पानी पंचायत की महिलाओं ने एक साल में 180 तालाबों को बचाया, जानिए कैसे ?

पानी पंचायत की महिलाओं ने एक साल में 180 तालाबों को बचाया, जानिए कैसे ?तालाबों को बचा रहीं हैं उत्तर प्रदेश की ये महिलाएं 

विश्व जल दिवस विशेष : “पानी पंचायत की सदस्य बनने के बाद मुझे पता चला कि हम हर दिन कितना पानी बिना जरूरत के बर्बाद करते थे। अब मैं उतना ही पानी खर्च करती हूँ जिससे हमारी जरूरत पूरी हो सके #PaniConnection #water #पानी

उत्तर प्रदेश के 32 जिले जहां पानी की किल्लत सबसे ज्यादा थी , वहां तालाब के सुदृढ़ीकरण के लिए चार हजार से ज्यादा महिलाओं ने ‘पानी पंचायत टीम’ का हिस्सा बनकर 180 से ज्यादा तालाबों की देखरेख खुद की है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत पानी पंचायत सदस्यों का गठन किया गया था। जिसमें पंचायत स्तर पर सक्रिय महिलाओं को इसका हिस्सा बनाया गया है।

मुजफ्फरनगर की नीलम मलिक (42 वर्ष) जो पहले दिन में कई बाल्टी पानी जरूरत से ज्यादा खर्च करती थी, अचानक से अब उसने ये पानी बर्बाद करना बंद कर दिया था, और अब वो अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी बैठकर समझाने लगी थी कि पानी की बचत करना हम सबकी जिम्मेदारी है। नीलम की तरह प्रदेश की चार हजार से ज्यादा महिलाएं पानी पंचायत का हिस्सा बनकर खुद तो पानी की बचत कर ही रही हैं दूसरों को भी जागरूक करने का काम कर रही हैं।

नीलम बताती हैं, “पानी पंचायत की सदस्य बनने के बाद मुझे पता चला कि हम हर दिन कितना पानी बिना जरूरत के बर्बाद करते थे। अब मैं उतना ही पानी खर्च करती हूँ जिससे हमारी जरूरत पूरी हो सके। अगर किसी को पानी बर्बाद करते देखते हैं तो तकलीफ होती है उसे भी समझाते हैं।" नीलम जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर साहपुर ब्लॉक के बरला गाँव की रहने वाली एक महिला हैं।

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पानी पंचायत की महिलाओं ने 180 तालाबों की देखरेख पंचायत स्तर पर खुद की

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ‘इंटीग्रेटेड पॉन्ड मैनजमेंट’ कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 32 जिले में 200 तालाबों को पुनर्विकसित करने का कार्य लघु सिंचाई विभाग एवमं महिला समाख्या उत्तर प्रदेश द्वारा अप्रैल 2016 में शुरू किया गया था। जिसमें चार हजार से ज्यादा महिलाएं एवं 10 प्रतिशत पुरुषों की भागीदारी से पानी पंचायत का गठन किया गया।

इन 32 जिलों में 180 से ज्यादा तालाबों का सुदृढ़ीकरण पानी पंचायत के सदस्यों द्वारा हो चुका है। यूपी के 32 जिलों में विभाग की तरफ से मार्च 2018 में इस प्रोजेक्ट का समापन हो रहा है। इससे इन महिलाओं में निराशा भी है, जबकि ये महिलाएं हमेशा सक्रिय रूप से पानी पंचायत का हिस्सा बने रहना चाहती हैं। इन महिलाओं को तालाब के सुदृढ़ीकरण के साथ ही कम पानी में होने वाली उपज और तालाब के आस-पास पौधरोपण की जिम्मेदारी भी दी गयी थी।

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‘पानी पंचायत सदस्य’ पानी को बचाने की चर्चा के लिए बैठक करते हैं

महिला समाख्या की पानी पंचायत की स्टेट को-आर्डिनेटर रागिनी सिंह का कहना है, “ऐसा माना जाता है कि 80 फीसदी पानी का इस्तेमाल महिलाएं करती हैं इसलिए इस योजना में महिलाओं को शामिल किया गया। एक साल में इन महिलाओं ने 180 तालाबों की साफ-सफाई का जिम्मेदारी से ध्यान रखा।" उन्होंने आगे कहा, "लघु सिंचाई विभाग का ये एक अच्छा प्रयास था, लेकिन विभाग मार्च 2018 में इस प्रोग्राम को बंद कर रहा है इससे इन महिलाओं में निराशा है। अगर विभाग इस प्रोजेक्ट को बढ़ाता है तो पानी की बचत में इन महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।"

महिला समाख्या की महिलाओं ने जब जिले अनुसार तालाबों का सर्वे किया था तो एक बात सामने आई थी कि इन तालाबों पर गाँव के लोगों ने कब्जा कर लिया है और तालाब पूरे तरह से सूखे पड़े हैं। एक साल में इन महिलाओं ने न सिर्फ तालाबों को कब्जा से मुक्त कराया बल्कि सूखे पड़े तालाबों की खुदाई भी कराई।

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अब ये महिलाएं करने लगी हैं पानी की बचत

सहारनपुर की पानी पंचायत की जिला समन्यवक ममता चौधरी का कहना है, “पानी पंचायत की महिलाओं को ये शपथ दिलाई गयी है कि वह न तो खुद पानी को बर्बाद नहीं करेंगी, और न ही लोगों को करने देंगी, ये महिलाएं अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं।”

हमीरपुर जिले में पानी पंचायत की जिला समन्यवक जया यादव का कहना है, “तालाब की जगह लोगों ने पक्के घर बना लिए हैं जिससे तालाब का क्षेत्रफल कम हो गया है, इस वजह से ग्रामीण लोगों ने पानी पंचायत का हिस्सा बनने में कम रूचि दिखाई लेकिन पानी के महत्व को समझने के बाद ये महिलाएं इसका हिस्सा बनी। जिन तालाबों की मिट्टी खोदकर लोग बेच रहे थे, इन्होंने उन तालाबों की मिट्टी बेचने से रोका है।”

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पानी बचत में 10 प्रतिशत पुरुषों की भी है भागीदारी

ऐसे होता है पानी पंचायत का गठन

लघु सिंचाई विभाग ने पानी पंचायत के गठन में महिलाओं को इसलिए शामिल किया क्योंकि उनका मानना था कि महिलाएं ही इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं।

एक पानी पंचायत टीम में पंचायत स्तर की 15 से 20 सक्रिय महिलाओं और दो तीन पुरुषों को रखा जाता है। सदस्यता शुल्क के तौर पर एक सदस्य से 11 रुपए वार्षिक लिए जाते हैं।

इन सदस्यों की यह जिम्मेदारी होती है कि ये पंचायत स्तर पर जो भी जल के स्रोत हैं उनकी देखरेख करेंगी जिसमें तालाब की निगरानी मुख्य रूप से शामिल है।

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