खेत में कीटनाशक छिड़कते हुए गई एक और जान

Pesticide, fertilizer use in India, Pesticide use in indiaखेत में कीटनाशक का छिड़काव करता किसान। (फाइल फोटो-गांव कनेक्शन)

जींद । जहरीले कीटनाशक ने एक और जान ले ली है। हरियाणा के जींद जिले के गांव ईगराह के निकट बाग में स्प्रे करने के दौरान कीटनाशक के प्रभाव में आने से युवती की मौत हो गई। सदर थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया।

हरियाणा के जिंद के गांव रामराये निवासी बालकिशन ने नजदीकी गांव ईगराह में बाग को ठेके पर लिया हुआ है। बुधवार सुबह बालकिशन बाग में कीटनाशकों का छिड़काव कर रहा था, और उसकी 17 वर्षीय बेटी ट्विंकल पानी लाकर दे रही थी। उसी दौरान ट्विंकल कीटनाशक के प्रभाव में आकर बेहोश होकर गिर गई। उन्होंने बताया कि परिजनों द्वारा उसे अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

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घटना की सूचना पाकर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और मृतका के शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया। सदर थाना के जांच अधिकारी नरेश ने बताया कि स्प्रे छिड़काव के दौरान युवती कीटनाशक के प्रभाव में आ गई थी। जिसके चलते युवती की मौत हो गई। शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया गया है।


गौरतलब है कि देश में कीटनाशकों से लगातार मौतें हो रही हैं। इसी को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में भारत में 18 कीटनाशकों को प्रतिबंधित किया था। इसमें बेनोमाइज, कार्बराइल, डायजिनोन, फेनारियोल, फेथिओन, लितुरोन, मिथाक्सी इथाइल, मरकरी क्लोराइड, सोडियम साइनाइट, थियोमेटोन, टाइडेफोर्म, ट्राइफ्लूरेलिन, अलाक्लोर, डाइक्लोरोवास, फोरेट, फोस्फोमिडोन, ट्रायोजोफोज व ट्राइक्लोरोफोर्न शामिल हैं।

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भारत में पेस्टीसाइड का बढ़ता करोबार

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आठ से नौ फ़ीसदी सालाना दर की हिसाब से पेस्टीसाइड की खपत बढ़ रही है। हालांकि पेस्टीसाइड के बाजार में विदेशी कंपनियों क ज्यादा भागीदारी है। क्योंकि भारत में कीटनाशक क्षेत्र वर्ष 1968 के इंसैक्टेसाइड कानून से संचालित होता है। इस कानून की जटिल प्रक्रिया की वजह से भारतीय कंपनियों का इस क्षेत्र में काम करना मुश्किल होता है।

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