विश्व पुस्तक मेला : कहीं किताबों में दिखा ब्रह्मांण्ड, तो कहीं कविताओं के कार्ड देख हंस पड़े लोग

विश्व पुस्तक मेला : कहीं किताबों में दिखा ब्रह्मांण्ड, तो कहीं कविताओं के कार्ड देख हंस पड़े लोगविश्व पुस्तक मेला -2018 

अगर आपको किताबें पढ़ने का शौक है और आप दिल्ली के आस पास रहते हैं, तो आप विश्व पुस्तक मेले में ज़रूर गए होंगे। दिल्ली के प्रगति मैदान में छह से चौदह जनवरी के तक चले विश्व पुस्तक मेले में किताबों के शौकीनों की भीड़ देखी गई। पुस्तक मेले में युवा तो युवा, बड़ों ने भी खूब किताबे खरीदीं। आइये जानते हैं विश्व पुस्तक मेले से जुड़ी कुछ बातों कों -

पुस्तक मेले में करीब 10 लाख लोग हुए शामिल।

आज ई-बुक और इंटरनेट पर किताबों की भरमार है, ऐसे में विश्व पुस्तक मेले में आई किताबों को खरीदने में लोगों की खास रुचि दिखना एक बड़ी बात है। इस पुस्तक मेले में 450 भारतीय और 35 से अधिक विदेशी किताबों के प्रकाशकों ने हिस्सा लिया। हिंदी भाषा के अलावा इस बार दूसरी भाषाओं की किताबों की भी खूब मांग रही। नौ दिनों तक चले इस पुस्तक मेले में करीब 10 लाख किताबों के शौकीनों ने हिस्सा लिया , जो पिछले वर्ष से 20 फीसदी ज़्यादा थे।

कठपुतली से लेकर रेडियो एक्टिवीटी तक की किताबें थी मौजूद -

विश्व पुस्तक मेले में आई किताबों को खरीदने के लिए युवाओं ने खास दिलचस्पी दिखाई। मेले में गैजेट्स , अंतरिक्ष विज्ञान, स्पोर्टस और आध्यात्म पर आधारित किताबों को खूब पसंद किया गया। बच्चों के लिए खास तौर पर बनाए गए बाल मंडप में भारतीय लोककलाओं पर आधारित 'कठपुतली' , ' लिल्लीगोड़ी ' किताबों से लेकर रेडियो एक्टिव रेडिएशन थ्यौरी जैसी किताबें खूब खरीदी गईं।

बाल मंडप में लगाई गई किताबों को पढ़ते बच्चे।

मेले में दिखें कई मज़ेदार कविता कार्ड -

विश्व पुस्तक मेले में प्रकाशकों ने कई मज़ेदार , कविता कार्ड भी शामिल किए। इन कार्डों को देखकर लोगों के चेहरों पर मुस्कुराहत साफ दिखी। इकतारा प्रकाशन के कविता कार्ड पसंद किए गए। उदाहरण के तौर पर गाय और बूढ़ी अम्मा पर आधारित कविता कार्ड को देख लोग मुस्कुरा दिए।

गाय - ' कितनी भोली कितनी प्यारी, सब पशुओं में न्यारी गाय। सारा दूध हमें दे देती, आओ इसे पिला चाय।'

गाय पर बना कविता कार्ड ।

बूढ़ी अम्मा - ' अम्मा बूढ़ी छाने पूढ़ी , इतनी चौड़ी आसनसोल से सिलीगुड़ी। '

बूढ़ी दादी पर बना कविता कार्ड ।

पाठकों ने ट्विटर पर किया बुक फेयर को शुक्रिया -

विश्व पुस्तक मेले में अपनी पसंदीदा किताबें खरीदने के बाद पाठकों ने बुक स्टॉल की फोटो साझा करके ट्विटर पर किया अपनी खुशी का इज़हार।

ट्विटर पर छाया विश्व पुस्तक मेला।

इन पुस्तकों का हुआ लोकार्पण -

पुस्तक मेले में मृदुला सिन्हा की किताब 'सामाजिक सरोकार' के अंग्रेज़ी अनुवाद 'रिफ्लेक्शन' , नंदकिशोर पांडे की लिखी गई पुुस्तक ' संत साहित्य की समझ ' और डॉ. बल्देव शर्मा की किताब ' राष्ट्रीय चेतना के विविध आयाम ' जैसी पुस्तकों का लोकार्पत किया गया।

विश्व पुस्तक मेले में किए गए कई प्रयोग -

इस बार विश्व पुस्तक मेले में पठकों को लुभाने और आयोजन को बड़ा बनाने के लिए कई प्रयोग किए गए। इसमें मेले में विशेष रूप से इको फ्रेंडली सामानों से बनाया गया मंडप , कुछ चुनिंदा किताबों के कलाकारों के ऊपर नाटकों का आयोजन और मोबाइल की मदद से पाठकों को कहानियां सुनाने जैसे प्रयोग किए गए। मेले में यूपोपीय संघ के सदस्य देश भी शामिल हुए ।

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