सड़क दुर्घटनाओं में हर रोज 417 लोग गंवा रहे जान, फिर क्यों पास नहीं हो रहा मोटर व्हीकल संशोधन बिल

सड़क दुर्घटनाओं में हर रोज 417 लोग गंवा रहे जान, फिर क्यों पास नहीं हो रहा मोटर व्हीकल संशोधन बिल

हम समाचार पत्रों और चैनलों पर अक्सर ऐसी खबरें पढ़ते और देखते हैं कि नाबालिग ने कार से दो लोगों को कुचला, या टक्कर मारकर घायल कर दिया। ऐसी घटनाओं में न जाने रोज कितने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। सरकार नाबालिगों को गाड़ी चलाने के लिए लाइसेंस नहीं देती, लेकिन धनाड्य माता-पिता बिना कुछ सोचे समझे अपने लाडलों को गाड़ी दे देते हैं। और नौसिखिए ना जाने कितनी जान ले लेते हैं। ऐसे में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रस्तावित मोटर व्हीकल संशोधन बिल को पास कराने की मांग भी गाहे-बगाहे होती रहती हैं। वरिष्ठ पत्रकार आैर एंकर ऋचा अनिरुद्ध ने हाल ही में अपने शो जिंदगी विद ऋचा में इस ज्वलंत मुद्दे को उठाया।

भारत सरकार ने जो आंकड़े 2016 में पेश किए थे, उसके अनुसार देश में हर घंटे 55 सड़क दुर्घटनाओं में 17 लोगों की मौत हुई यानि रोजाना 1317 दुर्घटनाएं और 417 मौत हुई। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। साल 2016 की रिपोर्ट में 2015 के मुक़ाबले दुर्घटनाओं में तो कमी आई है लेकिन मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

2016 में देश भर में 4,80,652 सड़क हादसे हुए जिनमें 1,50,785 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। हर 3.5 मिनट पर किसी व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन हादसों में 4,94,624 लोग घायल भी हुए। एक अच्छी बात ये जरूर है कि 2015 के मुकाबले 2016 में सड़क हादसों में 4.1 फीसदी की कमी आई लेकिन इसका बुरा पक्ष ये रहा कि मरने वालों की संख्या में 3.2% का इजाफा हो गया। यानि 2015 में जहां हर 100 हादसों में 29 लोग मारे गए वहीं 2016 में ये संख्या 31.3 प्रति 100 हादसे हो गई। राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस दौरान 1,42,359 (कुल का 29.6%) जबकि राज्य राजमार्गों पर 1,21,655 (25.3%) और अन्य मार्गों पर 2,16,638 (37.6%) सड़क हादसे हुए जिनमें क्रमशः 52,075 (34.5%), 42,067 (27.9%) और 56,643 (37.6%) लोग मारे गए।

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रिपोर्ट के मुताबिक सड़कों पर बने मोड़ों जैसे टी जंक्शन (T Junction) और वाई (Y Junction) पर सबसे ज़्यादा दुर्घटनाएं हुईं। देश भर में हुए कुल हादसों में से 37 फीसदी हादसे उन्हीं चौराहों और मोड़ों पर दर्ज़ किए गए। उनमें से तकरीबन 60 फीसदी हादसे T और Y जंक्शन पर रिकॉर्ड किए गए। वहीं रेलवे क्रासिंग पर पिछले साल 3316 हादसों में 1326 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

तमिलनाडू और उत्तर प्रदेश सबसे आगे

बात अगर सड़क हादसों की करें तो केवल 13 राज्यों ने 86.5 फ़ीसदी का योगदान दिया है। इन 13 राज्यों में 4,15,734 हादसे हुए जिनमें 1,26,159 (कुल मौतों का 83.7%) लोग मारे गए। सबसे ज़्यादा दुर्घटनाएं दक्षिणी राज्य तमिलनाडू में दर्ज की गई हैं। राज्य में 71,431 सड़क हादसे हुए जिनमें 17,218 लोग मारे गए. हादसों के मामले में मध्य प्रदेश दूसरे (53,972) और कर्नाटक (44,403) तीसरे साथान पर रहे। वैसे सड़क हादसों में हुई मौतों के मामले में सबसे अव्वल देश की सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश रहा है। सड़क हादसों के मामले में तो उत्तर प्रदेश छठे स्थान (35,612) पर रहा लेकिन 19,320 मौतों के साथ हादसों में हुई मौतों के मामले में सबसे ऊपर रहा। मौत के मामले में तमिलनाडू और महाराष्ट्र (12,935) दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे।

