स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं सिर्फ शहरों तक सीमित, गाँवों की पहुंच से अभी भी दूर

स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं सिर्फ शहरों तक सीमित, गाँवों की पहुंच से अभी भी दूरस्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा शहरों तक सीमित।

रामकिशोर मिश्रा (55वर्ष) हर 15 दिन या महीने भर पर लखनऊ के लोहिया अस्पताल इलाज के लिए आना पड़ता है क्योंकि वो जहां रहते हैं वहां कोई बड़ा अस्पताल नहीं है।

रामकिशोर बताते हैं, “मैं बस्ती जिले का रहने वाला हूं, वहां पर कोई बड़ा अस्पताल नहीं है इसलिए मुझे इलाज के लिए शहर जाना पड़ता है। मेरी कमर में बहुत दर्द रहता है, डॉक्टर कहते हैं कोई नस दब रही है। यहां न्यूरो वाले कोई बढ़िया डाॅक्टर ही नहीं है।”

भारत की 70 फीसदी स्वास्थ्य सेवाएं देश के 20 बड़े शहरों तक ही सीमित है। अगर छोटे शहरों, कस्बों की बात करें तो वहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आज भी कमी है। इसके अलावा 30 फीसदी भारतीय हर साल स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च की वजह से गरीबी रेखा के नीचे आ जाते हैं।

प्रदेश के 55 जिलों में डाॅक्टरों की कमी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आंकड़ों के अनुसार 1.3 अरब लोगों की आबादी का इलाज करने के लिए भारत में बस 10 लाख एलोपैथिक डॉक्टर हैं। इसमें से भी केवल 1.1 लाख डॉक्टर सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्रों में इलाज कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 90 करोड़ लोगों के इलाज का बोझ इन्हीं कुछ डॉक्टरों पर हैं।

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देश में डॉक्टरों की भारी कमी है लेकिन इसके बावजूद इस ओर कोई कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे। यूपी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने विधानसभा में बताया है कि यूपी में कुल 18,382 डॉक्टरों के पद हैं, जिनमें 11,034 पद ही भरे हैं। कुल 7348 डॉक्टरों के पद खाली हैं। दरअसल यूपी के 75 में से 55 जिले ऐसे हैं, जहां डॉक्टरों की भारी कमी है। इसके अलावा 18 हजार पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। केवल 20 जिले ही ऐसे हैं, जहां डॉक्टर पर्याप्त संख्या में हैं।

प्राथमिक इलाज से भी वंचित हैं लोग

लखनऊ के माल ब्लॉक के केड़वा गाँव की कुसुमा देवी बताती हैं, गाँव का जो अस्पताल है सरकारी वहां डॉक्टर ठीक तरह से परेशानी ही नहीं सुनते“, आधी बात सुनकर दवा लिख देते हैं। न ठीक से बताते हैं कब खानी है, कितने बारे खानी है।”

पीडब्ल्यूसी और सीआईआई द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई रिपोर्ट में ये बात भी समाने आई कि भारत में 30 फीसदी लोग प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहते हैं।

गाँवों के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब

एक हजार की आबादी के लिए एक डॉक्टर के अंतर्राष्ट्रीय मानक की तुलना में हमारे देश में 1,700 लोगों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर 83.4 प्रतिशत सर्जन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों की 76.3 प्रतिशत, बाल रोग विशेषज्ञों की 82.1 प्रतिशत और सामान्य चिकिस्तकों की 83 प्रतिशत कमी है।"

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