किसानों के लिए अच्‍छी खबर, दलहन-तिलहन के बीज पर मिलेगा 75% अनुदान

योगी सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया, रबी 2018-19 में राज्य सरकार द्वारा देय विशेष अनुदान की नई व्यवस्था को कैबिनेट की स्वीकृति दी गई है।

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किसानों के लिए अच्‍छी खबर, दलहन-तिलहन के बीज पर मिलेगा 75% अनुदान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक में किसानों के लिए बीज अनुदान से संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसमें केंद्र सरकार द्वारा दलहनी व तिलहनी फसलों के बीज वितरण पर देय 60% अनुदान के साथ राज्य सरकार के 15% अतिरिक्त अनुदान देने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ये फैसले हुए।

बैठक के बाद योगी सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया, रबी 2018-19 में राज्य सरकार द्वारा देय विशेष अनुदान की नई व्यवस्था को कैबिनेट की स्वीकृति दी गई है। ये स्‍वीकृति केंद्र पोषित योजनाओं में विभिन्न फसलों की उन्नतशील प्रजातियों के प्रमाणित बीजों पर देय अनुदान में वृद्धि के फलस्वरूप की गई है। रबी 2018-19 में प्रमाणित बीजों के वितरण पर अनुदान योजना के तहत फसलों के सामान्य बीज वितरण पर केंद्र सरकार के 50% अनुदान के साथ राज्य सरकार भी 10% अनुदान देगी। बीज ग्राम योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा धान की फसलों के लिए देय 50% अनुदान के साथ राज्य सरकार भी 25% अनुदान देगी।''



श्रीकांत शर्मा ने बताया, ''केंद्र सरकार द्वारा दलहनी व तिलहनी फसलों के बीज वितरण पर देय 60% अनुदान के साथ राज्य सरकार 15% अतिरिक्त अनुदान देगी। किसानों को अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए प्रमाणित संकर बीज पर विशेष अनुदान मिलेगा। सुविधा का लाभ 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर दिया जाएगा।''

चावल और गेहूं की अपेक्षा दालों की पैदावार में कम बढ़ोतरी हुई

दुनियाभर में दालों की जितनी पैदावार होती है, उसमें भारत का योगदान लगभग Government will provide 75% subsidy25 फीसदी है जबकि खपत 28 फीसदी है। ऐसे में भारत को हर साल कनाडा, म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अफ्रीकन देशों से 2 से 6 मिलियन टन दाल आयात करना पड़ रहा है। इन वैज्ञानिकों ने अपने शोधपत्र में लिखा है कि हरित क्रांति (1964-1972) के समय भारत का एक मात्र लक्ष्य कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना था। इसमें चावल और गेंहूं पर काफी ध्यान दिया गया। बहुफसलीय विधि, बेहतर बीजों और कीटनाशकों के प्रयोग से इसमें सफलता भी पाई गई।

ये भी पढ़ें: भारत में दाल की कमी पूरी करने का खाका तैयार, इन 12 सुझावों से बढ़ सकती है पैदावार

1960-61 की तुलना में 2013-14 में गेहूं की पैदावार 225 फीसदी बढ़कर 106 मिलियन टन हो गई तो वहीं चावल की पैदावार में 808 फीसदी की वृद्धि हुई और वो 95 मिलियन टन तक पहुंच गई। जबकि इस दौरान दालों की पैदावार महज 47 फीसदी बढ़कर 12.5 मिलियन टन से 18.5 मिलियन टन ही हो पाई।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार अगले सीजन (2018-19) में देश में 2.4 करोड़ टन दालों की जरूरत पड़ सकती है लेकिन संभावित उत्पादन और भंडारण को देखते हुए ये भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले सीजन में दालों के आयात जरूरत नहीं पड़ेगी। दालों का उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ इसके आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा भी बचेगी।

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