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काम पर लौट रहे मजदूर, मई माह में श्रमिकों की बाजार में मौजूदगी बढ़ने से सुधरे हालात : रिपोर्ट

कोरोना वायरस की वजह से अब तक बेरोजगारी की मार झेल रहे इन मजदूरों की बाजारों में उपलब्धता बढ़ी है और मई माह में श्रम बाजार में सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं।

Kushal MishraKushal Mishra   4 Jun 2020 2:57 PM GMT

काम पर लौट रहे मजदूर, मई माह में श्रमिकों की बाजार में मौजूदगी बढ़ने से सुधरे हालात : रिपोर्टसीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार देश में मई माह में श्रम बाजार की स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

कोरोना वायरस की वजह से अब तक बेरोजगारी की मार झेल रहे मजदूरों की बाजारों में उपलब्धता बढ़ी है और मई माह में श्रम बाजार में सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं। यह दावा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में किया है।

लॉकडाउन के दौरान अपने गाँव में दो महीने रहने के बाद दस दिन पहले ही काम की तलाश में वापस लखनऊ लौटे शिव कुमार निर्मल अब फिर से पेंटिंग का काम करने लगे हैं। वह अब रोज सुबह बाजार में आस-पास के कस्बों और शहरों से आये दूसरे मजदूरों के साथ खड़े दिखाई देते हैं।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर के रहने वाले शिव कुमार बताते हैं, "शुरुआत में करीब एक हफ्ता बिल्कुल काम नहीं मिला, क्योंकि लोगों को भी नहीं पता था कि मजदूर लोग काम पर वापस लौट रहे हैं। डर भी था कि कोई ग्राहक हमें काम के लिए ले भी जाएगा या नहीं, मगर अब धीरे-धीरे कुछ मजदूरों को काम मिल रहा है।"

सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार देश में मई माह में श्रम बाजार की स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। बाजारों में श्रम भागीदारी दर 35.6 प्रतिशत से बढ़कर मई में 38.2 प्रतिशत हो गयी है और रोजगार दर भी 27.2 से बढ़कर 29.2 प्रतिशत रिकॉर्ड की गयी है। हालांकि लॉकडाउन से पहले की तुलना में श्रम बाजार की स्थिति अभी भी काफी कमजोर बनी हुई है।

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कई उद्योगों में काम शुरू होने से मजदूरों को मिल रहा है काम।

रिपोर्ट में कमजोर स्थिति का आंकलन पिछले साल के आंकड़ों से किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष 2019-20 में मई माह में 40.4 करोड़ लोगों के पास रोजगार था, जबकि मई 2020 में यह आंकड़ा 30.3 करोड़ था यानी करीब 10 करोड़ लोग नौकरी से बाहर थे। फिर भी अप्रैल 2020 की तुलना में मई माह में रोजगार दर में सुधार देखे को मिल रहा है।

सीएमआईई ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मई माह में आंशिक रूप से लॉकडाउन खुलने के बाद देश में 2.1 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। इसमें से 1.44 करोड़ लोग दिहाड़ी मजदूर और छोटे व्यापारी रहे, वो वर्ग जिस पर लॉकडाउन की सबसे अधिक मार पड़ी।

इस रिपोर्ट पर सीएमआईई के प्रबंध निदेशक महेश व्यास ने अपने एक लेख में कहा, "लॉकडाउन में अप्रैल महीने में जो लोग सक्रिय श्रम बाजार छोड़ कर चले गए थे, मई में वापस आते दिख रहे हैं, ऐसे लोग जिन्होंने लॉकडाउन की वजह से अपने आपको बेरोजगार घोषित कर दिया था, मई में ऐसे बहुत से लोग वापस आये हैं और सक्रियता से काम की तलाश में हैं।"

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लॉकडाउन में आंशिक छूट मिलने के बाद काम की तलाश में वापस बाजारों में नजर आ रहे मजदूर।

तमिलनाडु के एक सिलाई सेंटर में लॉकडाउन के दौरान अपने और साथियों के साथ फंसी झारखण्ड के पश्चिमी सिंहभूम के चायबासा की रहने वाली नंदी कुमारी बताती हैं, "लॉकडाउन के बीच हमारे सेंटर से 30 महिलाएं ट्रेन से झारखण्ड चली गईं, जबकि कई महिलाएं यहीं रुक गयी हैं क्योंकि लॉकडाउन थोड़ा खुलने के बाद काम शुरू हो गया तो उन्होंने फिर से काम शुरू कर दिया है।" इस सिलाई सेंटर में झारखण्ड की 256 महिलाएं लॉकडाउन के दौरान फँस गयी थीं।

नंदी बताती हैं, "हमारी कई साथी ने आगे झारखण्ड में ही काम करने का फैसला किया है, इसलिए वो वापस चली गईं। हालाँकि उनमें से किसी को भी अभी तक काम नहीं मिला है।"

ऐसे में लॉकडाउन के आंशिक रूप से खुलने के बाद मजदूर बाजार में वापस काम की तलाश में लौट रहे हैं। सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार मई 2020 की शुरुवात में बेरोजगारी दर 23.5 पर बहुत अधिक थी, मगर 31 मई को अंतिम सप्ताह में बेरोजगारी की दर गिरकर 20.2 प्रतिशत हो गई। यह लॉकडाउन लागू होने के बाद से दर्ज की गई सबसे कम बेरोजगारी दर है।

इस रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों द्वारा की गई घोषणाओं से संकेत मिलता है कि लॉकडाउन में जून के दौरान और चरणों में छूट दी जा सकती है। ऐसे में श्रम भागीदारी दर के आंकड़ों में और सुधार दिख सकता है। हालांकि, ज्यादातर शुरुआती सुधार खराब गुणवत्ता वाली नौकरियों के होंगे। इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान पीड़ित परिवारों की आजीविका को हुए नुकसान की मरम्मत में बहुत लंबा समय लगेगा।

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