मदर मिल्क बैंकों में जमा करिए दूध, शिशुमृत्यु दर कम करने में होगी मदद

Neetu SinghNeetu Singh   3 Aug 2019 6:15 AM GMT

मदर मिल्क बैंकों में जमा करिए दूध, शिशुमृत्यु दर कम करने में होगी मददराजस्थान के उदयपुर में उत्तर भारत की पहली ‘दिव्य मदर मिल्क बैंक’ वर्ष 2013 में बनी।

लखनऊ। शिशु के जन्म से लेकर छह माह तक स्तनपान कराने से शिशुमृत्यु दर काफी हद तक कम किया जा सकता है। राजस्थान के उदयपुर में उत्तर भारत की पहली 'दिव्य मदर मिल्क बैंक' वर्ष 2013 में बनी। जो महिलाओं से न सिर्फ दूध इकट्ठा करती है बल्कि जरूरतमंद बच्चों तक वो दूध पहुँचाने का भी कार्य करती है।

राजस्थान के उदयपुर जिले में 'माँ भगवती विकास संस्थान' के संस्थापक योग गुरु देवेन्द्र अग्रवाल 'दिव्य मदर मिल्क बैंक' खोलने के पीछे की सोंच गाँव कनेक्शन को फ़ोन पर साझा करते हुए बताते हैं, "कुल बच्चों की जो मौतें होती है उसमें से 70 प्रतिशत बच्चों की मौत निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से होती हैं जिसे माँ के दूध से आसानी से बचाया जा सकता है, कुल मौतों में से 70 प्रतिशत बच्चों की मौतें जन्म के एक माह के अन्दर हो जाती है ।"

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वो आगे बताते हैं, "जन्म के बाद शिशु को छह माह तक सिर्फ माँ का दूध देना चाहिए, हर बच्चे को जन्म लेने के बाद जीने का अधिकार है, इन छह महीनों में स्तनपान कराने से इन्हें जिन्दगी मिलने के साथ-साथ जिन्दगी भर के लिए इनका मानसिक, शारीरिक, और भावनात्मक विकास होता है, इसलिए हर जगह मदर मिल्क बनने की आवश्यकता है।"

दिल्ली के कलावती अस्पताल और राजस्थान में चल रही मदर मिल्क बैंकों की तर्ज पर अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भी मदर मिल्क बैंक बनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। लखनऊ के केजीएमयू और पीजीआई ने मदर बैंक बनाने के प्रति अपना रुझान दिखाया है ये बात स्तनपान सप्ताह के एक प्रेस कांफ्रेंस में नेशनल हेल्थ मिशन के मिशन डायरेक्टर आलोक वर्मा ने कही थी।

यूनिसेफ और डब्लूएचओ द्वारा जारी ग्लोबल ब्रेस्ट फीडिंग स्कोर कार्ड में कहा गया है कि भारत में अपर्याप्त स्तनपान की वजह से असामयिक मृत्यु व अन्य नुकसान से अर्थव्यवस्था को 89,446 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। भारत में लगभग हर वर्ष 99,499 बच्चे डायरिया और निमोनिया की वजह से मर रहे हैं, जिन्हें पर्याप्त मात्रा में स्तनपान करने से बचाया जा सकता है।

रिपोर्ट कार्ड में ये भी कहा गया है कि छह माह तक स्तनपान न कराने से जहाँ एक तरफ बच्चों को डायरिया और निमोनिया जैसी गम्भीर बीमारियाँ हो जाती हैं वहीं दूसरी तरफ महिलाएं ओवरी और स्तन कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार चीन, भारत, नाइजीरिया, मैक्सिको और इंडोनेशिया में पर्याप्त स्तनपान न कराने से हर साल 23,6000 बच्चों की मौत हो जाती है इन मौतों एवम सम्बंधित नुकसान की वजह से इन पांच देशो को आने वाले समय में हर साल लगभग 7.59 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान पहुंचने की सम्भावना है।

