सरकार किसे मानती है ‘शहीद’? 

सरकार किसे मानती है ‘शहीद’? सरकार किसे मानती है शहीद

छत्तीसगढ़ के सुकमा में सोमवार को हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद होने के बाद एक बार फिर से ये बहस तेज़ हो गई है कि केंद्र सरकार 'शहीद' को किस तरह परिभाषित करती है। कहा जाता है कि शहीद की परिभाषा क्या है इसके लिए कहीं कोई तय तहरीर नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुकमा में हुए हमले के बाद ट्वीट किया था कि सीआरपीएफ के जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी

लेकिन सवाल ये है कि क्या उन्हें वाकई 'शहीद' का दर्जा मिलेगा? आपको बता दें कि बीते लंबे वक्त से पैरामिलिट्री फोर्सेज़ के जवानों को पेंशन नहीं दी जाती है और न ही उन्हें आतंकवादी कार्रवाई के दौरान जान गंवाने पर ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाता है। साल 2013 में राज्यसभा सांसद किरणमय नंदा ने इसी सिलसिले में सरकार से पूछा भी था कि अर्धसैनिक बल के जवान जिनकी मौत अपना फ़र्ज़ निभाने के दौरान होती है, उन्हें सरकार शहीद का दर्जा क्यों नहीं देती? क्या वो सेना, वायु सेना या नौसेना से नहीं होते है, ऐसा क्यों किया जाता है? जिसके जवाब में कहा गया था कि सरकार किसी जवान के साथ भेदभाव नहीं करती, हालांकि ये भी माना गया था कि रक्षा मंत्रालय के पास कहीं भी 'शहीद' शब्द की परिभाषा नहीं है।

ये बहस इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ दिन पहले ही एक सीआरपीएफ के जवान जीत सिंह ने एक वीडियो वायरल किया था जिसमें उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अर्धसैनिक बलों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल किया था। वीडियो में जवान ने सेना और अर्ध सैनिक बलों को मिलने वाली सुविधाओं में गहरे अंतर की बात कही थी।

ऐसे में ये सवाल लाज़मी है कि जो जवान छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान दे देते हैं उन्हें सरकार शहीद मानती है या नहीं। अनौपचारिक तौर पर तो उन्हें शहीद कहा जाता है लेकिन शहीद को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिलती। सुकमा में शहीद हुए 25 जवानों को सरकार शहीद मान रही है या नही इस बारे में अबतक कहीं भी कुछ साफ नहीं हुआ है। कुछ वक्त पहले दिल्ली के एक आरटीआई कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने केंद्र सरकार से आरटीआई के ज़रिये जवाब मांगा था कि सरकार 'शहीद' किसे मानती है, जिसपर चौंकाने वाला जवाब ये आया था कि गृह मंत्रालय ने शहीद को कहीं भी परिभाषित नहीं किया है। गोपाल प्रसाद ने मंत्रालय से ये भी पूछा था कि एक जैसा काम कर रहे सेना और अर्द्धसैनिक बलों की मौत के हालात में क्या सिर्फ सेना के जवानों को ही शहीद कहलाए जाने का हक है? उन्होंने कहा कि अर्द्धसैनिक बलों के ऐसे जवानों को सिर्फ मृतक क्यों करार दिया जाता है?

देश में सैनिक और अर्धसैनिक बलों को सीमा पर दुश्मन, आंतकी कार्रवाई, दंगों, नक्सलवाद, उग्रवाद जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसे में ये देखना बेहद ज़रूरी है कि छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सील हमले में शहीद हुए 25 जवानों को सरकार शहीद का दर्जा देगी या नहीं?

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