'गैंगरेप हुआ है इसके साथ, अब कौन करेगा तुम्हारी बेटी से शादी' ?

सीरीज 'बलात्कार के बाद' भाग-5 "कभी अच्छे कपड़े पहन लेती हूं तो लोग कहते हैं इतना सब हो गया तब भी बनठन के रहती है। स्कूल में सहेलियां मजाक में पूछती थी क्या-क्या हुआ उस दिन तुम्हारे साथ? -पीड़िता

Neetu SinghNeetu Singh   3 Dec 2019 1:30 PM GMT

गैंगरेप हुआ है इसके साथ, अब कौन करेगा तुम्हारी बेटी से शादी ?

फतेहपुर। पहले नाबालिग बेटी का अपहरण, तीन दिन तक गैंगरेप, एफआईआर लिखाने के लिए चक्कर काटना, लगातार गाँव में पंचायत में बैठना और आरोपी से ही शादी का दबाव। एक पिता के लिए यह सब आसमान टूटने जैसा था, लेकिन यह सब उस बदनसीब को झेलना पड़ा।

"तुम्हारी बेटी का रेप हुआ है अब कौन करेगा इससे शादी? जिसने रेप किया है उसी से कर दो शादी," ये शब्द बोलते हुए पीड़िता के पिता का गला रुंध गया।

उन्होंने आगे बताया, "मैं मजदूर आदमी हूं ज्यादा देश दुनिया की समझ नहीं है, इसलिए सबके कहने पर बेटी की शादी के लिए तैयार हो गया। बस मैं चाहता था वो लिखा-पढ़ी करके शादी करें जिसके लिए वो (आरोपी परिवार) तैयार नहीं हुए।"

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के एक गांव के रहने वाले और मजदूरी करके जीविका चलाने इस बेबस पिता की नाबालिग बेटी का पांच जनवरी, 2018 को अपहरण हो गया, जब वह शौच के लिए गयी थी। गाँव के कुछ लोग अपहरण करके ले गये और तीन दिन तक उसके साथ गैंगरेप किया। तीसरे दिन आरोपी शाम को गाँव के बाहर पीड़िता को छोड़कर चले गये।

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पीड़िता के पिता जिन्होंने बेटी के न्याय के लिए थाने के लगाये अनगिनत चक्कर

हर तरफ से हिम्मत हार चुके पीड़िता के पिता न चाहते हुए भी बेटी की शादी के लिए तैयार हो गए। घटना के बाद 15 दिन तक लगातार गाँव में इस मसले पर पंचायत बैठी, बाद में आरोपी परिवार लिखा-पढ़ी कराकर शादी के लिए तैयार नहीं हुए। पूरी तरह से टूट चुके पीड़िता के पिता कोर्ट में न्याय की गुहार लगाते हैं, जिससे बेटी को न्याय दिला सकें।

उस दिन की घटना को याद करते हुए पीड़िता के पिता बताते हैं, "जब कुछ देर तक बेटी शौच करके घर नहीं आयी तो हम इधर-उधर खोजने लगे। देर रात और अगले सुबह तक जब उसकी कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस चौकी पर अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाने गये। चौकीवालों ने कहा थाने जाओ, जब थाने गये तो दरोगा बोले कल शाम तक तुम्हारी बेटी आ जायेगी।"

छप्पर के नीचे बैठे पीड़िता के पिता पुलिस के इस रवैये को कोस रहे थे, "जब दूसरे दिन बिटिया नहीं आयी फिर हम थाने गये, दरोगा ने झल्लाकर कहा आ जायेगी कल शाम को। मरता क्या न करता...मैं चुपचाप घर आ गया। बेटी का इंतजार करने के आलावा हमारे पास दूसरा चारा नहीं था।"

अपनी अपह्रत बेटी की वापसी का घर में बैठ कर इंतजार करना एक पिता के लिए कितना भारी होता है यह समझाया भी नहीं जा सकता।

पीड़िता को घर से बाहर निकलने पर लोग देते हैं ताने

नाम न छापने की शर्त पर पीड़िता के एक पड़ोसी ने बताया, "वो लोग (आरोपी) कई लोगों के साथ गलत काम कर चुके हैं पर कभी किसी ने उनके खिलाफ़ आवाज़ नहीं उठाई इसलिए उनकी हिम्मत बढ़ी हुई है। जब ये लोग (पीड़िता का परिवार) थाने गये तो पुलिस ने भी इन्हें गरीब समझकर टहला दिया। शादी का वो लोग इन्हें झूठा प्रलोभन दे रहे थे जिससे वो बच सकें।"

उस पड़ोसी ने पहचान छिपाते हुए आगे कहा, "आरोपी चाह रहे थे ऐसे ही शादी करके एक दो महीने रख लेंगे फिर छोड़ देंगे, फिर पीड़िता का परिवार केस नहीं कर पायेगा। पर एक-दो लोगों ने लड़की के पिता को सलाह दी कि रजिस्टर्ड शादी कराओ, जिसमें वो लोग पीछे हट गये।"

इस मामले में महिला मुद्दों पर नि:शुल्क काम करने वाली आली संस्था की वकील रेनू मिश्रा कहती हैं, "अगर पुलिस यौनिक हिंसा जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं करती है या फिर देरी करती है तो पुलिस के खिलाफ आईपीसी सेक्शन 166 ए (सी) के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाए। दूसरा निर्भया के केस के बाद पाक्सो जैसे मामलों में पुलिस के खिलाफ लापरवाही बरने पर सेक्शन 21बी के तहत एफआईआर का प्रावधान है।" वो आगे बताती हैं, "जानकारी के आभाव में पुलिस के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवा पाता, जिसकी वजह से पुलिस पर कार्रवाई नहीं हो पाती।"

चाहरदीवारी के अन्दर कैद होकर रह गया इस बेटी का बचपन

पीड़िता से जब 'गाँव कनेक्शन' ने अकेले में बात करनी चाही तो वो बिना कुछ बोले रोने लगी। काफी समझाने के बाद जब वो चुप हुई तो बोली, "लोग मम्मी-पापा से कहते हैं शादी कर दो इसकी, इसने तो सबकी नाक कटवा दी। जितना जल्दी हो इसे गांव से भगा दो। कभी अच्छे कपड़े पहन लेती हूं तो लोग कहते हैं इतना सब हो गया तब भी बनठन के रहती है। स्कूल में सहेलियां मजाक में पूंछती थी क्या-क्या हुआ तुम्हारे साथ?"

