योग कनेक्शन: साइटिका के दर्द को खत्म करेगा ये आसन

आप शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको अपने दैनिक जीवन के क्रियाकलापों में संतुलन बनाए रखना होगा। दैनिक क्रियाकलापों की तरह व्यायाम, योग आदि को भी अपनाना जरूरी है।

योग कनेक्शन:  साइटिका के दर्द को खत्म करेगा ये आसन

साइटिका शरीर की वो नस है जो रीढ़ की हडडी के बिल्कुल नीचे से जाती हुई पैर की एड़ी तक पहुंचती है। इस नाड़ी में जब सूजन और दर्द के कारण पीड़ा होती है तो इसे साइटिका दर्द कहते हैं। योगानंता, स्टूडियो ऑफ योगा की संस्थापक और योग विशेषज्ञ रेखा चर्चा कर रही हैं कुछ ऐसे योगासनों की जिनसे साइटिका दर्द पर काबू पाया जा सकता है।


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दण्डासन

सबसे पहले आसन पर पैरों को सामने फैला कर बैठ जाएं। इस दौरान दोनों पैरों को मिला कर रखें। पैरों की उंगलियां अंदर की तरफ तथा तलवे बाहर की तरफ जाने दें। अपने दोनों हाथों को अपने नितम्ब के बगल में रखें। अपनी कमर और गर्दन एकदम सीधी रखें। मन को शांत एवं चेहरे पर प्रसन्नता के भाव रखें। दण्डासन में आप 5 से 10 मिनट तक बने रह सकते हैं।


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शलभासन

सबसे पहले आसन पर आप पेट के बल लेट जाएं। अपनी हथेलियों को जांघों के नीचे रखें, दोनों एड़ियों को आपस में जोड़ लें। अब स्वास लेते हुए अपने पैरों को ऊपर ले जाएं, धीरे-धीरे स्वास लें एवं छोड़ें और इसी अवस्था में 30 सेकंड तक बने रहें। स्वास छोड़ते हुए पांव नीचे लाएं। इस प्रकार से यह एक चक्र हुआ। यह आसन आप 3 से 5 बार कर सकते हैं।


सुप्त पादांगुष्ठासन

सबसे पहले अपने आसन पर पीठ के बल लेट जाएं, दोनों पैरों की एड़ियों को मिलाकर कर रखें। अब धीरे से अपना दाहिना पैर उठाएं और इसे अपने पेट के पास लाने का प्रयास करें। अब दाहिने हाथ से दाहिने पैर का अंगूठा पकड़ें और इसी अवस्था में 30 सेकंड तक बने रहें। वापस जाने के लिए धीरे से अपने पैर का अंगूठा छोड़ दें। इसी प्रकार से दूसरे पैर से भी करें। दोनों पैरों से करने पर यह एक चक्र पूरा कहलाएगी। इस आसन को 3 से 4 चक्र तक कर सकते हैं।

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सर्वांगासन

सबसे पहले अपने आसन पर पीठ के बल लेट जाए। अपने दोनों हाथों को जंघाओं के पास रखें एवं धीरे धीरे दोनों पैरों को एक साथ पहले 30 डिग्री फिर 60 डिग्री और अंत में 90 डिग्री तक लेकर जाएं। हाथों का दवाब हिप्स पर बनाते हुए अपने पैरों को सिर की तरफ लेकर आएं। अपनी हथेलियों से अपनी पीठ को सहारा देते रहें। कोहनियों को आसन से लगा के रखें। शरीर धीरे धीरे सीधा करते जाएं और अपनी ठोड़ी को छाती से लगाने का प्रयास करें। क्षमतानुसार आसन में बने रहें। वापस आने के लिए धीरे से पहले 60 डिग्री पर उसके बाद 30 डिग्री और पैर धीरे से आसन पर रखें। ये आसन आप 3 से 4 चक्र कर सकते हैं।

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