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मध्‍यप्रदेश के छोटे से गांव से निकलकर मुंबई फैशन वीक में पहुंचा ये किसान

पुष्पेन्द्र वैद्य, कम्‍युनिटी जर्नलिस्‍ट

छिन्दवाड़ा। मुंबई लैक्मे फैशन वीक मंच पर बड़े-बड़े सेलिब्रिटी और मॉडल शिरकत करते हैं। आम नागरिक को वहां तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के एक युवा किसान ने अपने काम के जरिए उस मंच तक पहुंचने में सफलता हासिल की है। छिंदवाड़ा जिले का किसान अंकुश पाटिल ने मुंबई लैक्मे फैशन वीक के मंच पर जैविक कपास की खेत के कई फायदे गिनाए।

अंकुश पाटिल छिंदवाड़ा के जोबनी खापा के रहने वाले युवा किसान हैं। एमबीए की पढ़ाई कर चुके अंकुश ने नौकरी न कर खेती की तरफ रुख किया और जैविक कपास ऊगाना शुरू किया। यह काम उन्‍होंने तीन साल पहले ही शुरू किया है।

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अंकुश एमबीए करके उगा रहे हैं कपास

अंकुश बताते हैं, "वैसे तो जैविक कपास से बने कपड़े और रासायनिक कपास से बने कपड़ों में ज्यादा अंतर नहीं होता है। लेकिन जैविक कपास से बने कपड़ों से शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होती है।"

अंकुश पाटिल का मानना है कि जैविक कपास से बने कपड़ों से शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होती है। रासायनिक कपास से बने कपड़े को पहनने के बाद शरीर में खुलजी होती है, जि‍सका असर लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है।

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अंकुश तीन साल से उगा रहे हैं कपास

उन्‍होंने बताया, "मैं पहली बार मुंबई गया था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि लैक्मे फैशन वीक जैसे बड़े फैशन शो में कभी जाने का मौका भी मिलेगा। मैं जब वहां गया तो बड़े-बड़े फैशन डिजाइनरों को जैविक कपास से बनने वाले कपड़ों के फायदे के बारे में बताया।

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