जानिए क्या है 950 करोड़ का चारा घोटाला, तब से अब तक की पूरी कहानी

जानिए क्या है 950 करोड़ का चारा घोटाला, तब से अब तक की पूरी कहानीअाज होगा लालू यादव की किस्मत का फैसला

झारखंड के देवघर का ज़िला न्यायालय आज लगभग 22 साल पुराने चारा घोटाला मामले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई हैैै। 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले की कहानी 1994 से शुरू होती है। यह बिहार राज्य का सबसे बड़ा घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे के नाम पर सरकारी खजाने से 950 करोड़ रुपये का़ाफर्जीवाड़ा हुआ था। बिहार की राजनीति पर इसका ऐसा असर पड़ा जो हमेशा कि लिए उसमें दाग लगा गया।

यहां से शुुरू हुआ मामला

बिहार पुलिस ने 1994 में तत्कालीन बिहार के गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्जी बिलों के ज़रिए करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी के बिल जामा किए। जिसके बाद रातो-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के सैकड़ों कर्मचारी गिरफ्तार कर लिए गए। पूरे राज्य में कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए और कई डेकेदारों व सप्लायरों को हिरासत में ले लिया गया।

उस वक्त राज्य में लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल की सरकार थी और वह वहां के मुख्यमंत्री थे। विपक्षी पार्टियों ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि घोटाला इतना बड़ा है कि बिना सरकार की मिलीभगत के हो ही नहीं सकता। उन्होंने मांग की कि इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराई जाए।

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1996 में शुरु हुई सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया कि चारा घोटाले में शामिल ज्यादातर आरोपियों के तार राष्ट्रीय जनता दल और दूसरी बड़ी पार्टियों से जुड़े हैं। जांच में यह भी सामने आया कि पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई में खर्च करने के लिए करोड़ों रुपये की फर्जी बिल सरकारी कोषागार से कई सालों तक भुनाए। सीबीआई ने अपनी जांच में यह भी दावा किया कि लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दोषी हैं।

बनाई चार्जशीट

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, 950 करोड़ के चारा घोटाला (आरसी/20ए/96) मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र, जेडीयू सांसद जगदीश शर्मा सहित 45 आरोपी हैं जिनपर चाईबासा कोषागार 37.7 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप भी है। 1997 में घोटाले के चलते लालू प्रसाद यादव को जेल भी जाना पड़ा और उन्हें मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र भी देना पड़ा लेकिन उन्होंने उस समय अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार की कुर्सी सौंप दी।

लालू पर छह मामले लंबित

चारा घोटाला में लालू यादव पर छह अलग-अलग मामले लंबित हैं और इनमें से एक में उन्हें 5 साल की सजा हो चुकी है। इस घोटाले से जुड़े 15 आरोपियों की मौत हो चुकी है जबकि 2 सरकारी गवाह बन चुके हैं और एक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और एक आरोपी को कोर्ट से बरी किया जा चुका है।

ये है घटनाक्रम

  • जनवरी, 1996 : उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के दफ्तरों पर छापा मारा और ऐसे दस्तावेज जब्त किए जिनसे पता चला कि चारा आपूर्ति के नाम पर अस्तित्वहीन कंपनियों द्वारा धन की हेराफेरी की गई। उसके बाद यह चारा घोटाला सामने आया।
  • 11 मार्च, 1996 : पटना उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस घोटाले की जांच का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने इस आदेश पर मुहर लगाई।
  • 27 मार्च, 1996 : सीबीआई ने चाईंबासा खजाना मामले में प्राथमिकी दर्ज की।
  • 23 जून, 1997 : सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया और लालू प्रसाद को आरोपी बनाया।
  • 30 जुलाई, 1997 : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा।
  • 5 अप्रैल, 2000 : विशेष सीबीआई अदालत में आरोप तय किया।
  • 5 अक्टूबर, 2001 : उच्चतम न्यायालय ने नया राज्य झारखंड बनने के बाद यह मामला वहां स्थानांतरित कर दिया।
  • फरवरी, 2002 : रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई शुरू हुई।
  • 13 अगस्त, 2013 : उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत के न्यायाधीश के स्थानांतरण की लालू प्रसाद की मांग खारिज की।
  • 17 सितंबर, 2013 : विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
  • 30 सितंबर, 2013 : बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों- लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र तथा 45 अन्य को सीबीआई न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने दोषी ठहराया।
  • 3 अक्टूबर, 2013 : सीबीआई अदालत ने लालू यादव को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी किया।
  • 23 दिसंबर 2017 : झारखंड के देवघर ज़िले के न्यायालय ने जेल भेजा।

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