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'न्यायाधीशों के सम्मान में रुक जाएं, उन्हें पहले निकलने दें' - इलाहाबाद हाइकोर्ट

न्यायाधीशों के सम्मान में रुक जाएं, उन्हें पहले निकलने दें - इलाहाबाद हाइकोर्ट

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जरनल ने एक आफिस ऑर्डर जारी कर कहा है कि जब माननीय न्यायमूर्ति कोर्ट में जाने के लिए गैलरी से गुजरते हैं तो उनके सम्मान में वहां से गुजरने वाले अधिकारी व अन्य लोग रुक जाएं, और माननीय न्यायमूर्तियों को पहले निकल जाने दें। गैलरी में मौजूद लोग तब तक इंतजार करें जब तक माननीय न्यायामूर्ति निकल न जाएं।

रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी आफिस ऑर्डर में कहा गया है कि ऐसा अमूमन संज्ञान में आया है कि न्यायमूर्ति जब गैलरी से पास होते हैं तो कोर्ट ऑफिसर और अन्य दूसरे अधिकारी न्यायमूर्तियों के निकलने तक रुकते नहीं हैं। इसे अशिष्टता मानते हुए, कोर्ट ऑफिसर और अन्य अधिकारियों को न्यायमूर्तियों के निकलने तक उनके सम्मान में रुकने को कहा गया है।

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इस संबंध में जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी तरह की चूक को गंभीरता से लिया जाएगा। बार एंड बेंच की वेबसाइट के अनुसार शिष्टता के संबंध में इस तरह के आदेश पहले भी दिए जा चुके हैं। पहले मद्रास हाइकोर्ट ने भी न्यायमूर्तियों से आगे चलने और न रुकने को को राजदंड माना था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट को आगरा से उत्तर पश्चिम प्रांत के साथ इलाहाबाद में 1868 में स्थानांतरित किया गया था। वर्ष 2017 में इसने 150 साल पूरे किए हैं। इसमें देश भर में सबसे अधिक 160 न्यायाधीश नियुक्त हो सकते हैं।

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