धीमी पड़ी गेहूं ख़रीद, कैसे पूरा होगा लक्ष्य?

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लखनऊ। प्रदेश में गेहूं खरीद सुस्त गति से चल रही है। 25 दिनों में अब तक नौ खरीद एजेसिंयों से मात्र पौन दो लाख टन की गेहूं की खरीद हो सकी। खरीद की रफ्तार अगर ऐसी रही तो इसकी लक्ष्य पूर्ति तय कर पाना मुश्किल लगता है।

प्रदेश में इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य 45 लाख टन रखा गया है। अपर आयुक्त विपणन, खाद्य एवं रसद एके सिंह ने बताया, “ सरकार पीसीफ, यूपी एग्रो, यूपीएसएस, एसएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम, एनसीसीएफ, खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम और मल्टी सेक्टोरियल सोसाइटी के जरिए गेहूं की खरीदारी की जा रही है।” वो आगे बताते हैं, “ ये एजेंसियां 1525 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों से गेहूं खरीद रही है। एक अप्रैल से गेहूं की खरीदारी हो चुकी है। अब तक सिर्फ पौने दो लाख टन ही खरीद हो सकी है, जबकि 70 फीसद गेहूं की फसल करीब कट चुकी है। लेकिन गेहूं केंद्रों पर किसान नहीं दिखाई दे रहे है। इसका कारण खुदरा बाजार में क्रय केंद्रों से ज्यादा कीमत मिलना बताया जा रहा है। किसानों के रूठने के कारण रोजाना औसतन खरीद दर 70 टन बनी है।

तेजी से होगी गेहूं की कटान

प्रदेश में पछैती गेहूं की फसल पक कर तैयार खड़ी है। करीब 30 फीसद फसल काटी जानी बाकी रह गई है। कृषि विभाग के सूत्रों के मुताबिक अग्निकांड की घटनाएं काफी हो रही है। लिहाजा तैयार खड़ी फसल को किसान तेजी से काटेंगे।

खुले बाजार में मिल रहा किसानों को अच्छा भाव

इस वर्ष भी गेहूं खरीद लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। प्रदेश में सूखा पड़ने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है। सरकार ने 1525 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है। जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 1600 से 1800 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। डंडइयां बाजार में गेहूं बेचने आए बीकेटी तहसील क्षेत्र के साधुपुर के किसान बलराम यादव ने बताया, बाजार में उन्होंने अपना गेहूं 1700 रुपए प्रति क्विंटल बेचा।

हालांकि आढ़ती को पांच फीसद कमीशन देना पड़ा, पर कीमत भी नकद मिल गई। उन्होंने बताया, सरकारी क्रय केंद्र में भाव कम मिल रही है। वहीं भुगतान होने में देरी हो जाती है।

रिपोर्टर - जसवंत सोनकर

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