेश सरकार के पास प्याज के भंडारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी इसलिए सरकार ने दो रुपए किलो प्याज व्यापारियों को बेच दिया। व्यापारियों ने प्याज की जमाखोरी कर ली, जिस वजह से अब लगातार प्याज की कीमतें बढ़ रहीं हैं और व्यापारियों को फायदा हो रहा है। किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है क्योंकि किसानों के पास प्याज ही नहीं है।''

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ये हाल लगभग हर प्रदेश में है। सस्ते दामों में व्यापारियों ने प्याज खरीदकर स्टोर कर लिया। और जब आपूर्ति कम हो रही है तो यही प्याज ज्यादा दामों में मार्केट में। पंजाब भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बलविंदर बाजवा बताते हैं "ये महंगाई सरकार की नाकामी है। टमाटर और प्याज स्टोर करने की क्षमता अगर सरकार के पास होती हो इनका दाम इतना नहीं बढ़ता। व्यापारी सस्ते दामों में सब्जियां खरीद लेते हैं, इसमें किसानों को कोई फायदा नहीं होता, लेकिन आम जनता लुट जाती है।"

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