अगर महानगरों की बात करें तो सड़क हादसों के मामले में देश की राजधानी दिल्ली का रिकॉर्ड सबसे खराब रहा है। दिल्ली में 2016 के दौरान सड़क हादसों में जहां 1591 लोगों की मौत हुई वहीं चेन्नई 1183 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। मुंबई 562 और कोलकता 407 मौतों के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर रहा। और देश की राजधानी में घटी वो घटना भला कैसे भुलाई जा सकती है। 4 अप्रैल 2016 की शाम दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में 32 साल के मार्केटिंग एक्जीक्‍यूटिव सिद्धार्थ शर्मा अपने घर के नजदीक सड़क पार कर रहे थे, इसी दौरान करीब 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही मर्सिडीज कार ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सिद्धार्थ हवा में करीब 20 फीट तक उछल गए। हादसे के समय कार में ड्राइवर समेत 6 लोग सवार थे और ये सभी नाबालिग थे। सिद्धार्थ को तुरंत अस्‍पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

क्यों होते हैं हादसे ?

रिपोर्ट के मुताबिक इन हादसों की सबसे बड़ी वजह ड्राइवरों की गलती रही। स्पीड सीमा को पार करना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, ओवरटेकिंग और मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना कुछ ऐसी ग़लतियां हैं जिनसे बड़ी संख्या में सड़क हादसे हो रहे हैं। कुल सड़क हादसों में से 84 फीसदी हादसों के पीछे ड्राइवरों की गलती होती है। मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाने के कारण 4,976 दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 2,138 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारी भी मानते हैं कि इस आंकड़े से मामले की गंभीरता का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना सड़क दुर्घटना का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है और आने वाले समय में इसके चलते हादसों में बढ़ोत्तरी की आशंका है।

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दोपहिया वाहनों वाले रहें सावधान

दुपहिया वाहनों पर चलने वाले लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। रिपोर्ट से साफ़ है कि सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा जान गंवाने वाले दुपहिया वाहनों पर चलने वाले लोग ही रहते हैं। 2016 में मरने वाले कुल लोगों में 34% यानि 52,500 लोग दुपहिया वाहनों पर सफर करने वाले थे। वहीं पैदल चलने वाले 15,746 लोगों को भी इन हादसों में जान गंवानी पड़ी।

मोटर व्हीकल संशोधन बिल कब पास होगा ?

सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने अप्रैल 2016 में मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2016 को मंजूरी दी। इसके एक साल बाद अप्रैल 2017 में सरकार ने लोकसभा में ये बिल पास करवाया। लेकिन उसके बाद से ये बिल राज्यसभा में अटका हुआ है। जब तक राज्यसभा से ये बिल पास नहीं होता, तब तक इस बिल में प्रस्तावित कड़े प्रावधानों को कानूनी रूप नहीं दिया जा सकता।

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मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव करके ट्रैफिक के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 10,000 रुपए तक जुर्माना और हिट एंड रन मामले में दो लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं सड़क हादसे में दस लाख तक का मुआवजा, निर्धारित सीमा से ज्यादा स्पीड में गाड़ी चलाने पर 1000 से 4000 रुपए तक का जुर्माना, बीमा के बिना गाड़ी चलाने पर 2000 रुपए के जुर्माने या तीन महीने की जेल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने पर 2000 रुपये का जुर्माना और तीन महीने तक लाइसेंस का रद्द करना शामिल है।

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