ये है विश्व का तीसरे नंबर का सबसे बड़ा बीज बैंक, जहां संरक्षित हैं चार लाख से अधिक बीज 

ये है विश्व का तीसरे नंबर का सबसे बड़ा बीज बैंक, जहां संरक्षित हैं चार लाख से अधिक बीज चार लाख से अधिक बीज हैं संरक्षित

भविष्य में ये बीज बैंक किसानों के लिए मददगार साबित होगा, क्योंकि यहां पर देश के अलग-अलग राज्यों की खास किस्मों को लगातार संरक्षित किया जा रहा है।

यहां पर देश में विलुप्ति के कागार पर पहुंच गए बीज संरक्षित किए गए हैं, ताकि भविष्य में उन्हें उपयोग में लाया जा सके, चार लाख से अधिक बीजों के सरंक्षण के साथ ये विश्व का तीसरे नंबर का सबसे बड़ा बीज बैंक है।

विलुप्त हो रहे बीजों को संरक्षित करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत राष्ट्रीय पौध आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो ने राष्ट्रीय जीन बैंक बनाया है। इस जीन बैंक में माइनस 20 डिग्री पर 4,34,946 बीज संरक्षित किए गए हैं।

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राष्ट्रीय पौध आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो की जर्मप्लाज्म संरक्षण विभाग की हेड, प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. वीना गुप्ता बताती हैं, "भविष्य में ये बीज काम में लाए जा सके इस लिए इन बीजों को बीज बैंक में सरंक्षित किया जाता है, विभिन्न फसलों के चार लाख से अधिक बीज अभी तक इस बैंक में रखे जा चुके हैं, भविष्य में इनकी संख्या बढ़ेगी।"

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वो आगे बताती हैं, "हम अलग-अलग प्रदेशों की किस्मों को संरक्षित करते हैं, जैसे कि मक्का है, हिमाचल प्रदेश का अलग बीज होगा, तो उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश का अलग, ऐसे में अलग-अलग किस्मों के बीज रखे जाते हैं।" एनबीपीजीआर ने देश भर से 1976-77 के बाद से जर्मप्लाशम्स इकट्ठा करने का काम शुरू किया था। 1996-97 में संस्थान ने मिशन-मोड कार्यक्रम के तहत सबसे अधिक संख्या में जर्मप्लाशम्स (करीब एक लाख) एकत्र किए।

भविष्य में ये बीज काम में लाए जा सके इस लिए इन बीजों को बीज बैंक में सरंक्षित किया जाता है, विभिन्न फसलों के चार लाख से अधिक बीज अभी तक इस बैंक में रखे जा चुके हैं, भविष्य में इनकी संख्या बढ़ेगी।
डॉ. वीना गुप्ता, प्रमुख वैज्ञानिक, जर्मप्लाज्म संरक्षण विभाग, एनबीपीजीआर

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बैंगन की कई किस्में

पिछले कुछ वर्षों में देश में अनाज उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है, इसमें कहीं न कहीं न जीन बैंक की अहम भूमिका है। भारत का बीज जीन बैंक दुनिया के सबसे बड़े जीन बैंकों में से एक है।

राष्ट्रीय जीन बैंक में सावधानीपूर्वक विभिन्न खाद्य और बागवानी फसलों के चार लाख से अधिक बीज रखे गए हैं। ये बीज ब्रीडर को अच्छे किस्म के बीज विकसित कराने के लिए भी उपलब्ध किए जाते हैं। कृषि मंत्रालय द्वारा संचालित होता है, ये जीन बैंक चीन व अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बैंक है। जर्मप्लास्म्स या जीव के आनुवांशिक संसाधनों में लुप्तप्राय प्रजातियों, पारंपरिक बीज किस्में शामिल हैं।

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"इसमें करीब 1500 फसल प्रजातियों के जीन इकट्ठे किए गए हैं, जिनमें तिलहन, दलहन व औषधीय फसले शामिल हैं। इनकी अलग-अलग प्रदेशों की किस्मों को इकट्ठा किया है, हम न केवल जीन बचाने की कोशिश में हैं, साथ ही खाद्य सुरक्षा में भी ये बीज मददगार साबित हो सकते हैं, " डॉ. वीना गुप्ता ने कहा।

लहसुन और गेहूं की किस्में

बीज बैंक में बीज को रखने से पहले बीज को लंबे प्रक्रिया से गुजरना होता है। डॉ. वीना गुप्ता बताती हैं, "बीज को बैंक में रखने से पहले उसका म्वास्चर टेस्ट किया जाता है, उसके बाद पेस्ट कंट्रोल किया जाता है कि उसमें कोई कीट या उसका अंडा तो नहीं है, फिर उसका जर्मिनेशन टेस्ट किया जाता है, अगर 90 प्रतिशत तक जर्मिनेशन होता है तभी उसे बीज बैंक में रखा जाता है।"

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लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिए बीज को -18 से -20 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जाता है। मध्यम अवधि के भंडारण के लिए, भूमिगत जीन बैंक -8 से -10 डिग्री का तापमान रखता है। ब्यूरो ने जीन संरक्षण पहलों के लिए चावल, गेहूं, मक्का, बाजरा, चना, सरसों, बैंगन और आम सहित 15 श्रेणियों को प्राथमिकता दी है।

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