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देश का पेट भरने वाले किसानों को आखिर घास क्यों खानी पड़ रही ?

नई दिल्ली। लोगों को अन्न खिलाकर भरण-पोषण करने वाले किसानों को अपनी मांग पूरी करवाने के लिए घास खानी पड़ रही है। सोमवार को देश की राजधानी में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां अन्नदाता घास खाता दिखा।

सोमवार को दिल्ली में तमिलनाडु के किसानों ने घास खाकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बावजूद सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही है। वे कर्ज माफी के साथ राहत पैकेज की भी मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उनकी मांग सुनी नहीं जा रही हैं।

करीब एक महीने से जारी है प्रदर्शन

ये किसान पिछले 30 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं। इस दौरान मीडिया का ध्यान खींचने के लिए आंदोलनकारियों ने कई बार नरमुंडों के साथ धरना देने से लेकर मरे हुए सांपों को जीभ पर रखकर प्रदर्शन जैसे तरीके अपनाए हैं। एक बार तो किसान नग्न भी हो गए थे, बावजूद इसके अभी तक उनकी मांग पर सरकार ध्यान नहीं है।

क्या चाहते हैं किसान?

तमिलनाडु के किसान इन दिनों भयंकर सूखे का सामना कर रहे हैं। दक्षिण-पश्चिमी मानसून और पूर्वोत्तर मानसून सामान्य से 60 फीसदी बरसा है। ऐसे में कर्ज का बोझ उनकी जिंदगी को और कठिन बना रहा है। किसानों का आरोप है कि आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बावजूद सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही है। वो कर्ज माफी के साथ राहत पैकेज की भी मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को किसानों का कर्ज माफ करने का निर्देश दिया है।

प्रदर्शनकारी किसान केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से तीन बार मिल चुके हैं। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया, लेकिन किसानों को उनकी मांगें पूरी होती नहीं दिख रहीं। इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) के तहत 1,712 करोड़ रुपये दिए थे। लेकिन, राज्य सरकार ने 40,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मांग की है।