Top

जल्‍द दूर हो जाएगा जल संकट, खारे पानी को पीने योग्य बनाने की योजना पर हो रहा काम

जल्‍द दूर हो जाएगा जल संकट, खारे पानी को पीने योग्य बनाने की योजना पर हो रहा काम

नीति आयोग देश में पीने के पानी के संकट से निपटने के लिये समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने के लिये संयंत्र लगाने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इन संयंत्रों को देश के 7,500 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में लगाये जाने का प्रस्ताव है। देश के कई शहर जल संकट से गुजर रहे हैं।

सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली और मुंबई में भी पानी का संकट गंभीर बना हुआ है। शहरों में पीने के पानी की कमी ने संकट को और बढ़ा दिया है।

हाल में देश के कई भागों में खासकर चेन्नई में पीने के पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हुआ। इसका कारण कम बारिश की वजह से विभि‍न्न जलाशयों में पानी का कम होना है। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, नीति आयोग समुद्री पानी को मीठा बनाने की परियोजना को सागरमाला परियोजना से जोड़ने पर काम कर रहा है। अधिकारी ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर यह जानकारी दी।


सागरमाला का मकसद देश में बंदरगाहों को आधुनिक रूप देना है। इसका उद्देश्य बंदरगाह आधारित विकास को गति देना तथा तटवर्ती क्षेत्रों को विकसित करना है ताकि वृद्धि को गति मिल सके। अधिकारी ने कहा, हाल ही में चेन्नई को भारी जल संकट का सामना करना पड़ा। आखिर हम देश के बड़े तटीय क्षेत्रों में नमकीन समुद्री जल को मीठा बनाने का संयंत्र और उसे पाइप लाइन के जरिये लोगों को क्यों नहीं उपलब्ध करा सकते हैं।

इसे भी पढ़ें- महाराष्ट्र जलसंकट: उस्मानाबाद जिले के 550 गाँवों में पानी की कि‍ल्लत

पिछले साल जारी नीति आयोग के समग्र जल प्रबंधन सूचकांक के अनुसार देश के 60 करोड़ लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है और करीब दो लाख लोगों की साफ पानी के अभाव में मौत हो जाती है। रिपोर्ट में आशंका जतायी गयी थी कि 21 भारतीय शहरें खासकर बेंगलुरू, चेन्नई, दि‍ल्ली और हैदराबाद में 2020 तक पानी की कि‍ल्लत होगी। पिछले साल गुजरात सरकार ने मीठा पानी का संयंत्र लगाने को लेकर इस्राइल से तकनीकी सहायता की मांग की थी।

गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2050 तक भारत और चीन पेयजल की भयानक संकट का सामना करेंगे। तब समुद्र का यह खारा पानी लोगों के लिए वरदान साबित होगा। इसके तहत जल शोधन का ऐसा तरीका तैयार किया गया है, जिससे आर्सेनिक और यूरेनियम युक्त पानी को भी पीने लायक बनाया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक दुनिया के लगभग 4 अरब लोग पेयजल में तब्दील होने वाले इस समुद्री पानी का प्रयोग करने लगेंगे।

वर्तमान समय में देश के 29 फीसदी विकास खण्ड या तो भूगर्भ जल के दयनीय स्तर पर हैं या चिंतनीय हैं और कुछ आंकड़ों के अनुसार 2030 तक लगभग 60 फीसदी ब्लाक चिंतनीय स्थिति में आ जायेंगे। भारत में 40 करोड़ लोग तटीय क्षेत्रों में रहते हैं। समुद्र के किनारे रहने के कारण इन्हें पीने के लिए शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है।(इनपुट भाषा)

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.