ये समाज के कुछ ऐसे ताने थे जो पीड़िता को परेशान करते थे। घर के अन्दर कैद होने को मजबूर करते थे, उसकी कोई गलती न होने पर भी उसे गुनहगार ठहराते थे। ऐसे विषम हालातों में भी पीड़िता के परिवार ने उसकी पढ़ाई जारी रखी और उसने दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की।

पीड़िता ने कहा, "स्कूल जाने के समय कई बार उसके पिता (आरोपी) ने मुझे धमकी दी कि मामले में सुलह कर लो नहीं तो तुम्हारे बाप और भाई को जान से मार डालेंगे। हमें तो ये सब बातें सुनकर डर भी लगता था पर पापा ने कहा हम तुम्हें न्याय दिलाकर रहेंगे।"

अपनी मजदूरी का काम छोड़कर पीड़िता के गरीब पिता ने थाने, कोर्ट, कचहरी के अनगिनत चक्कर काटे। सुलह समझौते की धमकियों से परेशान पीड़िता के पिता कहते हैं, "मैं इस घटना के बाद से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा था, टूट गया था पूरी तरह से। इस घटना के बाद अपनी गरीबी और पढ़े-लिखे न होने पर मैं बहुत रोया। हजारों की भीड़ में कोई अपना नजर नहीं आ रहा था जो मुझसे ये कह दे चलो हम तुम्हारी बेटी को न्याय दिलाने में मदद करेंगे।" पीड़िता के पिता अपनी गरीबी, समाज के दुर्व्यवहार और पुलिस के असंवेदनशील रवैये को बार-बार कोस रहे थे।

पीड़िता की मां जिनसे लोग कहते हैं जल्दी कर दो अपनी बेटी की शादी

पीड़िता अपने दो भाईयों में अकेली बहन है। घटना के बाद से बड़े भाई को घर से बाहर रखना पड़ रहा है, क्योंकि उसे जान से मारने की लगातार धमकियां मिलती हैं। मामला कोर्ट में दर्ज कराने के बाद दो आरोपी घटना के लगभग डेढ़ साल बाद जेल जा चुके हैं जबकि एक आरोपी फरार है।

पीड़िता की मां कहती है, "उन्हें डेढ़ साल बाद जेल पहुंचाना हमारे लिए बहुत कठिन काम था। समाज के ताने तो थे ही साथ में लाख डेढ़ लाख रुपए के कर्जदार भी हो गये। अब कभी वो छूटकर न आएं, कर्ज़ का पैसा तो हम कमाकर चुका देंगे।"

वकील रेनू मिश्रा कहती हैं, "ऐसे मामलों में आरोपियों को उम्र कैद से लेकर मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान है। इसके आलावा पीड़िता के पुनर्वास के लिए रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान प्रकोष्ठ से सात लाख रुपए की मुआवजा राशि मिलती है।" जबकि अभी तक पीड़िता परिवार को इस मदद के सन्दर्भ में कोई जानकारी ही नहीं है।

पीड़िता की मां ने मुआवजे की राशि के बारे में कहा, "अगर ये पैसा मिल जायेगा तो सही रहेगा इससे कर्ज उतर जाएगा और बेटी को आगे की पढ़ाई करवा लेंगे। इन पैसों से ज्यादा जरूरी है कि उन्हें (आरोपियों) कड़ी से कड़ी सजा मिले। लोगों ने बहुत ताने दिए हैं, हम तो उन्हें पलटकर कभी जबाब भी नहीं दे सकते।"


पीड़ित परिवार को इस घटना के दौरान आयी कई मुश्किलों की भरपाई तो कोई नहीं कर सकता पर ये मुआवजा राशि बेटी की पढ़ाई और शादी में मदद जरुर करेगी।

फतेहपुर जिले के जिला प्रोबेशन अधिकारी राकेश सोनकर मुआवजा राशि के सन्दर्भ में कहते हैं, "पुलिस की तरफ से मामला पोर्टल पर दर्ज़ होता है फिर मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपनी रिपोर्ट लगाते हैं इसके बाद हम जिलास्तर पर बनी समिति में बैठक करते हैं तब निदेशालय की तरफ से पीड़िता को राशि मिलती है।" जब इस केस का उनसे जिक्र किया तो उन्होंने कहा, "पुलिस ही इसको पोर्टल पर दर्ज करवाए।"

जिले स्तर पर मिलने वाली मुआवजा राशि की जिम्मेदारी पीड़ित परिवार को कौन देगा, उन्हें कैसे और घटना के कितने दिनों बाद इसका लाभ मिलेगा इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं होती।

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भाग-3 बलात्कार के बाद सीरीज पार्ट-3 'बिटिया जब घटना को याद करती है तो रोने लगती है'

भाग-4 "गैंगरेप की घटना के बाद लोग मेरे ही साथ अछूतों सा व्यवहार करते हैं..."



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