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गुरु देवेन्द्र अग्रवाल ने अप्रैल 2013 में 'दिव्य मदर मिल्क बैंक' की शुरुवात की थी। अबतक इस बैंक में 14226 माताओं ने 28316 बार में कुल 2825240 एमएल दूध दान किया है। जिसमे एनआईसीयू में भारती 9099 नवजात बच्चों को लाभान्वित करते हुए 80386 यूनिट दूध उपलभ्ध कराया गया है। गुरु देवेन्द्र अग्रवाल ने बताया है कि दिव्य मदर मिल्क बैंक में माँ का दूध पर्याप्त मात्रा में स्टॉक है पूरे राजस्थान में 8644 यूनिट माँ का दूध स्टॉक में है। ब्रेस्ट फीडिंग क्लीनिक के तहत 17452 माताएं जो किन्ही कारण अपने बच्चों को स्तनपान कराने में सक्षम नहीं थी उन माताओं को 34351 बार के प्रयासों के बाद स्तनपान में सक्षम बनाया गया है साथ ही 381033 एमएल उन्ही का दूध उन्ही के नवजात को उपलभ्ध कराया गया है।

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नेशनल हेल्थ मिशन के मिशन डायरेक्टर आलोक वर्मा का कहना है, "जिन माओं का अपने बच्चे के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं निकलता है, जो बच्चे बीमार हैं या फिर जिन्हें दूध नहीं मिलता है उनके लिए मदर बैंक कारगर होगी, हम प्लान कर रहे हैं यहाँ भी मदर बैंक का निर्माण किया जा सके।" वहीं केजीएमयू के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसएन संखवार ने मदर मिल्क बैंक की सराहना करते हुए बताया, "अगर मदर मिल्क बैंक खुलती है तो ये एक अच्छा प्रयास होगा, माँ के दूध में सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बच्चे के लिए जरूरी होते हैं, बाल विभाग मदर मिल्क बैंक खोलने की तैयारी में जुटा है जल्द ही बनने की उम्मीद है।"

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राजस्थान में उत्तर भारत की पहली 'दिव्य मदर मिल्क बैंक' बनने के बाद वर्तमान समय में यहाँ 11 मदर मिल्क बैंक नम चुकी हैं। उदयपुर के रविन्द्र नाथ मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ बीएल मेघवाल ने गाँव कनेक्शन को फ़ोन पर बताया, "तमाम शोधों के बाद एक चीज सामने आयी है कि अगर बच्चे को जन्म के छह माह तक पर्याप्त माँ का दूध मिलता है तो 20-25 प्रतिशत तक शिशुमृत्यु दर कम कर सकते हैं, लेकिन देखा गया है कई कारणों की वजह से बच्चों को पर्याप्त मात्रा में दूध मिल नहीं पाता है, सभी बच्चों को दूध मिले इसलिए देवेन्द्र अग्रवाल जी ने दिव्य मदर बैंक की नीव रखी, अप्रैल 2017 में इस मिल्क बैंक को एनजीओ से सरकारी विभाग के महाराणा भूपाल राजकीय अस्पताल रविन्द्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज को सौंप दी गयी है।"

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वो आगे बताते हैं, "जब कोई माँ दूध डोनेट करने आती है तो सबसे पहले उसके स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाती है और ये देखा जाता है इनमे किसी तरह की कोई बीमारी न हो तभी किसी माँ का दूध लिया जा सकता है, दूध को माइनस 20 डिग्री पर रखा जाता है ये दूध छह माह तक खराब नहीं होता है, कम्युनिटी मिल्क बैंक करने वाला ये पहला राज्य है।" इस मिल्क बैंक में प्रतिदिन 15-20 माताएं दूध डोनेट करने के लियी आती हैं। ये दूध अस्पताल में मौजूद बच्चों जरूरत पड़ने पर डाक्टर की मांग पर दिया जाता है साथ ही समुदाय के जरूरतमंद बच्चों को फ्री में दिया जाता है।

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