देशी गायों का दूध बीमारियों से लड़ने में सक्षम

देशी गायों का दूध बीमारियों से लड़ने में सक्षमgaonconnection

लखनऊ। देशी नस्ल की गायें दूध भले ही कम देती हों, पर इनका दूध कई बीमारियों से लड़ने में विदेशी गायों से ज्यादा क्षमता रखता है। 

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक केथ वूडफोर्ड ने अपनी किताब ‘डेविल इन द मिल्क’ में यह प्रकाशित किया है कि भारत की देसी नस्ल की गायों में ए-2 बीटा कैसिन प्रोटीन होता है, जो मनुष्य के शरीर का कई रोगों से बचाने के साथ-साथ लाभदायक होता है। वहीं विदेशी नस्ल की गायों में ए-1 बीटा कैसिन प्रोटीन पाया जाता है, जिसमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती है और हानिकारक माना गया है।

मेरठ स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. राहुल बसंल बताते हैं, “विदेशी नस्ल की गाय एचएफ और जर्सी के दूध में बीसीएम-7 तत्व पाया जाता है। जो मानव शरीर में शुगर, दिल का दौरा, कैंसर, आटिज्म जैसे रोग पैदा कर सकता है। इसी को देखते हुए विदेशों में भारतीय गायों का संरक्षण किया जा रहा है। इसके साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में ए-2 कोर्पोरेशन नाम की संस्था बनाकर ए-2 मिल्क का उत्पादन किया जाता है, इसे अच्छी कीमत पर बेचा भी जा रहा है।”

गाय के दूध में बीटाकैसिन और बीटा कैरोटिन नाम के प्रोटीन होते हैं। बीटा कैरोटिन सभी गायों के दूध में पाया जाता है, जो विटामिन का एक स्रोत है। दूसरा बीटाकेसिन दो प्रकार का होता है-ए-1 और दूसरा ए-2। 

यूपी पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बीबीएस यादव बताते हैं, ''कई शोध हुए हैं जिनमें विदेशी गायों में मौजूद ए-1 प्रोटीन से मानव शरीर में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर आदि कई बीमारियों के तथ्य सामने आए हैं। लोग ज्यादा से ज्यादा देशी नस्लों की गाय के दूध का सेवन करें, इसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही हैं।”

डॉ. यादव आगे बताते हैं, “देसी नस्लों को बचाने के लिए वाराणसी में गंगातीरी गाय का संरक्षण और संवर्धन के किया जा रहा है। अपने यहां संकर गायों के दूध में ए-1 ए-2 का मिश्रण भी पाया जाता है, जिसमें ए-1 प्रोटीन ही ज्यादा होता है।” देसी गाय के दूध को अच्छा बताते हुए मेरठ स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि यूनिवसिटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीके साहू कहते हैं, “देसी गायों का दूध बच्चों के मानसिक विकास में काफी सहायक है। देसी गायों का दूध आसानी से पच जाता है। अपने यहां जो विदेशी और संकर गाय हैं वो दूध की उत्पादकता ही बढ़ाती हैं लेकिन गुणवत्ता देसी गायों के दूध में ही होती है।”

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