विश्व मृदा दिवस विशेष: सिक्किम के टेमी चाय बागान से सीख ले सकते हैं देश के दूसरे चाय बागान

Ashwani NigamAshwani Nigam   5 Dec 2017 12:03 PM GMT

विश्व मृदा दिवस विशेष: सिक्किम के टेमी चाय बागान से सीख ले सकते हैं देश के दूसरे चाय बागानचाय का बागान

लखनऊ। देश में घट रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति से लोगों को आगाह करने और खेत की मिट्टी को सेहतमंद करने के लिए हर साल 5 दिसंबर के मृदा दिवस मनाया जाता है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से खेती ही नहीं बल्कि चाय बागानों पर संकट आ गया है। ऐसे में सिक्कम टेमी चाय बागान से सीख लेकर देश के दूसरे चाय बागाना भी बच सकते हैं। उचित रख-रखाव के अभाव और रियल स्टेट कारोबारियों की नजर से चाय बागानों पर खतरा मंडरा रहा है। टी बोर्ड इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल 1413 चाय बागानों में से 252 बागानों की स्थिति खराब है। सिक्कम के टेमी चाय बागान के मॉडल को अपनाकर यह चाय बागान अच्छी स्थिति में आ सकते हैं।

सिक्कम के टेमी चाय बागान में जैविक तरीका अपनाने से एक तरफ जहां टेमी चाय बागान की उत्पादन लागत कम हुई हैं वहीं यहां के आर्गनिक चाय को विश्व में बहुत बड़ा बाजार भी मिला है। टेमी चाय पर लंबे समय से शोध करने वाले खगेन्द्रमणि प्रधान ने बताया '' चाय उत्‍पादन की पूरी प्रक्रिया को परंपरागत से ऑर्गेनिक में बदलने से न केवल इसके लिए अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मांग बढ़ी है, बल्कि सिक्किम जाने वाले पर्यटक भी बड़ी संख्‍या में इसकी मांग करते हैं।''

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उन्होंने बताया कि चाय की ऑर्गेनिक खेती के लिए जैविक खाद और वर्मी-कम्‍पोस्‍ट खाद, नीम और अरंण्‍डी की बट्टियों के रूप में कीटनाशक भी उपलब्‍ध होते हैं। चाय बागान के पास लगभग 100 एकड़ वन भूमि भी है, जिससे बड़ी मात्रा में चाय बागान के लिए जैविक खाद-पदार्थों की पूर्ति हो जाती है, जो इसे आवश्‍यक संसाधनों की दृष्टि से आत्‍मनिर्भर बनाता है।

टेमी चाया बागान में चाय के पौधों को जैविक खाद देने से इस चाय बागान में पैदा होने वाली चाय के पत्‍तों की कीमत और सुगंध और बढ़ जाती है। इसी का नतीजा है कि टेमी चाय बागान ने स्विटज़रलैंड की बाजार नियंत्रण से संबंधित संस्‍था आईएमओके निर्देशों का पालन किया और जिसके बाद इसे वर्ष 2008 में टेमी चाय बागान को 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक का प्रमाण पत्र दिया। टेमी चाय बागान को लगातार भारतीय चाय बोर्ड ने भी अखिल भारतीय गुणवत्‍ता पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया है।

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टेमी चाय बागान की स्‍थापना सिक्किम के पूर्व नरेश चोग्‍याल के शासनकाल में 1969 में हुई थी और बड़े पैमाने पर इसका उत्‍पादन 1977 में शुरू हुआ। चाय बागान के रोजमर्रा के काम-काज को व्‍यवस्थित रखने के लिए 1974 में चाय बोर्ड की स्‍थापना की गई और बाद में यह सिक्किम सरकार के अंतर्गत उद्योग विभाग की सहायक कंपनी बन गई। टेमी चाय से जहां एक ओर 4 हजार से अधिक श्रमिकों और 30 कर्मचारियों को सीधे रोजगार मिलता है, वहीं यह कंपनी सरकारी क्षेत्र में रोजगार प्रदान करने वाली एक बड़ी कंपनी बन गई है।

चाय उत्पादन में दुनिया में दूसरे नंबर पर आने वाले भारत में कई चाय बागानों के अस्तित्व के पर खतरा मंडरा रहा है। चाय बोर्ड के अनुसार भारत में जितने में भी चाय बागान हैं उसमें से 18 प्रतिशत की स्थिति बहुत ही दयनीय है। देश के 16 राज्यों में चाय के बागाना हैं। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में देश का 95 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है। चाय बोर्ड के अनुसार पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय दुनिया की सबसे महंगी और खुशबूदार चाय मानी जाती है यहां पर लगभाग 86 बागान हैं, जहा चाय तैयार की जाती है।

चाय उत्पादन में असम देश का सबसे बड़ा राज्य है। तमिलनाडु का नीलगिरि पहाड़ भी चाय उत्पादन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। केरल का मुन्नार हिल स्टेशन भी एक ऐसी जगहहैं जहां बड़ी मात्रा में चाय बागान हैं। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा चाय भी देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन इसका अस्तित्व भी अब खतरे में है।

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