स्वच्छता मिशन में बेहतर कार्य के लिए महिला IAS अधिकारियों को ‘स्वच्छ शक्ति’ सम्मान  

स्वच्छता मिशन में बेहतर कार्य के लिए  महिला IAS अधिकारियों को ‘स्वच्छ शक्ति’ सम्मान  स्वच्छ शक्ति सम्मान 2018 के साथ यूपी की अधिकारी। 

#CivilServicesDay पर उन महिला #IAS अधिकारियों के हौसले और फैसलों का सलाम कीजिए, जिनके नेतृत्व की बदौलत यूपी के हजारों गांव #ODF हुए

लखनऊ। विश्व महिला दिवस पर उत्तर प्रदेश की उन महिला आईएएस अधिकारियों को स्वच्छ शक्ति सम्मान दिया गया, जिनकी बदौलत यूपी के कई जिले और हजारों गांव स्वच्छ और ओडीएफ हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाली देश और प्रदेश की महिलाओं को स्वच्छ शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया। विश्व महिला दिवस पर लखनऊ में आयोजित स्वच्छ शक्ति 2018 सम्मेलन में गाजियाबाद की पूर्व जिलाधिकारी मिनिस्ती एस (आईएएस), इटावा की डीएम सेल्वा कुमारी जे., बागपत की मुख्य विकास अधिकारी चांदनी सिंह (आईएएस), हापुड़ की सीडीओ दीपा रंजन (आईएएस) उपनिदेशक पंचायती राज प्रवीणा चौधरी, और हापुड़ की डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव को स्वच्छ शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया।

समरोह में देश की हजारों महिला सरपंच, यूपी की 10 हजार महिला प्रधान, 2 हजार स्वच्छाग्रही शामिल हुईं। समारोह की अध्यक्षा और केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने प्रदेश की इन 7 महिला अधिकारियों को सम्मानित किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला प्रधानों, स्वच्छाग्रही और जिलों में काम कर रही अधिकारियों और कर्मचारियों के काम की सराहना की। उन्होंने कहा अक्टूबर 2018 तक पूरा यूपी खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा।

समारोह के बाद गांव कनेक्शन से बात करते हुए मिनिस्ती एस ने कहा, “स्वच्छ भारत की मुहिम महिलाओं के सम्मान से जुड़ी है। एक महिला होने के नाते वो खुद इससे सीधे जुड़ी हैं, स्वच्छ भारत में लगे ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी दिल से काम से लगे हैं इसलिए सफलता मिली।”

खाप पंचायतों की स्वच्छ भारत मुहिम में बढ़चढ़ भागीदारी को बागपत की सीडीओ चांदनी सिंह ने बड़ी सफलता माना। उन्होंने कहा, “जिले की कई खापों ने साफ तौर पर कहा दिया था, जिस घर में शौचालय नहीं होंगे वहां बेटियों की शादी नहीं करेंगे, इसके साथ ही आप लोगों की भागीदारी ने जिले को खुले में शौच से मुक्त कराया।” दीपा रंजन ने कहा कि लगातार गांवों के भ्रमण जमीन स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों को मोटीवेट करने और फॉलोअप करने से ही न सिर्फ लक्ष्य हासिल हुआ बल्कि आम लोगों का भी शौचालय के फायदे समझाने में सफलता मिली।

किसको क्यों मिला सम्मान ?

1.सेल्वा कुमारी जे, जिलाधिकारी, इटावा

इटावा में 194 गांव ओडीएफ हो चुके हैं तो 1100 से ज्यादा ग्राम पंचायतों के स्कूलों में शौचालयों की बेहतर व्यवस्था कराई जा चुकी है। डीएम सेल्वा कुमारी की अगुवाई में न सिर्फ गांवों में स्वच्छता की अलख जगाई गई बल्कि इसे सीधे महिलाओं से जोड़ा गया। महिलाओं को बेहद कम कीमत पर सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए सैनेटरी पैड बनाने यूनिट लगाई गई। लखनऊ में सेल्वा कुमारी जे की प्रतिनिधि ने ये सम्मान लिया।

2.मिनिस्ती एस, पूर्व जिलाधिकारी, गाजियाबाद

2.मिनिस्ती एस, पूर्व जिलाधिकारी, गाजियाबाद

स्वच्छता का मतलब सिर्फ झाड़ू लगाना या ईंटों के शौचालय बनाना ही नहीं, बल्कि उसका सीधा वास्ता आप की सेहत आप की जिंदगी से है। गाजियाबाद की जिलाधिकारी रहते हुए मिनिस्ती एस आम लोगों को ये समझाने में कामयाब रहीं। इनके कार्यकाल में न सिर्फ गाजियाबाद खुले में शौच से मुक्त हुआ बल्कि ग्रामीण इलाकों में शौचालय का इस्तेमाल बढ़ना भी बड़ी उपलब्धि माना गया।

चांदनी सिंह, सीडीओ, बागपत

3. चांदनी सिंह, सीडीओ, बागपत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत में जब चांदनी सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी के रुप में कार्यभार संभाला उस वक्त महज 19 गांव ओडीएफ हुए थे, लेकिन उनके के कुशल नेतृत्व के चलते अब 251 गांव को खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। बागपत को ओडीएफ कराने में अहम भूमिका निभाने के लिए महिला दिवस पर इन्हें सम्मानित किया गया।

4.दीपा रंजन, सीडीओ, हापुड़

4.दीपा रंजन, सीडीओ, हापुड़

आम ग्रामीण, प्रधान और सरकारी कर्मचारियों में स्वच्छता के लिए जूनुन जगाकर मुख्य विकास अधिकारी के रुप में दीपा रंजन के काम को सराहनीय बताया गया। 326 गांवों को ओडीएफ कराकर पूरे हापुड़ जिले को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए इन्हें महिला दिवस पर सम्मानित गया।

5. यशू रुस्तगी, पूर्व सीडीओ

5. यशू रुस्तगी, पूर्व सीडीओ

शामली को खुले में शौच से मुक्त कराने में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी यशू रुस्तगी का अहम योगदान रहा। जिले की टीम का कुशलता से नेतृत्व कर स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें ये सम्मान दिया गया। सम्मान समारोह के बाद गांव कनेक्शऩ से खास बात में उन्होंने इसे पूरी टीम का प्रयास और लोगों की जागरुकता को श्रेय दिया।

प्रवीणा चौधरी, उपनिदेशक पंचायती राज यूपी

मेरठ मंडल के 6 में से 4 जिलों को ओडीएफ कराने के लिए तत्कालीन उप निदेशक पंचायती राज प्रवीणा चौधरी को सम्मानित किया गया।

रेनू श्रीवास्तव, डीपीआरओ, हापुड़

हापुड़ को ओडीएफ कराने में जिला पंचायती राज अधिकारी के रुप में रेनू श्रीवास्तव के काम को विभागीय स्तर पर काफी सराहा गया। गांवों में काम कर रही टीमों से लगातार संपर्क और कुशल नेतृत्व के चलते उन्हें सम्मानित किया गया। समारोह के बाद रेनू श्रीवास्तव ने कहा कि जागरुक महिला प्रधानों और स्वच्छाग्रहियों की कड़ी मेहनत के चलते ही हापुड़ ओडीएफ हो सका।

समारोह में इज्जत घर के मॉडल का अनावरण करते सीएम योगी आदित्यनाथ और अन्यमंत्री अधिकारी

First Published: 2018-04-21 11:12:51.0

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